Wednesday, February 14, 2018

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गांडू बेटे की सेक्सी माँ को चोदा-Sex With Mom

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दोस्तो, मेरा नाम ठाकुर चंद्रभान है और मैं भोपाल में रहता हूँ। आज मैं आपको अपनी एक एडल्ट स्टोरी सुनाता हूँ।

हुआ यूं कि जहां मैं रहता हूँ, वहाँ हमारी बगल वाला एक मकान खाली था। हमें भी था कि जल्दी से ये मकान किराए पे चढ़े ताकि कोई इसमें भी रहने आए और हमारा भी पड़ोस आबाद हो।
कुछ दिनों बाद वहाँ एक परिवार रहने आया। उस परिवार में चार लोग थे, एक साहब थे शौकत अली, उनकी बेगम, एक बेटा और एक बेटी।
जिस दिन उन्होंने अपना सामान रखा, उस मैं घर पर नहीं था, तो मुझे तो शाम को घर आने पर ही पता चला, अपनी बीवी से कि पड़ोस में नए किरायेदार आ गए हैं।
अगले दिन सुबह मुझे शौकत भाई मिले, घर के बाहर ही खड़े, तो मैंने औपचारिकता वश उनको अभिवादन किया और उनके बारे में पूछा। शौकत भाई दुबई की किसी कंपनी में काम करते थे और एक महीने की छुट्टी पर आए थे। जिस घर में पहले रहते थे, वो थोड़ा छोटा था तो वो यहाँ शिफ्ट हो गए।

हमारे बातें करते करते उनका बेटा तौफ़ीक और बेटी रज़िया भी बाहर ही आ गए और हमारे पास ही खड़े हो गए। बेटा होगा करीब 17-18 साल का, और बेटी 10-11 की होगी। मगर मैं जिस बात का इंतज़ार कर रहा था, शौकत मियां की बीवी नज़र नहीं आई।

चलो, कुछ दिन यूं ही बीते, शौकत मियां से तो कभी कभार बात हो जाती थी, मगर उनकी बीवी मुझे कभी नहीं दिखी। वैसे मेरी गैरहाज़िरी में वो 2-3 दफा हमारे घर भी आ चुकी थी, मगर मुझे उनके दर्शन नसीब नहीं हुये। बीवी ने इतना तो बता दिया था कि शौकत मियां की बीवी, सकीना बानो देखने में सुंदर है, बहुत गोरी है, और खूब भरी भरी है, अगाड़ा पिछाड़ा सब लाजवाब है।

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मेरे मन में और जलन हो गई कि इतनी सेक्सी औरत की तो लेकर मज़ा आ जाए।

मगर मेरी किस्मत देखिये, 3 महीने गुज़र गए उनको हमारे पड़ोस में रहते मगर मैं सकीना बानो के कभी दीदार ही नहीं कर पाया। हाँ… उनके बच्चे हमारे घर आते रहते थे, मेरी गुड़िया जो 2 साल की थी, उस से खेलने।

एक दिन मैं वैसे ही किसी और ही मूड में बैठा था कि तभी तौफ़ीक आ गया। मेरी बेटी गुड़िया मेरे पास थी, तो मेरे पास ही बैठ कर गुड़िया से खेलने लगा। खेलते खेलते अचानक मेरी नज़र तौफ़ीक की गांड पर पड़ी, अच्छी भरी हुई गोल गांड थी उसकी। हालांकि मैंने पहले कभी को समलैंगिक काम नहीं किया था, और ना ही मुझे शौक था, मगर उस दिन पता नहीं क्यों बार बार मेरा ध्यान उसकी गोल गांड पर ही जा रहा था।

मैं गांड मारता हूँ, और अपनी बीवी और जिन औरतों से मेरे संबंध रहे हैं, उनमें से जितनी ने मना नहीं किया, उन सब की मैंने गांड मारी है, और खूब जमके मारी है, मगर अभी तक किसी लौंडे की गांड नहीं मारी थी। मगर तौफ़ीक की गांड देख कर मेरा दिल कर रहा था कि इसे सहला कर देखूँ।

अभी मैं सोच ही रहा था कि अकस्मात मेरा हाथ अपने आप न जाने क्यों उसकी गांड पर चला गया और मैंने जैसे अंजाने में ही उसका चूतड़ पकड़ कर दबा दिया। मगर तौफ़ीक चौंका नहीं, हैरान नहीं हुआ, बल्कि मेरी तरफ देख कर बोला- क्या हुआ अंकल?
उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी जो मुझे एक तरह से एक आमंत्रण सा लगा।
मैंने कहा- कुछ नहीं देख रहा था, खा खा के बहुत पिछवाड़ा भारी किया है।
वो बोला- अब खाते पीते घर का हूँ।

