Monday, February 12, 2018

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भाभी ने गिफ्ट में सहेली की चूत दिलवाई

जिससे वह एक सुन्दर लड़के की माँ बन चुकी थी, जिसकी शक्ल बिल्कुल मुझसे मिलती है.

एक दिन जब मैंने उससे कहा- मुझे कुछ इनाम तो दो, तो कहने लगी- बोलो क्या चहिये?
मैंने कहा- अपनी किसी सहेली की सुन्दर सी चूत दिलवा दो.
पहले तो वह मेरी मांग से सकपका गई और बोली- मुझसे बोर हो गए हो क्या? मैंने कहा- ऐसी बात नहीं है, फिर भी कभी चेंज हो जाए या हम ग्रुप सेक्स कर लें तो ताज़गी आ जाती है.

वह सोच कर बोली- ठीक है, एक मेरे हस्बैंड के दोस्त की मस्त सी, बहुत ही सुन्दर बीवी है. वह सदा रोमांटिक बातें करती रहती है, उस को पटाती हूँ. उस का नाम शिवानी है, एक 2 साल का बच्चा भी है. उस का पति भी मेरे हस्बैंड जैसा ही लल्लू है. परंतु वह थोड़ी सी चबी (मोटी) है, परन्तु मस्त माल है.
मैंने कहा ठीक है- मैं तुम्हारे गिफ्ट का इन्तजार करूँगा. मैंने उसे ‘किस’ किया और अपने कमरे पर आ गया.

वैशाली और मैं मिलते रहे और चुदाई करते रहे. उसने एक रोज मुझे सोसाइटी के एक फंक्शन में अपने पति से मिलवाया और मेरी इंट्रोडक्शन करवाते हुए अपने पति को बताया- ये मिस्टर राज शर्मा हैं, मेरे कॉलेज में क्लास फैलो थे. बड़े शरीफ और अच्छे इंसान हैं, ये एक एम.एन.सी में बड़ी पोस्ट पर हैं.
वैशाली के पति ने मुझे कहा- कभी घर पर आओ.
मैंने कहा- जब भी बुलाओगे आ जाऊंगा.

एक दिन वैशाली ने फ़ोन पर बताया कि आज सायम् को उन्होंने शिवानी और उस के हस्बैंड को खाने पर बुलाया है, मैंने मेरे पति से बात कर ली है कि हम लोग आज राज को भी बुला लेते हैं. तो आप सायम् 6.30 बजे घर आ जाना और शिवानी से दोस्ती कर लेना.



उसने बताया कि 7.30 बजे उस के हस्बैंड और उस का दोस्त ड्यूटी पर चले जाएंगे, क्योंकि उनकी 8 बजे रात को शिफ्ट शुरू होती है. वे दोनों एक ही कंपनी में काम करते है. शिवानी आज रात मेरे घर ही रुकेगी.

मेरे पूछने पर उसने बताया- शिवानी को मैंने तुम्हारे बारे में बता दिया था कि तुम मेरे क्लास मेट रहे हो और काफी अच्छे, जिंदा दिल और रोमांटिक आदमी हो, और कुछ नहीं बताया है, शिवानी भी मिलने की इच्छुक लग रही थी.

मैं जान बूझ कर 7 बजे उनके घर गया. जैसे ही बैल बजाई, एक लेडी ने दरवाजा खोला, वैशाली किचन में थी. मैं समझ गया वही शिवानी थी. उसे देख कर मेरे होश उड़ गए. बला की सुन्दर थी वह. एक दम गोरा रंग, मोटे, गोरे, सेब जैसे लाल गाल, बड़ी बड़ी चूचियाँ, मोटी हिरणी जैसी शरारती आँखें.

