Monday, February 12, 2018

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अनजान चुदक्कड़ भाभी ने चूत चुदवाई

नमस्ते दोस्तो, मैं विशाल कड़ेला एक बार फिर अपनी दूसरी चुदाई की स्टोरी लेकर आपके बीच में हाजिर हूँ. मेरी उम्र 20 साल, मेरा कद 5 फुट 11 इंच है.. रंग मध्यम है.. मै थोड़ा भारी हूँ या यूँ कहूँ कि भरा पूरा हूँ। मेरे सेक्सी बदन को देखकर लड़कियाँ मुझे पसंद करती हैं। और मैं बी ए के सेकंड ईयर में पढ़ता हूँ. मैं पश्चिमी हरियाणा का रहने वाला हूँ.


एक महीने पहले की बात है, मैं चण्डीगढ़ शहर में पढ़ने के लिए जा रहा था. मुझे सुबह जल्दी जाना था.. तो मैं सुबह 7 बजे ही अपने घर से निकल गया. बस स्टॉप पर गया तो वहां एक भाभी खड़ी थीं. भाभी की उम्र लगभग 23-24 की होगी. उनकी शादी अभी हुई लग रही थी.

चंडीगढ़ की बस आ गई, मैं और भाभी बस पर चढ़ गए. बस में काफी भीड़ थी. मैं और भाभी पास में ही खड़े थे तो मेरा शरीर उनके बदन को टच कर रहा था. उनके स्पर्श से मेरा तो लंड एकदम से तन गया. क्योंकि उनका बड़ा ही मस्त फिगर था. भाभी की बॉडी भी एकदम फिट थी.
सेक्सी भाभी के साथ सट कर खड़ा होने का लालच में मुझसे रहा नहीं गया, मैंने इधर-उधर होने की कोशिश का नाटक किया की और भाभी से चिपक गया.

किसी बस स्टॉप पर बस रुकी और काफी यात्री उतर गए. फिर हम दोनों एक ही सीट पर बैठ गए.
अब मैंने उं भाभी से पूछा- भाभी, आप कहाँ जा रही हैं?
भाभी ने कहा- मैं अपने घर जा रही हूँ.
मैंने कहा- आप बहुत अच्छे स्वभाव की हैं क्योंकि आपने मेरे साथ बात तो की.
भाभी बोलीं- थैंक्स.
इसके बाद हम दोनों कुछ देर शांत रहे.



फिर भाभी बोलीं- आप कहाँ जा रहे हैं?
मैंने कहा- चंडीगढ़.
“किस लिए?”
“पढ़ने के लिए.”
भाभी ने कहा- बाहर जाकर अकेले रह कर बच्चे बिगड़ जाते हैं.
“मैं ऐसा नहीं करूँगा.”

भाभी इस बार अलग ही स्टाइल में बोलीं- चण्डीगढ़ में तो लड़कियां निक्कर में ही घर से बाहर निकल आती हैं. खूब देखोगे तुम भी?
मैंने कहा- नहीं भाभी, मैं ऐसा नहीं हूँ.
“अच्छा.. फिर कैसे हो!”
मैंने जवाब दिया- मैं पढ़ने जा रहा हूँ ना कि लड़कियां देखने!

फिर मैंने फोन बाहर निकाला और इयर फोन गाने सुनने लगा.
तभी इयरफोन का एक प्लग भाभी को देते हुए मैंने कहा- लो भाभी आप भी सुन लो गाने.
“सुना दो मुझे भी.”

तभी मर्डर फिल्म का गाना चलने लगा. भाभी का चेरा एकदम लाल हो गया, वो उत्तेजित होने लगीं मैंने वो गाना बंद कर दिया और दूसरा गाना चला दिया.

भाभी ने कहा- वो गाना बंद क्यों किया है?
“ऐसे ही.”

भाभी ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले लिया और कस के पकड़ लिया. मैंने दूसरा हाथ उनकी जांघ पर रख दिया. वो कुछ नहीं बोलीं. हम दोनों में खेल शुरू हो गया. भाभी की चुदास भड़क उठी थी. उन्होंने मेरे लंड पर हाथ रख दिया, तो मैंने इधर-उधर देखा और उनके दूध मसल दिए. मामला फिट हो गया था.

कुछ ही देर बाद भाभी का बस स्टॉप डेराबस्सी आ गया.

भाभी बोलीं- आओ मेरे घर चलते हैं.
मैंने मना किया तो भाभी बोली- एक घण्टे बाद चले जाना.. मेरे घर पर कोई नहीं है.
मैंने कहा- अच्छा चलो भाभी.. चलते हैं.

हम दोनों घर आ गए. भाभी का घर नई बनी कालोनी में था जहाँ काफी प्लाट खाली थे.

घर जाकर भाभी ने चाय बनाई और दोनों ने पी.
चाय पीकर मैंने भाभी को कहा- भाभी, अब मैं चलूँ?
“रुको..”
“क्यों!”
“पहले तो तुम मुझे मेरा नाम लेकर पुकारो. मेरा नाम ममता है.”
मैंने आँख मारते हुए कहा- तो ममता डार्लिंग, मैं अब जाऊं?

