Friday, February 16, 2018

Published 4:25 AM by with 0 comment

भौजी से खेली चूत लंड की होली खेत में

दोस्तो, मेरा नाम अभिषेक यादव है और मैं गांव का रहने वाला हूँ. बी एस सी करने के लिए मैं गांव छोड़कर गाज़ीपुर शहर चला आया. मैं पढ़ाई की शैली और शरीर की बनावट, इन दोनों में निपुण हूँ. दोस्तों मैं पिछले 4-5 सालों से देसी चुदाई कहानी  की कहानियों को नियमित पढ़ता आ रहा हूँ. मेरा कभी झूठी कहानियाँ लिखने का मन करता मग़र अनुभव न होने के कारण लिख नहीं पाता था. ये मेरे पहले सेक्स की पहली कहानी है, जो कि बिल्कुल सच्ची है.

पिछले दिनों मैं होली की छुट्टी में गांव आया था. गांव की खुश्बू ही अलग होती है. मैं खुद गांव का देसी छोकरा हूँ, मेरी उम्र 20 साल है, कद लंबा है, गोरा रंग है, हष्ट-पुष्ट गठीला शरीर, मोटा और सुडौल आथ इंच का लम्बा लंड.. कभी अति उत्तेजना में मुठ भी मार लेता था. अक्सर गांव के लड़के शर्मीले टाइप के मजनूं होते हैं. मैं भी उनमें से एक था.

वैसे तो गांव की देसी लड़कियां मेकअप नहीं करतीं मगर कुदरत का करिश्मा होती हैं. साहब मैं गांव का सबसे शर्मीला लौंडा था. यूँ कहूँ तो मैंने आज तक किसी को हसरत भरी निगाहों से देखा ही नहीं था. मगर मुठ मारते वक्त गांव की सभी कुंवारी बालाओं व भौजाईयों की चूत मारता था. मजाल क्या थी साहब जो किसी भौजाई को टच कर सकूं लेकिन भौजाइयां होती ही ऐसी हैं, जिनके एक एक शब्दों से लंड खड़ा होकर, गोटियों से 135 डिग्री का कोण बना लेता था.

हाँ तो मुद्दे पे आते हैं, मैं गांव आया हुआ था, गांव के लोग अपने कामों में व्यस्त थे और मैं देसी चुदाई कहानी  की लेखिका सीमा सिंह की चूत पर अपना लंड हिला रहा था.

लगभग पहला भाग पढ़ने तक मैं दोबारा मुठ मार चुका था. जब कहानी खत्म हुई तो मैं गांव के बाहर घूमने निकल पड़ा. मेरा लंड चूहे की तरह सूज कर 4 इंच का हो गया था. कुछ देर टहलने के बाद मैं अपने खेत तक पहुँचा. पेशाब लगी थी, मगर हो नहीं रही थी… दो बार मुठ जो मार चुका था.



मैंने बड़ी देर तक पेशाब करने का असफल प्रयास किया. अब तक गोटियां शिथिल हो गई थीं. कुछ देर बाद मुझे चरचराहट की आवाज़ सुनाई दी, आगे बढ़ कर देखा तो कोई अपने ही गांव की औरत थी, जो फसल काट रही थी.

पीछे से उसकी गांड इतनी मोटी थी कि क्रिकेट के बल्ले का निचला सिरा भी डाल दें तो उसकी गांड जस की तस रहे.

मुठ मारने के बाद लोगों की वासना वैसे ही कम हो जाती है मगर मेरे भीतर की आग उस मोटी गांड को देखकर चार गुने उत्साह से धधक रही थी. मैं तुरन्त गेहूँ की फसल में छिप गया और झुरमुट से उसकी गांड उठा-उठाकर फसल की कटाई को देख रहा था. इधर डर भी लग रहा था कि कहीं कोई गांव का आदमी न आ जाए, वरना होली से पहले ही मेरी खून की होली कर देगा. उधर वो आईटम उसी भाव में मस्ती से गांड उठा उठा कर फसल की कटाई कर रही थी.

कुछ देर बाद वो कमसिन जवानी उठी और बगल के खेत में अपना पेटीकोट उठा कर मूतने लगी.

“अरे ई का? सुकुमारी भौजी..”