जब पीछे मुड़ कर चली तो बला की सुन्दर गोल गांड, सुडौल जांघें और पट. ऊपर स्लीवलेस लो कट का टॉप पहन रखा था, जिसमें से उस के आधे मम्मे उस के निप्पलों के पास तक उभरे हुए थे. उस के साइज़ का मुझे कोई अनुमान नहीं था, परंतु वह मस्त माल थी, एक दम मलाई कोफ्ता.
वैशाली जिसे मोटी बता रही थी वह दरअसल मांसल सुन्दर शरीर वाली थी, जिसके ऊपर दो उंगल मांस था, जिसे देखते ही लिपट जाने को दिल करे. बिल्लो रानी थी वह. शिवानी ने एक टाइट प्लाजो पहन रखा था जिसमें उस के पट और चूतड़ तो फंसे हुए थे परंतु उस का प्लाजो नीचे से खुला था.

मुझे देख कर दोनों के हस्बैंड ने खड़े होकर हाथ मिलाया और आपस में परिचय लिया, दिया. उन दोनों ने बियर के गिलास ख़त्म किये थे और खाना खाने की तैयारी कर रहे थे.
तब तक शिवानी मेरे लिए एक पानी का गिलास ले कर आई, तो मैंने गिलास पकड़ते हुए उस की उंगलियों को थोड़ा दूर तक टच कर लिया था. वह मुस्करा दी.

पानी देख कर वैशाली के हस्बैंड ने कहा- पानी नहीं, बियर लाओ.
मैंने थोड़ा नाटक करते हुए कहा- नहीं, मैं आज लेट हो गया, आपको जल्दी है तो मैं भी चलूँगा.
वैशाली ने कहा- हम ने आपको डिनर पर इन्वाइट किया है, ऐसे कैसे चले जाओगे?
मैंने कहा- मैं तो डिनर 9 बजे करता हूँ, इतनी जल्दी कैसे करूँ, फिर आऊंगा.

शिवानी के हस्बैंड जो देखने से ही कागजी पहलवान लगता था, बोला- जल्दी हमें है, आपको तो नहीं है, आप आराम से बैठो और खाना खा कर जाना.
वैशाली के हस्बैंड ने भी जोर दिया, तो मैं बैठ गया.

शिवानी मेरे लिए एक बियर का मग लेकर आई. उन दोनों पतियों ने फटाफट खाना खाया और अपने बैग और हेलमेट उठा कर, अपनी चांदी जैसी गोरी और सुन्दर दो बीवियों को चोदने के लिए मेरे हवाले छोड़ कर चले गए.
जाते हुए मुझे बोल गए- एन्जॉय योरसेल्फ.

उनके जाते ही शिवानी ने दरवाजा बंद किया और मुझे स्नैक्स देते हुए बोली- ड्रामा अच्छा कर लेते हो.
मैंने कहा- मैं तो इसलिए जा रहा था, कहीं आपको बुरा न लगे.
मेरा इतना कहते ही उसने मेरे बियर के मग को उठा कर उसमें से एक सिप ले लिया और बोली- अब ठीक है.

मैंने उस का हाथ पकड़ा और झटका दे कर साथ में सोफे पर बैठा लिया.
वह कहने लगी- वैशाली आ जायेगी.
मैंने कहा- वैशाली तुम्हारे से पहले मेरी फ्रेंड है.
शिवानी बोली- अच्छा तो जनाब हाथ साफ़ कर चुके हैं.

इतनी देर में वैशाली आ गई, वह सुन चुकी थी, कहने लगी- यहाँ शर्म आ रही है तो अन्दर बेड रूम में जा कर बैठ जाओ.
जैसे ही वैशाली मेरे पास आई मैंने उसे खींच कर अपनी गोदी में बैठा लिया, वह बोली- मुझे छोड़ो, आपसे मिलने को बेकरार शिवानी थी, उसे गोदी में बैठाओ.
और वह उठ कर किचन में चली गई.

शिवानी ने बियर के तीन मग भरे और हम तीनों बियर पीने लगे. वैशाली अपना मग किचन में ले गई. शिवानी दूसरे सोफे पर बैठ गई थी. मैंने शिवानी को कहा- इतनी दूर मत बैठो. वह जैसे ही उठी, मैंने उठ कर उसे बाहों में भर लिया और कस कर ऊपर उठा लिया और उस के होठों पर अपने होंठ रख दिए. हम बहुत देर तक स्मूच करते रहे. मैंने उस के सारे शरीर पर हाथ फिराया और उसे अपनी गोदी में बैठा लिया.