मुझे उसकी बात बहुत अच्छी लगी, मैंने कहा- ज़्यादा मोटा मत कर लेना, वरना लोग गलत समझेंगे।
वो बोला- तो क्या हुआ जिसको जो समझना है, समझे, मुझे क्या!
मैंने कहा- अरे तेरे मोटापे की बात नहीं कर रहा मैं, इस मटकते पिछवाड़े की बात कर रहा हूँ मैं!
वो बोला- अंकल, इस पिछवाड़े की दुनिया दीवानी है।

मैं तो उसकी बात सुन कर अश्चार्यचकित रह गया, मैंने पूछा- तो किस किस ने तेरा पिछवाड़ा देखा है?
वो बोला- जिसने एक बाद देख लिया, फिर और कुछ नहीं देखा।
मुझे लगा, ये तो साला लौंडा लगता है, मैंने कहा- मुझे भी दिखाओ फिर, हम भी तो देखें ऐसा क्या खास है, तुम्हारे इस पिछवाड़े में!

मैंने तो मज़ाक में ही कहा था, मगर वो तो गंभीर हो गया, बोला- यहाँ कहाँ दिखाऊँ?
मैंने कहा- चल ऊपर चलते हैं।
मैं उठ कर ऊपर वाले चौबारे में चला गया तो वो मेरे पीछे पीछे ही आ गया। ऊपर जाकर मैं एक कुर्सी पर बैठ गया, वो मेरे सामने खड़ा था, मैंने कहा- चल अब दिखा!
वो बोला- पर आप किसी को कहना मत।

और उसने मेरे सामने अपनी लोअर और चड्डी दोनों नीचे को खिसका दी। करीब 5 इंच का गोरा लंड, जिसका टोपा बाहर निकला हुआ था ऊपर काफी सारी झांट, गोरी मोटी जांघें।
और जब वो घूमा तो पीछे दो खूबसूरत गोरे चूतड़।

मैंने आगे बढ़ कर उसका एक चूतड़ पकड़ कर दबाया, तो उसने हल्के ‘हाय’ कहा।
मैंने कहा- क्या हुआ?
वो बोला- आपने छूआ तो कुछ कुछ हुआ।
मैंने उसे आँख मार कर पूछा- क्या हुआ?
और मेरे आँख मारने पर जो उसने स्माइल दी, बहुत ही कटीली रंडी टाईप स्माइल थी, बोला- बस कुछ हुआ।

मैं उठ कर खड़ा हो गया और जा कर उसे पीछे से अपनी बाहों में भर लिया और जब मैंने अपना लंड उसकी गांड से लगाया तो वो तो साला मेरे कंधे पर सर रख दिया। अब उसके मम्में तो थे नहीं जो मैं दबाता, होंठ चूसने की भी मैं हिम्मत नहीं कर पाया, तो मैंने उसकी दोनों जांघों को अपने हाथों से रगड़ कर सहलाया, तो वो बोला- हाय अंकल, मार ही डालोगे क्या!
मैंने कहा- ये बता तू लौंडा है क्या?
वो बोला- हाँ, हूँ।

मैंने पूछा- ये नवाबों वाले शौक कहाँ से लग गए तुझे?
वो बोला- मेरे एक शकील चाचा हैं, 4 साल पहले उन्होंने मुझे इसका चस्का लगाया।
मैंने कहा- तो चार साल से गांड मरवा रहा है।
वो बोला- मरवा रहा नहीं, मरवा रही हूँ।
मैंने कहा- साली तो तो पक्की छिनाल है, रंडी साली।
तो तौफीक ने तो सिसकारियाँ भर ली- सी… हाय मेरे मालिक, ऐसे प्यारे प्यारे नामों से न पुकारो मुझे।
मैंने कहा- लंड चूसेगा मेरा?
वो बोला- बड़ी इनायत होगी आपकी, वैसे भी बहुत दिन हो गए, हैं, विटामिन की खुराक पिये!

