Tuesday, October 24, 2017

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फौजी अंकल की प्यासी बीवी की गांड मारी

नमस्कार दोस्तों कैसे हो आप लोग | आशा करता हूँ की आप सभी लोग मस्त होंगे और रोज अपना कीमती वक़्त निकाल कर सेक्सी कहानिया पढ़ते होंगे और रोज जिसके पास चूत का प्रबंध होगा वो चूत मरता होगा और जिसके पास नही है चूत की व्यवस्ता वो अपना हाँथ जगन्नाथ करके मुठ मारता होगा | दोस्तों मैं आज आप लोगो को एक नयी कहानी बताऊंगा जिसमे मैंने एक फौजी की बीवी को चोदा उससे पहले आप लोग थोडा अपने भाई के बारे में जान लीजिये फिर मैं आप लोगो को सीधा कहानी की ओर ले चलता हूँ |
दोस्तों मेरा नाम शिवम गुप्ता है | मैं अलवर राजस्थान का रहने वाला हूँ | मेरा परिवार एक छोटा परिवार है जिसमे मेरे मूम्मी-पापा और मुझसे छोटे एक भाई और एक बहन है | पापा मेरे इंडियन आर्मी में सर्व करते हैं और मम्मी एक सीधी-सादी हाउस बीवी हैं जो घर पर ही रहा करती है |
मैं आप लोगो को रोज एक न एक नयी कहानी लिखकर पढवाता हूँ | दोस्तों आज मैं आप लोगो के लिए बहुत ही मस्त और सेक्सी कहानी लेके आया हूँ | तो चलिए दोस्तों मैं आप लोगो को अपनी ज्यादा बकवास न सुनाते हुए सीधा आप लोगो को अपनी कहानी की ओर ले चलता हूँ |