उसने आँखें बंद कर के मेरी छाती पर अपनी पीठ लगा दी. मैंने उस के शरीर के हर अंग की तारीफ़ की और चूमता रहा. मैंने उस से कहा- वैशाली ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया तो था कि तुम सुन्दर हो, परंतु इतना नहीं पता था कि तुम वास्तव में इतनी मस्त हुश्न की मलिका होगी.
वह अपनी तारीफ़ सुन कर मेरे गले से लिपट गई.

मैंने बियर का गिलास ख़त्म किया और उसे भी ख़त्म करने को कहा. वह एक सांस में पूरा गिलास पी गई. उस पर बियर का असर होने लगा था. मैंने शिवानी से उस की सेक्स लाइफ के बारे में पूछा तो बोली- आपने अभी तो मेरे हस्बैंड को देखा है, क्या वह मेरे लायक है?
वह बोली- छोड़ो, इन लल्लुओं की बात मत करो.

जब वह मेरी गोद में बैठी थी तो मेरे लंड को वह अपनी गांड के नीचे नाप चुकी थी. वह मेरे आठ इंची लंबे और तीन इंची मोटे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी. लंड ने पैंट को बुरी तरह से ऊपर टेंट की तरह उठा रखा था.

मैं भी उस के चुचों को उस के टॉप के ऊपर से मसल रहा था. साथ में उस के प्लाजो में टांगों के बीच उभरी उस की पकोड़ा सी चूत को हाथ से सहला रहा था और साथ ही उस के पटों पर हाथ फिरा रहा था. मैंने शिवानी के टॉप और ब्रा को ऊपर उठा दिया और उस के मांसल और मोटे चुचों को चूसने लगा.

तभी वैशाली का फ़ोन बजा, उस के पति का ऑफिस से लैंड लाइन से फ़ोन था जिसका मतलब था कि वे दोनों पहुँच चुके हैं. उसने मेरे बारे में पूछा तो वैशाली ने बताया कि खाना खा रहे हैं, जबकि मैं उस वक्त खा रहा था शिवानी की चूची को. वैशाली ने बताया कि लाइन क्लियर है.

शिवानी उठी और बाथरूम कह कर एक बेड रूम में चली गई. वैशाली ने मुझे इशारा किया. मैंने चुपके से एक वियाग्रा की टेबलेट खाई और मैं भी उस के पीछे बेड रूम में चल पड़ा. जाते हुए वैशाली ने मुझे पीछे से बाँहों में पकड़ लिया और बाहों में भर कर बोली- मुझे भूल तो नहीं जाओगे. मैंने उसे किस किया और कहा- चिंता मत करो. दोनों बच्चे एक अलग बेड रूम में सो रहे थे.

मैंने थोड़ा दरवाजा बंद कर लिया. शिवानी बाथरूम से बाहर निकली तो मुझे देखते ही मुझसे लिपट गई. मैं उस के होठों को फिर चूसने लगा. कुछ देर खड़े खड़े स्मूच करने के बाद मैंने शिवानी से पूछा- कुछ अपने बारे में बताओ, तुम आज यहाँ क्या सोच कर आई थी?

शिवानी मेरी बाँहों में खड़ी खड़ी बोली- वैशाली से आपकी बहुत तारीफ़ सुनी थी, इसलिए मिलना चाहती थी, मैंने सोचा था कि अगर ठीक लगा तो तुमसे दोस्ती कर लूंगी. परंतु तुम्हें देखते ही मन खराब हो गया और जब हाथ छू कर तुमने पहल कर दी तो सोचा आज ही तुमसे चुदवा लूंगी.

मैंने पूछा- तुम्हें किस तरह का सेक्स पसंद है?
तो वह बोली- मुझे खूब प्यार करो, मेरी चूचियाँ मसलो, इन्हें चूसो, मेरे होठों को चूसो, मेरे गालों पर प्यार करो… परंतु गालों पर निशान नहीं डालना, और जहाँ मर्जी काटो, मेरी चूत को प्यार करो. मेरे सारे शरीर को चूमो, राज! मैं बहुत प्यासी हूँ, मेरी जम कर मस्त चुदाई करो, जिससे मेरी पोरी पोरी दर्द करने लगे.