डार्लिंग सुनते ही ममता भाभी मुझसे लिपट गई, अब मैंने उनको बांहों में ले लिया और किस करने लगा. वो गर्म होने लगीं. मैंने उनके होंठों को मुँह में ले लिया और चूसने लगा. फुद्दी चुदाने को राजी भाभी.

फिर मैंने अपनी शर्ट उतार दी. भाभी भी अपने कपड़े उतार कर नंगी होने लगी. मैंने अपनी पैन्ट उतार दी और भाभी अपनी शर्ट और ब्रा उतार चुकी थी. मैंने भाभी की सलवार और पेंटी उतारी.
आह क्या नजारा था.. मैं तो जैसे घायल ही हो गया. मैं उनकी फ़ुद्दी पर टूट पड़ा. मैंने अपनी एक उंगली भाभी की फुद्दी में घुसा दी और उनकी चूची चूसने लगा.

भाभी चुदास से बुरी तरह तड़फने लगी- आईईआ ऊऊ ओऊऊ.. ईओईई ववे!
अब मैंने 69 की पोजीशन बनाई और अपना लंड उनके मुंह में दे दिया. उन्होंने मेरे लंड को पूरी मस्ती से चूसा. मैं भाभी की चूत में उंगली करता रहा मैंने उनकी चूत नहीं चूसी.

भाभी पूरी लगन से मेरा लंड चूस रही थी तो जल्दी ही मैंने अपना वीर्य उनके मुँह में छोड़ दिया.. जिसे वो पी गई.

ममता भाभी मेरा सारा वीर्य पी चुकी थी, मेरा लंड सुकड़ कर छोटा हो गया और मैं बिस्तर पर लेट गया.
मैंने भाभी को पानी लाने को कहा तो भाभी नंगी ही पानी लाइ मेरे लिए. मैंने थोड़ा सा पानी पिया और भाभी को मैंने बिस्तर पर खींच लिया और फिर से चूमा-चाटी शुरू कर दी.

दस मिनट बाद मेरा तो लंड फिर से तन गया. मैंने कहा- ममता डार्लिंग, घोड़ी बन जाओ.
वो नहीं मानी और कहने लगीं- ऐसे ही ऊपर आकर कर लो.
मैं भाभी के ऊपर चढ़ गया, उनके दोनों पैर उठाए और फुद्दी में लंड का सुपारा फंसा कर उनके ऊपर लेट गया और चूची चूमने में लग गया.
तभी मैंने हल्का सा ढका मारा तो थोड़ा सा लंड अन्दर जाते ही ममता रानी तो उछल पड़ी- आह.. बहुत दर्द हो रहा है.. ऐसी क्या जल्दी है तुम्हें.. धीरे-धीरे करो!

मैंने धीरे-धीरे पूरा लंड पेला और चुदाई चालू करके स्पीड बढ़ा दी. वो मादक सिसकारियां भरने लगी- आआह.. औऊह.. बहुत मोटा है.. आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह विशाल धीरे चोदो.. मार दिया मुझे..
मैंने कहा- भाभी डार्लिंग ये बताओ मजा आ रहा है ना?
“हाँ.. पर धीरे करो प्लीज़.. दो मिनट जरा रुको.. लग रही है..”
मैंने उनकी एक न सुनी उलटे झटके तेज कर दिए और कुछ देर चुदाई के बाद उनकी चूत में ही वीर्य विसर्जन कर दिया.

कुछ देर बाद हम दोनों उठे, भाभी ने अपनी चूत साफ़ की, मेरे लंड को भी तौलिये से पौंछा और फिर ममता चाय बनाने चली गई.
हम दोनों ने पी, चाय पीते पीते मैंने भाभी से पूछा- यार ममता, तुम ऐसे कैसे मेरे जैसे अनजान लड़के को अपने घर ले आई और चूत चुदाई करवा ली?
वो बोली- यार, चार महीने तो मेरी शादी को हुए हैं, पिछले बीस दिन से मायके में थी, सोचा था कि मायके में पुराने यार का लंड मिलता रहेगा लेकिन पटा लगा कि वो साला भी दिल्ली में नौकरी करने चला गया और लंड के बिना मेरा गुजारा नहीं होता. तुम बस में मिले तो सोचा कि चलो आज तुम्हारे लंड से ही काम चलाऊँगी.
मैंने पूछा- और तुम्हारे पति?
वो बोली- वो चण्डीगढ़ जॉब करते हैं, वो रात आठ बजे से पहले नहीं आने वाले! और रात तक का इन्तजार मेरे लिए मुश्किल था.
मैंने पूछा- तुम्हारे पति कैसी चुदाई करते हैं?
वो बोली- बहुत मजा देकर चोदता है वो! तुम्हारे जैसा ही लम्बा और मोटा है उसका लंड भी!

इसी तरह की काफी सेक्सी बातें करते करते हम दोनों फिर गर्म हो गए तो मैंने एक बार फिर ममता भाभी की चुदाई की और मैं चंडीगढ़ के लिए निकल गया.
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