एकाएक मुँह से निकल पड़ा. असल में ये वही सुकुमारी भौजी हैं, जो पिछली 3-4 होली से मेरा पेंट खोल कर रंग डालतीं और गरियाती भी खूब थीं. इनका मरद दुबई में कमाता है. मैं खड़ा हुआ और अपने चारों तरफ देखा, कोई नहीं था, पशु-पक्षी यहां तक कि हवा भी नहीं चल रही थी सिवाय घड़ी की टिक टिक के कोई आवाज नहीं आ रही थी. इस वक्त घड़ी में एक बजने को था और पूरा एरिया सुनसान था. हो भी क्यों न खेत और गांव के बीच 3 किलोमीटर का फासला जो था.

सुकुमारी भौजी उठीं और अपने काम में फिर से लग गईं. इधर मेरा लंड बम्बू की तरह खड़ा होकर उनकी मोटी गांड को भेदने के लिए व्याकुल हो रहा था.

सुकुमारी भौजी की उम्र यही कोई 32-33 की होगी, रंग गेंहुआ, झुलझुला शरीर, चूचियों का उभार सामने की तरफ, चेहरे का नूर तमतमाया हुआ, मानो आज भी शहर की लौंडियों को मात दे देंगी. काले-रेशमी बाल, भौंहे धनुष की तरह, गांड के बारे में तो पहले ही बता चुका हूँ साहब, अब बस रह गई चूत.. वो अभी दिखी नहीं थी, तो देखिये आगे क्या क्या होता है.

इधर मैं अपने लंड को सहला सहला कर चरमोत्कर्ष की स्थिति में आते ही छोड़ देता, लंड की नसें फूल गई थीं. मेरी कामुक सिसकारियां निकल रही थीं मगर उस सुकुमारी भौजी की गांड अभी भी घुसक घुसक करके मुझे चैलेंज दे रही थी, मानो मैं कुछ कर नहीं सकता.

उधर सुकुमारी भौजी फसल काट रही थीं इधर मैं लंड हिलाते हुए समय काट रहा था. कुछ देर बाद मैं वासना से लिप्त मदान्ध की स्थिति में पहुँच गया और धीरे से उठकर, सहमे सहमे कदमों से उस ललचाती गांड की तरफ चल दिया. इस वक्त मुझे न घर वालों का डर, न गांव का डर.. अगर किसी चीज का असर था तो वो थी कामवासना.

ज्यों-ज्यों मैं धीरे धीरे भौजी के करीब आता, दिल की धड़कने त्यों-त्यों बढ़ने लगती थीं. आख़िरकार मैं सुकुमारी भौजी के पीछे तक पहुँच गया और धीरे से झुककर बड़े झटके के साथ उनकी दोनों चूचियों को दबोच लिया. मेरे द्वारा अचानक से हुए हमले से सुकुमारी भौजी सहम गईं और जोर से चीखने लगीं.

यहां तक कि उन्होंने अपने बखिया (फसल काटने वाले औज़ार) से प्रहार तक कर दिया मगर मैं सावधान था सो बाल-बाल बच गया.

मेरे द्वारा बलपूर्वक किये गए इस दुःसाहंस से सनी लियोन भी बुर देने से इन्कार कर दे, वो तो ठहरी गंवई सुकुमारी भौजी.

सुकुमारी भौजी ने मुझे धक्का दिया, मगर मुझे अहसास तक नहीं हुआ और मैं बेहिचक उनके दोनों संतरों को दबाने लगा. कभी हाथ से कभी पैर से तो कभी जोरदार गाली से सुकुमारी भौजी मुझ पर वार करतीं, तब तक मैंने अपना दूसरा हाथ उनकी बुर पे रख दिया और भौजी की बुर खुजाने लगा.

कुछ देर बाद चीखना चिल्लाना बन्द हुआ और उन्होंने अपने आपको खुला छोड़ दिया. इधर मैं अपने आवेश में आ चुका था, मैंने फटाक से सुकुमारी भौजी की चोली खोल कर उनके दोनों मम्मों को सहलाने लगा, कभी जीभ से चाटता तो कभी मुँह पिचका कर उन निप्पलों को चूस लेता था.

कुछ ही पलों में सुकुमारी भौजी के मम्मों से दूध बाहर निकल आया. कितना मीठा था वाह.. अनुपम..