दोस्तो! मेरा चुदाई का एक ही मकसद रहा है कि मुझे मजा आये या न आये परन्तु औरत को मजा आना चाहिए, वह बार बार झरती रहे और मजा लेती रहे और मेरी चुदाई को भूले नहीं.

जैसे ही मैंने उसे चूमना शुरू किया, उसने मेरे लंड को पैन्ट के ऊपर से पकड़ लिया और मसलने लगी. वह बोली- राज! एक मिनट रुको, मैं तुम्हारा हथियार देखना चाहती हूँ, पिछले एक घंटे से मैं तुम्हारी फूली हुई पैंट देख रही हूँ, प्लीज, एक बार पहले दिखाओ.
मैंने कहा- खुद निकालो.
उसने मेरी पैंट की ज़िप खोली और मेरा लंड बाहर निकालने के लिए सुन्दर नेल पोलिश लगी अपनी नर्म और मुलायम उँगलियों को पैन्ट के अन्दर डाला और लंड को बाहर खींचने लगी. परंतु लंड इतना लम्बा और मोटा था कि उससे निकाला ही नहीं गया.

शिवानी ने मेरी बेल्ट खोली और पैंट को नीचे खिसका दिया. मेरा लौड़ा अंडरवियर में तन कर खड़ा था. उसने जैसे ही अंडरवियर को थोड़ा खींच कर नीचे किया, फनफनाता हुआ मेरा लौड़ा उस के सामने झटके से मोटे साँप की तरह बाहर निकल कर एक दम मेरे पेट पर लगा.

लौड़े को देखकर शिवानी की आँखें फटी की फटी रह गई, एक दम बोली- ओह माई गॉड, इतना बड़ा!
उसने लपक कर लौड़े को दोनों हाथों में पकड़ लिया और बोली- मेरे हस्बैंड का लंड तो उस के टट्टों में ही घुसा रहता है, जब खड़ा होता है तो दो ढाई इंच का होता है.
शिवानी ने मेरी पैंट और अंडरवियर को नीचे जमीन तक खींच कर निकाल दिया. मैंने भी उस का टॉप और ब्रा निकाल कर उस के बड़े बड़े खड़े चुचों को आजाद कर दिया. क्या मस्त चुचे थे. उस के खड़े और सुडौल मम्मे आपस में इतने सटे हुए थे कि उनके अंदर एक उंगली भी नहीं जा सकती थी.

मैं बेड के कोने पर पाँव नीचे लटका कर बैठ गया और उस को अपनी टांगों के बीच खड़ी कर के उस के मस्त चुचों को मुंह में भर कर चूसने लगा. वह आँखे बंद कर के सीत्कार भरने लगी. शिवानी मेरे लंड से खेलती रही, मैं एक हाथ से उस की पैंट के ऊपर से चूत को सहलाता रहा, उस के चूतड़ों पर हाथ फिराता रहा. अचानक वह पीछे हटी और अपना प्लाजो निकालने लगी, उस ने साथ ही अपनी पैन्टी भी निकाल दी.

शिवानी मेरे सामने एक दम नंगी खड़ी थी, उस की चूत का फूला हुआ हिस्सा लाजवाब था. मुझे हमेशा अपने लंड पर घमण्ड रहा है परंतु उस हसीना की चूत, जांघें और उस की हाथी के सूंड के आकार जैसी गोरी टांगों को देख कर मेरे लंड का घमंड ख़त्म हो गया. उस की चूत के ऊपरी मांस में केवल एक पतली सी गुलाबी झिरी दिखाई दे रही थी. मुझे टक्कर की गुदाज और बाल रहित चूत मारने को मिल गई थी.

मैंने झट से उस की चूत को अपने हाथ से छुआ और उस में बीच की उंगली चलाने लगा. चूत अपने रस से गीली हो चुकी थी.