मेरे प्रिय भाइयों और बहनों ये बात उस समय की है जब मैं और मेरा एक दोस्त अपनी पढाई एक ही साथ आर्मी पब्लिक स्कूल में करते थे | मेंरे दोस्त का नाम मोनू सिंह था | उसके पापा भी आर्मी में थे और मेरे पापा के ही साथ में पोस्टेड थे | मैं राजस्थान का रहने वाला था और वो हरयाणा का रहने वाला था | हम लोगो के पापा की पोस्टिंग एक ही जगह थी इस लिए मेरे और उसके पापा अपनी फॅमिली के साथ आर्मी सेण्टर में रहते थे और अपनी पढाई वहीँ के आर्मी पब्लिक स्कूल में किया करते करते थे | मेरी और मेरे दोस्त की फॅमिली एक ही पास रहती थी | इसलिए मेरी और उसकी बहत अच्छी दोस्ती हो गयी थी | हम लोग एक दुसरे के घर भी चले जाते थे | मेरे और उसके पापा बहुत अच्छे दोस्त थे |
एक दिन मैं और मेरा दोस्त मोनू साइकिल से अपने स्कूल जा रहे थे | तभी हम लोगो को एक लड़की को रास्ते में साइकिल लेके खड़ी हुए देखा | वो हम लोगो के स्कूल की थी | हम लोग उसके पास रुके और पुछा की क्या बात है तब उसने बताया की मेरी साइकिल की चैन उतर गयी है और मुझे चढ़ानी नही आती है | मेरा दोस्त मोनू ने अपनी साइकिल खड़ी की और उसकी साइकिल की चैन चढाने लगा | उसने उसकी साइकिल की चैन को चड़ा दिया था | लड़की ने उसको थैंक्यू बोला और वो हम लोगो के साथ ही साइकिल पर बैठकर स्कूल को चल दी | रास्ते मैं मेरे दोस्त ने उससे खूब सारी बाते की और उसके बारे में ओ पूरी डिटेल ले ली | हम लोग अपने स्कूल पहुंचे और क्लास में जाके बैठ गये | मेरा दोस्त मोनू बस उसके बारे में ही बात किये जा रहा था | वो लड़की मेरे दोस्त को भा गयी थी | मोनू उसके बारे में दीवानों की तरह बाते करने लगा था | इंटरवल हुआ हम लोग अपना खाके हाथ धुलने के लिए वाशरूम गये थे | तभी वो लड़की और उसकी सहेलियां भी वहां खड़ी थी | वाशरूम में बहुत भीड़ थी इसलिए कोई भी जल्दी अपने हाँथ धुल नही पा रहा था | मेरे दोस्त मोनू ने वहां भी अपना इम्प्रैशन झाड़ना चाहा | उसने सबको कैसे न कैसे करके वहां से हटाया और उसको आगे आके हाँथ धुलने को बोला | उसने अपने हाँथ धुल लिए और मोनू को एक बार फिर से थैंक्स बोला | अब वो मोनू एक अच्छे दोस्त बन गये थे और धीरे-धीरे मोनू ने उसको सेट कर लिया था | अब मोनू मेरे साथ क्लास में नही बैठता था बल्कि उसके साथ ही बैठता था | एक दिन मोनू और उसकी गर्लफ्रेंड मेरे साइड वाली बेंच पर बैठे थे | टीचर अपना चैप्टर पढ़ा रही थी और तभी मेरी नज़र मोनू पर पड़ी वो साला इतना कमीना था की वो उसकी स्कर्ट में अपना हाँथ डाल कर उसकी झांघो को सहला रहा था और वो बैठी-बैठी बेंच पर मचल रही थी | पीरियड ख़त्म हुआ मैंने उसको अपने पास बुलाया और कहा की साले ये क्या कर रहा था | तब उसने मुझे बताया की यार मैं उसको चोदना चाहता हूँ | मैंने उससे बात कर ली है और मैंने उसको रात को उसके कमरे के पीछे मिलने को बोला है तुझे मेरे साथ चलना होगा | मैंने उसको पहले तो मना कर दिया पर वो साला इतना कमीना था की उसने मुझे मना लिया साथ में चले को | छुट्टी हुयी हम लोग घर आये और जब रात के 10 बजे तो हम लोग उसके कमरे के पीछे पहुंचे | वो झाडियो के पीछे खड़ी होके उसका इंतजार कर रही थी | मैं थोड़ी दूर पर खड़ा हो गया और मेरा दोस्त उसके पास जाके उससे चिपक कर उसको चूमने लगा | थोड़ी देर तक मैं वहीँ खड़ा रहा फ्फिर अचानक से मुझे आह आह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अहह अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह अहह ह अहः हह अह आह अह आहा अह अह आहा अह अह आह अह आहुंह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्होह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह ओह्ह इह्ह इह्ह की सिस्कारिया आ रही थी | थोड़ी देर तक मैं वहीँ खड़ा रहा फिर मेरा दोस्त आ गया और बोला चल भाई हो गया यार मजा ही आ गया उसकी चूत चोदने में |
धीरे-धीरे हम लोग आर्मी सेण्टर में हम लोग 4-5 साल रहे थे | मैंने अपनी पढाई पूरी कर ली थी और मोनू ने भी अपनी पढाई पूरी कर ली थी | अब हम लोग अपने-अपने शहर चले गये थे और वहीँ रहते थे | मोनू और मैं साथ में ही आर्मी की भर्ती देखते थे | मोनू मेरे से पहले भर्ती हो गया था उर मैं अभी नही हो पाया था | मैं अपने घर पर ही रहता था और आर्मी में जाने की तयारी में लगा था |
मेरे घर के पड़ोस में एक दुग्गल साहब का घर था | वो आर्मी में थे और कारगिल की लड़ाई में शहीद हो गये थे | वो मेरा पापा के बहुत अच्छे दोस्त थे | हम लोगो का परिवार जैसा हिसाब था | उनके एक ही लड़का था राजेश जो की उनके मरने के बाद फ़ौज ज्वाइन कर ली थी | उनके घर पर ऊनकी पत्नी और उनके लड़के की बीवी रहती थी | दुग्गल साहब की बीवी बहुत बुजुर्ग थी | पापा ने मुझसे कहा था की बेटा उनके घर का ख्याल रखना उनको किसी भी चीज की कमी न होने पाए | मैं उनके घर जाकर उनका कहा हुआ काम कर दिया करता था | एक दिन उने घर में कुछ चोर घुस आये थे | तभी उनकी राजेश भईया की पत्नी चिल्लाई मैं उनकी आवाज सुनकर गया | मुझे देख कर चोर खिड़की की ओर से चले गये थे | भाभी बहुत दारी हुयी थी तो मुझे उन्होंने ने वहीँ सोने को कह दिया | मैं भाभी के पड़ोस वाले कमरे में लेट गया और जग रहा था | थोड़ी देर के बाद भाभी मेरे कमरे में आयी और कहने लगी की मुझे डर लग रहा है मैं यहीं सो जाउं | मैंने ऊन्हे कहा की भाभी डरने की क्या बात है मैं हूँ न मैं जग रहा हूँ | वो तब भी नही मानी वो मेरे ही बेड पर लेट गयी | मैं एक दीदे में मुह घुमा कर लेट गया | थोड़ी देर तक भाभी आराम से लेती रही और फिर बाद में मेरी पीठ पर अपना हाथ से सहलाने लगी | मेरी नींद खुली और मैंने भाभी के हाथ को हटा दिया | थोड़ी देर के बाद भाभी ने अपना हाँथ मेरी कमर में डाल कर मुझसे चिपक कर मेरे मुह में अपना मुह डाल कर मेरे होंठो को चूसने लगी | मैं थोड़ी देर तक नीचे लेटा रहा फिर जब मैं भी गरम हो गया तब मैंने भाभी को अपने नीचे किया और उनके ब्लाउज का हुक खोल कर उनके बूब्स को पीने लगा | भाभी बहुत गरम थी और हाँ होती भी कैसे नही ऊनकी नयी-नयी सादी हुयी थी और राजेश भईया भी 5-6 महीने से घर नही आये थे | थोड़ी देर तक मैंने भाभी के बूब्स को पिया और फिर मैंने अपने और भाभी के सब कपडे उतार कर उनके दोनों पैरों को अपने हाथो में पकड़ कर अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया और जोर-जोर से उनकी चूत में दक्के दिए जा रहा था | भाभी भी बेड पर पड़ी अपने मुह से आह आहा अह आह अह आहा अह आहा अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह उन्ह उन्ह उन्ह्ह्ह उन्हह उन्हह उन्ह उन्ह ओह्ह्ह्ह ओह्ह ओझ्ह ओह्ह उन्ह उन्ह यूंह इह्ह इह्ह्ह इह्ह आह आह अह आहा की सिस्कारिया निका रही थी | थोड़ी देर तक मैंने भाभी को चोदा और फिर भाभी और मैं एक ही साथ झड गये |
तो दोस्तों ये थी मेरी कहानी | इस तरह से मैंने अपने पडोसी भाभी को चोदा जो की लंड की भूंखी थी और आज भी जब वो मुझे बुलाती है तब मैं उनको चोदता हूँ |
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