इधर सुकुमारी भौजी सिसकारियां लेती हुई खुले खेत में पूरी तरह चूत खोल कर लेटी थीं और मैं उनके ऊपर चढ़ा था. सुकुमारी भौजी के 3 वर्ष के बेटे ने जितना दूध 3 महीनों में न पिया होगा उससे अधिक दूध मैंने कुछ ही देर में चूस लिया.

भौजी ऊपर से खुली हुई निढाल आँखें मींच रही थीं और मेरा दूसरा हाथ उनकी साड़ी के ऊपर से उनकी बुर को पनिया रहा था.

उधर मैं सुकुमारी भौजी की चूचियों को दबाते हुए उनकी साड़ी को धीरे-धीरे खींचने लगा, इधर सुकुमारी भौजी मेरे पैंट की चैन खोल कर मेरे 8 इंच के तने लंड को मेरे कसे हुए पेंट से निकालने लगीं.
“हाय राम इत्ता बड़ा..!” भौजी ने आश्चर्य से कहा.

इधर मैंने जल्दबाज़ी में सुकुमारी भौजी के सारे कपड़े निकाल दिए.
आह.. क्या चूत थी.. भौजी की चूत की पहली छटा से मन मुग्ध हो गया. चूत के चारों तरफ जंगल की भांति काली घास उनकी गोरी चूत की अनुपम छटा में चार चाँद लगा रही थी.

मैं आज तक मुठ मारते हुए लाखों पोर्न वीडियोज देख चुका था, मगर यह चूत उन वीडियोज में दिखाई गई चूतों से कहीं अलग थी. जिंदगी का पहला सेक्स वो भी ब्याही औरत से करने जा रहा था.

मैंने पूछ ही लिया- सुकुमारी भौजी पिछली बार कब चुदवाई थी आपने?
“तुम्हरे भैय्या जब दुबई से आए थे तब..”
मतलब 4 बारिश पहले के करीब; मैंने मन ही मन कैलकुलेशन किया और बहुत खुश हुआ क्योंकि अब मुझे कुंवारी जैसी चूत का मज़ा जो मिलने वाला था. मैंने झट से सुकुमारी भौजी को बाँहों में पकड़ा और उठा लिया.

उधर नीचे भौजी ने अपनी साड़ी चोली और मेरे कपड़े बिछाते हुये कहा- जल्दी से मेरी चूत को चोदो, वरना झड़ जाऊँगी.

मैं देसी चुदाई कहानी  का पक्का पाठक हूँ तो इसलिए में भली भांति जानता था कि एक बार झड़ने के बाद स्टेमिना बढ़ जाती है. मैंने तुरन्त सुकुमारी भौजी के मुँह तरफ अपना तना हुआ लंड किया और उनकी चूत पर अपना मुँह रखा.

गांव की औरतें मुँह में लंड नहीं लेती होंगी, ऐसा भ्रम मुझे पहले लगता था मगर ज्यों ही मैंने सुकुमारी भौजी की तरफ अपना 8 इंच का लंड किया, उन्होंने तुरन्त मेरा सुपारा समेत आधा लंड मुँह के भीतर ले लिया.

इधर मुझे चूत चाटने में बड़ी दिक्कत हो रही थी क्योंकि सुकुमारी भौजी की झांटें मेरे लंड की लम्बाई से थोड़ी ही छोटी होंगी. भौजी की झांटें बार-बार मेरे मुँह में आ जाती, फिर भी उनकी चूत की क्लिट को मेरी जीभ बहुत आसानी से रगड़ बना रही थी.

कुछ देर बाद मैं झड़ने वाला था, मैंने सुकुमारी भौजी के मुँह से अपना हथौड़ा निकालना चाहा मगर उनकी पकड़ के आगे विवश था. थोड़ी देर में मैंने अपना सारा वीर्य सुकुमारी भौजी के मुख में उड़ेल दिया और दूसरी ओर हो गया.

“बस राजा, इतना ही जोर था, बड़ी ताव से चूची धके झुलत रहला है..’ भौजी ने चूत में उंगली डालते हुए कहा.