मैं बेड से खड़ा हो गया. शिवानी ने अपनी टांगों को थोड़ा चौड़ा किया और मेरा लंड पकड़ कर खड़े खड़े अपनी चूत पर टिका लिया. मेरा 90 डिग्री पर खड़ा लौड़ा उस की चूत के छेद पर अड़ गया. शिवानी मेरे लौड़े को पकड़ कर जोर जोर से अपनी चूत के छेद और दाने पर रगड़ने लगी.

मैं उस के बताये अंगों को खड़ा खड़ा सहला और चूस रहा था. कुछ देर जोर जोर से दाने पर रगड़ने के बाद शिवानी एक दम बेड पर टाँगें चौड़ी करके लेट गई और बोली- राज! हम पहले एक राउंड चुदाई का लगा लेते हैं, मुझसे रुका नहीं जा रहा. फोरप्ले बाद में करेंगे, जिंदगी में पहली बार ऐसा लौड़ा देखा है, अब मेरे ऊपर चढ़ कर इस का कमाल दिखाओ.

मैंने ऐसा गोरा और गुदाज शरीर पहली बार लेटे देखा था. मैंने बिना देर किये उस की चूत पर एक किस किया, थोड़ा दाने को चूसा तो वह चीखने लगी. बोली- राज, प्लीज ये बाद में, पहले अन्दर डालो.
मैंने उस की टांगों को फैलाया और पाव रोटी सी चूत को खोल कर देखा, अन्दर की पत्तियां और चूत बिल्कुल गुलाबी रंग की थी.

चूत पानी छोड़ छोड़ कर चिकनी हो चुकी थी. मैने जैसे ही लंड को चूत के छेद पर रखा, शिवानी ने अपने हाथ से पकड़ कर मेरे लंड को खुद ही अन्दर कर लिया. एक ही झटके में मैंने पूरा आठ इंच का लंड उस की चिकनी चूत में उतार दिया. मजे और दर्द से उस की चीख निकल गई जिसे सुनकर वैशाली अन्दर आ गई.
वैशाली ने देखते ही कहा- इतनी जल्दी चुदाई भी शुरू कर दी?
मैंने कहा- तुम्हारी यह फ्रेंड तो कई जन्मों की प्यासी है.

वैशाली ने शिवानी के मम्मों पर हाथ फिराया और दो तीन चुसके मारे.
शिवानी आह.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… जोर से करो… आदि बके जा रही थी.

मैंने चुदाई रोक कर जोर से उस के दोनों मम्मों को अपने दांतों से काट लिया, वह मजे से चीख रही थी. मैंने उस की चूत से लंड निकाला और उस के पटों को चूसने लगा. मैंने उस की जांघों के पास से पटों पर काट काट कर नीला कर दिया. वह इतनी सॉफ्ट थी कि जहाँ भी चूसता या काटता, वहीं निशान पड़ जाता था.

उसने फिर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और बोली- अंदर डाल कर चोदो.
मैंने उस के दोनों घुटनों को मोड़ा और ताबड़ तोड़ लंड से शॉट मारने लगा. शिवानी अपनी गर्दन को मजे में इधर उधर मार रही थी और अनाप शनाप बोले जा रही थी- चोदो… हां ऐसे ही… फ़क मी हार्ड… ओह माई गॉड… फ़क मी… फाड़ दो सब कुछ… फ़क मी.

उस के बाल उस के मुंह पर बिखर गए थे. मैं बालों को हटा कर उस के गालों को चूसने लगा तो वह बोली- प्लीज यहाँ निशान नहीं डालना.
मैंने उस के होठों को चूसना शुरू किया जो लगभग गुलाबी से सूज कर नीले हो गए थे.

जब मैंने पूछा कि जब हस्बैंड चूचियों पर निशान देखेगा तो?
तो वह बोली- उस को तो मैं नजदीक ही नहीं आने देती, वह तो देखता भी नहीं है, उस के लंड में दम ही नहीं है. उस से तो अपने ऑफिस का काम ही खत्म नहीं होता और अब तो तुम मिल गए हो, उस की तो छुट्टी समझो.

शिवानी ने बताया- एक बार उसने अपनी सोसाइटी के बाहर जंगल में एक घोड़े को अपने दो फुट लम्बे बड़े लंड से घोड़ी को चोदते हुए देखा था, तब से मन था कि कोई घोड़े जैसे लंड से मुझे भी घोड़ी बना कर चोदे. मैंने उस रोज मेरे हस्बैंड को सेक्स के लिए उकसाने की कोशिश की परंतु वह उत्तेजित ही नहीं हुआ, तभी से मेरे दिमाग में वही सीन बसा हुआ है.
उस ने बताया- दरअसल मैंने पैंट में तुम्हारे लंड का अंदाजा लगा लिया था कि मेरी वह इच्छा तुम पूरी कर सकते हो.

मैंने उसे प्यार से किस किया और कहा- क्या मेरा चलेगा?
वह बोली- मेरी यह तमन्ना आज पूरी कर दो. मेरे हस्बैंड का तो इतना छोटा है कि मेरे चूतड़ों से आगे ही नहीं जाता.

मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा. वह तुरन्त अपनी गांड मेरी और करके घोड़ी बन गई. दोस्तो! क्या मस्त चूतड़ और गांड थी शिवानी की. मैंने काफी देर उस के चूतड़ों को सहलाया, उन पर किस किया और फिर चूस, काट कर आठ दस जगह नीले निशान बना दिए. एकदम चिकने और मांसल चूतड़ थे उस के.

मैंने पूछा- कभी गांड मरवाई है?
तो वह बोली- गांड तो क्या कभी पीछे से चूत में भी ढंग से नहीं गया है, आज तुम्हें जो अच्छा लगता है वह कर लो, बेशक मेरे शरीर के जितने छेद हैं, सब में अपना ये घोड़े जैसा लंड डाल कर फाड़ दो.
मैंने कहा- नहीं, जो तुम्हें अच्छा लगता है वही करूँगा.

मैंने उस की चिकनी, बाहर को निकली सुन्दर गुलाबी चूत की फांकों को अपनी उंगलियों से अलग किया और उसमें अपना सुपारा डाला और लंड को उस की चूत की गहराई में उतारने लगा. उस की गुदाज कमर को अपने हाथों से पकड़ कर उसे चोदना शुरू किया. वह हर धक्के पर आह… उह… करती रही. मैंने लगातार धक्के जारी रखे, उस के गुदाज और गोरे चूतड़ों पर थाप की आवाजें आ रही थीं. ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी डनलप पिल्लो को चोद रहा हूँ.

शिवानी ने कहा- थोड़ा जोर से करो, डरो मत.
मैंने स्पीड बढ़ा दी. कमरा फ़च फ़च की आवाजों से गूंजने लगा. यहां तक कि हर धक्के पर बेड भी चरमराने लगा था. उस की सांसें फूलने लगी और उसने अपना सिर इधर उधर मारना शुरू कर दिया, यहाँ तक कि वह हर धक्के पर अपनी गांड को मेरे लंड पर दे दे कर मार रही थी.

बेड की चरमराहट और जोर जोर की आवाजें सुन कर वैशाली फिर अंदर आ गई, वह बोली- आवाजें बाहर सुनाई दे रहीं हैं, धीरे बोलो.
वैशाली ने बीच में अपना हाथ डाला और मेरे लंड हो हाथ से पकड़ कर बाहर निकाल दिया और शिवानी की गांड और चूतड़ों पर फिराने लगी.
उसी वक्त शिवानी बोल पड़ी- यार तुमने इतने मजे लिए हैं, आज भी बीच में आ रही हो, राज को करने दो.
वैशाली चली गई.

दोस्तो! हर आदमी जब भी अपना लंड किसी औरत की चूत में डालता है तो वह लंड को अपने हाथ से पकड़ कर ही डालता है, परंतु घोड़ा या दूसरे जानवर सीधा मादा के ऊपर चढ़ कर कई बार छेद पर आगे पीछे ट्राई करके डालते हैं.

मैंने शिवानी को बेड के बीच में किया और मैं ठीक घोड़े की तरह उस की कमर पर एक झटके से चढ़ा और फिर पीछे से शिवानी की चूत में लंड को बिना पकड़े डालने लगा. लंड कभी उस के पेट के नीचे जांघों के बीच में चला जाता तो कभी उस की गांड के छेद पर रगड़ खाता.