सुकुमारी भौजी के ऐसे कर्णभेदी शब्दों ने मेरे लंड को खड़ा करने में पुरजोर समर्थन दिखाया और मैं उठ कर खड़ा हुआ. मैं हारे हुआ बाज़ीगर की तरह सुकुमारी भौजी पे टूट पड़ा. इस बार एक ओर मैं अपने लंड को भौजी के चूत पे रगड़ते हुए और दूसरी ओर उनके निप्पलों को दांतों से काटते हुए अपनी बहादुरी दिखाने का मौका ढूंढ रहा था. मैं आहिस्ता आहिस्ता लंड को चूत में डालने की कोशिश करने लगा मगर चूत की सख्ती ने मेरे किये कराए पर पानी फेर दिया. कुछ ही देर में दो-चार झटकों के बाद सुकुमारी भौजी के चूत के सारे दरवाजे मकड़ी के झाले की तरह हट गए.

इधर मेरे दोनों हाथ सुकुमारी भौजी की चूचियों पर, उधर सुकुमारी भौजी का एक हाथ उनकी चूत की रगड़ में और दूसरा हाथ मेरे बालों को खींचते हुए मचल रहे थे. मेरे लम्बे लम्बे झटकों से सुकुमारी भौजी का तन सिहर जाता. मेरा पूरा लंड सुकुमारी भौजी की चूत घोंट गई और दर्द ने सुकुमारी भौजी को रोने पे मजबूर कर दिया. उन सुनसान खेतों में सुकुमारी भौजी की आवाज़ बहुत कराह भरी लग रही थी.

मैंने अपने विजय रथ को यूँ ही कुछ देर तक जारी रखा. कुछ देर बाद मेरी रफ़्तार में कई गुना बढ़ोत्तरी होने लगी और सुकुमारी भौजी भी मेरा भरपूर सहयोग देने लगीं.
लगभग दस मिनट चलने के बाद मेरी बैटरी लो हो गई, उधर सुकुमारी भौजी भी हांफने लगी थीं. हम लोग अभी एक दूसरे से लिपटे हुए थे. कुछ ही पलों में दरिया बह गया.
“एक बेर आउर..” कहते हुए सुकुमारी भौजी ने मेरे होंठों को चूमने लगीं.

मैं हैरान था मगर ताज्जुब की बात ये है कि 4 साल की वासना आज इस सिवान में कैसे भड़क उठी? मरता क्या न करता? कई धक्के मारने के बाद मेरे लंड में चोटें आ गई थीं, मगर वासना अभी भी अतृप्त थी.
“अबकी बार भौजी आपकी गांड मारेंगे?”

सुकुमारी भौजी ने हामी भर दी. आखिर मेरी सफलता का मूल रहस्य इसी गांड से तो जुड़ा हुआ है. इस बार फिर पूर्व की भांति सुकुमारी भौजी ने मेरा लंड मुँह में लेते हुए, बाहर-भीतर की क्रियाशैली में मेरे मन को रिफ्रेश कर दिया. इस बार तिगुनी उत्तेजना के साथ सुकुमारी भौजी ने मेरे विश्वास को जगाया. भौजी की जो मोटी गांड जो कुछ देर पहले तक मुझे ललचाती थी, वही आज मेरे मोटे लंड का शिकार बनने जा रही है.

मैंने भी उस सुकुमारी भौजी की मोटी गांड के चैलेंज को हाथों हाथ लिया और इतनी जोरदार ठुकाई की कि सुकुमारी भौजी की बिलखने की आवाज़ आधे मील तक सुनी जा सकती थी. उनकी गांड बजाने के बाद मैं धीरे-धीरे सुकुमारी भौजी के बदन को शहद की तरह चाटते हुए अपनी जीत पर ख़ुशी मना रहा था. उधर सुकुमारी भौजी अपनी साड़ी के प्लीट्स बना रही थीं.

शाम होने वाली थी “अब दुबारा कल फिर केरू से अईओ..”
मैंने चुटकी ली- भौजी, झांटें तो साफ़ कर लो.. क्या भैया से कटवाने के बाद से जंगल खड़ा कर लिया?
सुकुमारी भौजी ने कराहते हुए कहा- इस चैत(होली के बाद का महीना) में तोसै (तुझसे) झांटें कटवाऊँगी.

इस तरह हम दोनों का मजा पूरा हुआ और घर को चल दिए.
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