शिवानी ने अपने हाथ जोर से बेड पर जमा रखे थे, मैंने अपनी छाती उस की कमर पर टिका दी और लंड अंदर करने की कोशिश करने लगा.
उसने कहा- हाँ घोड़ा ऐसे ही कर रहा था.
तीन चार बार आगे पीछे होने के बाद मेरे लंड ने चूत के छेद को ढूंढ लिया और उसमें घुस गया. वह मजे से चिल्ला उठी और जोर से बोली- चोदो…
मैंने उस की कमर पर चढ़े चढ़े उसे चोदना शुरू किया और अपने लटक रहे हाथों से उस के मम्मे जोर जोर से मसलने लगा. इस क्रिया में उसे बहुत मजा आया.

शिवानी ने कहा- वही एक्शन दुबारा करो.
मैं उस के ऊपर से उतर गया और घोड़े की तरह उस के पीछे घोड़ा बन गया. मैंने उस के चूतड़ों पर अपनी ठोड़ी रखी और धीरे धीरे उस के चूतड़ों को किस करते हुए उस की चूत को चाटने लगा. उसने थोड़े पाँव चौड़े किये. जैसे ही उसने पाँव चौड़े किये, मैं फिर से जम्प लगा कर उस की कमर पर चढ़ा और फटा फट लंड को ऊपर नीचे ठोकने लगा. जल्दी ही लंड फिर उस की चूत में एक झटके से घुसड़ गया. वह मजे से फिर चीख उठी, बोली- हाँ… ऐसे ही करो…

उस की कमर पर अपना भार डाले डाले मैं लंड को अंदर बाहर करने लगा. उसे मजा आ रहा था. उस की फैंटेसी पूरी हो रही थी. उस की चूत ने 10-12 धक्कों के बाद पानी छोड़ दिया और वह निढाल हो गई.
उसने कहा- मुझे बाथरूम जाना है.
वह बाथरूम चली गई.

तभी वैशाली खाने के लिए बुलाने अंदर आ गई. मेरा लंड पूरा खड़ा देख कर वह बोली- गिफ्ट पसन्द आया?
मैंने कहा- बहुत ज्यादा.
मैंने उससे कहा- या तो अपना काम करो या नंगी हो कर साथ लेट जाओ.
वह कहने लगी- डिनर तैयार है, 10 बज चुके हैं.

मैंने झट से वैशाली को बेड पर पटक दिया और उस की स्कर्ट को उठा दिया. उसने पैन्टी नहीं पहनी थी. चूत एकदम गीली थी, मैंने बिना देर किये उस की टांगों को चौड़ा किया और एक ही झटके में पूरा लंड अंदर घुसा दिया. वह मजे से चीख उठी. मैंने उस की टांगों को अपनी बाहों में उठा कर 10-12 झटके मारे तो उस का पानी निकल गया.

इतनी देर में शिवानी बाथरूम से बाहर आई तो बोली- आखिर चुदवा ही लिया तुमने भी.
तभी वैशाली ने कहा- कुछ खा लो.
शिवानी कहने लगी- यार, मैं तो 4-5 बार झड़ चुकी हूँ, राज के झड़ने के बाद खाना खाते हैं.

अब की बार उसने मुझे बेड पर नीचे लिटा लिया और खुद मेरे लंड पर चढ़ कर उस पर उछलने लगी. लंड को चूत में ले कर वह मेरे ऊपर लेट गई और मुझे किस करने लगी.
शिवानी बोली- राज, अब मैं थक गई हूँ, तुम कर लो.
मैंने शिवानी को बेड के किनारे पर घोड़ी बनाया और उस की चूत पर ताबड़ तोड़ धक्के लगाने लगा. उसने अपने चुचे और छाती को बेड पर टिका लिया. मैंने उस की जांघों को पकड़ा और लंड से चूत में तूफ़ान मचा दिया. जब थप थप की आवाजें जोर से आने लगी तो शिवानी अंदर आई और बोली- राज! अब डिस्चार्ज भी करो.

तभी मैंने अपना सारा ध्यान चुदाई पर लगाया और मेरे लंड से पिचकारियां निकलनी शुरू हो गई. लगभग 10-12 पिचकारियां लगी और मैं उस की चूत में लंड डाल कर उस से चिपक कर खड़ा हो गया, लंड अब भी धीरे धीरे वीर्य छोड़ रहा था.
शिवानी बेड पर पसर गई. मेरे वीर्य और उस के मदन रस से बेड की चादर भीग गई. वह गांड चौड़ी करके पेट के बल लेटी रही, चूत से रस निकलता रहा.

वैशाली ने उस की चूत से निकलते वीर्य को अपने हाथ में भर कर उस की गांड पर मल दिया और बोली- मेम साहिब! अगर कुछ कमी रह गई हो तो खाना खा कर पूरी कर लेना. अब गाउन पहन कर आ जाओ.

मैंने केवल पैन्ट पहनी और डाइनिंग टेबल पर बैठ गया. शिवानी डगमगा कर चल रही थी. उन्होंने मुझे एक बियर का मग और दिया और हम तीनों ने थोड़ा खाना खाया.

शिवानी ने बाथ रूम में चूत को साफ़ किया और थोड़ा मुंह धो कर, क्रीम लगा कर दुबारा तैयार हो गई. मैंने भी बाथरूम में अपना लंड साफ़ किया, उस पर थोड़ी क्रीम लगाई और आकर बेड पर लेट गया.

शिवानी नंगी हो कर मेरे साथ बेड पर लेट गई, उसने मेरी पैंट को नीचे किया और लंड को मुंह में भर कर चूसने लगी.
मुझे अभी भी वियाग्रा का असर था. मैंने उसे 69 की पोजीशन में लिया और थोड़ी देर बाद सीधा करके, उस की टांगों को कंधे पर रख कर चोदने लगा. कुछ देर बाद उसे घोड़ी बना कर चोदने लगा तो पलंग फिर हिलने लगा.
शिवानी फिर से आह… ऊह… जोर से करो… हाय राजा मार दिया… आदि बोलने लगी. शिवानी थोड़ी चबी अर्थात थोड़ी गुदाज थी, इसलिए आज अलग ही मजा आ रहा था.

कुछ देर की घमासान चुदाई के बाद शिवानी का पानी छूट गया और मैंने भी अपना लंड बाहर निकाल कर उस की गांड और चूतड़ों को अपने लंड की पिचकारिर्यों से भिगो दिया. हम संतुष्ट हो कर एक दूसरे के चिपक कर सो गए.

रात के तीन बजे शिवानी उठी और बाथ रूम गई. उसने मुझे जगाया और बोली- सुबह होने वाली है.
मैं बाथरूम गया और जाने के लिए तैयार हुआ तो शिवानी कहने लगी- अभी थोड़ी देर और रुको.

शिवानी मेरे नीचे लेट गई और मैंने अपना लंड एक बार फिर उस की चूत में डाल दिया. अब की बार हम धीरे धीरे चुदाई करते रहे और बातें भी करते रहे. मैंने शिवानी को बहुत चूमा चाटा. वह प्यार और सेक्स से सराबोर हो चुकी थी.
उसने कहा- राज क्या हम ऐसे ही हमेशा मिलते रह सकते हैं?
मैंने कहा- जब तुम चाहो.
वह बोली- अब आप मेरे घर ही आ जाना, पास में ही हमारी सोसाइटी है.
मैंने कहा- जब तुम कहोगी मैं आ जाऊंगा.

बड़े प्यार से करते हुए मैंने एक बार फिर उस की टांगों को अपने कंधे पर रखा और प्यार से चोदते हुए अपने वीर्य को उस की चूत में भर दिया.

सुबह के चार बजे थे, शिवानी ने मुझे दरवाजे तक छोड़ा, उससे चला नहीं जा रहा था, बहुत देर तक बाँहों में भर कर खड़ी रही.
इस तरह से मैंने एक दिन पहले तक अजनबी लड़की से रात भर चुदाई की.
अब मुझे जब भी शिवानी बुलाती है, मैं उसे चोद आता हूँ.
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