मैंने एक मिनट नहीं लगाया और अपनी निकर और चड्डी दोनों नीचे खिसका दिये। मेरे निकर उतारते ही वो एकदम से नीचे बैठ गया, पहले उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर देखा, फिर उसकी चमड़ी पीछे हटा कर मेरी तरफ देखा और मेरी आँखों में देखते ही देखते वो मेरे लंड का टोपा अपने मुंह में ले गया।
पहली बार मेरा लंड कोई मर्द चूस रहा था, बेशक वो एक लौंडा था, पर था तो मर्द ही, न औरत न हिजड़ा।

और क्या चूसता था, पहले सिर्फ लंड के टोपे को ही उसने अपने मुंह में लेकर अंदर ही अंदर जीभ से चाटा, और ऐसे चाटा जैसे उसे कोई स्वाद आ रहा हो।
मैंने पूछा- मज़ा आया?
तो उसने बड़ी खुशी से अपना सर हिलाया। मैं फिर से कुर्सी पर बैठ गया और अब वो मेरे सामने नीचे फर्श पर बैठ गया और मेरी दोनों नंगी नंगी जांघों से अपने हाथों से सहलाने लगा।
मैंने उसे पूछा- क्यों बे रंडी, गांड मरवाएगा?
वो बोला- ज़रूर मेरे मालिक, पर पहले मैं इस खूबसूरत शै को चूस चूस कर अपने दिल के अरमान तो पूरे कर लूँ!
और वो मेरे खड़े लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा।

बेशक मेरी बीवी बहुत अच्छा लंड चूसती है, चूसती क्या है, खा जाने तक जाती है। और भी बहुत से औरतों से मैंने अपना लंड चुसवाया है, मगर लौंडे का लंड चूसने का तरीका और नज़ारा दोनों ही अलग होता है।
मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और उसकी चुसाई के मज़े लेने लगा, चूस चूस कर साले ने लंड पत्थर कर दिया। अब मुझे भी जोश चढ़ने लगा तो मैंने कहा- यार तेरी गांड मारनी है।
तो वो वहीं फर्श पर ही घोड़ी बन गया।

मैंने कहा- अरे नहीं ऐसे नहीं!
मैंने अलमारी से दो तीन पुरानी चादरें निकाली और नीचे बिछा दी और उस पर उसे उलटा करके लेटा दिया। मैंने अपनी निकर और चड्डी भी बिल्कुल उतार दी और उसकी कमर पर चढ़ कर बैठ गया। अपना ढेर सारा थूक मैंने उसकी गांड के छेद पर थूका और अपने लंड के टोपे पर भी लगाया। और फिर उसकी गांड पर अपना लौड़ा रख कर उस से पूछा- डालूँ क्या?
वो बोला- हाँ अंकल डाल दो।

मैंने हल्का सा ज़ोर लगाया तो मेरे लंड का टोपा तो उसकी गांड में आराम से घुस गया और उसको कोई तकलीफ भी नहीं हुई।
जब टोपा घुस गया तो मैंने थोड़ा और थूक और ज़ोर लगा लगा कर अपना आधे से ज़्यादा लंड उसी गांड में डाल दिया। मगर उस हरामजादे ने दर्द के मारे एक बार भी सी नहीं की बल्कि खुद अपनी गांड उठा उठा कर मुझे और लंड डालने को उकसा रहा था।

मैंने उसके बाद थूक लगाना बंद कर दिया, मैंने सोचा, बड़ा साला लौंडा बना फिरता है, इसे थोड़ा दर्द भी दिया जाए। मगर मेरी शुष्क चुदाई में भी वो मज़े ले रहा था। करते करते मैंने अपना सारा लंड उसकी गांद में उतार दिया। अभी तक जितनी औरतों की मैंने गांड मारी थी, सबमें करीब आधा लंड ही डालता था, क्योंकि उनको तकलीफ होती थी, और मैं बस उतना डाल कर ही चुदाई कर लेता था, मगर ये तो साला मज़े ले रहा था, तो मैं और डालता गया, और देखो, साला सारा लंड खा गया।
7 इंच का लंड और मेरी झांट उसकी गांड को लग रही थी। मुझे अपने लंड पे ऐसा महसूस हो रहा था, जैसे आगे उसकी गांड और टाइट हो गई हो, मगर अंदर से उसकी गांड पूरी गीली थी, बाहर छेद पर ही खुश्की थी, वहाँ मैं अपना थूक लगा कर चिकना कर लेता था।

मैंने उससे पूछा- तौफीक ये तो बता, तू लौंडा बना कैसे?
वो बोला- अंकल आपको अपने शकील चाचा के बारे में बताया, न, उनका लंड भी आपकी तरह मस्त है, कड़क एकदम। उन्होंने सबसे पहली बार एक रात मेरे को बहुत प्यार किया, मुझे खूब सारी चीज़ें ला कर दी, फिर मुझे कुछ पिलाया, उसके बाद मैं सो गया। सुबह उठा तो मेरे पीछे बहुत दर्द था। पास में शकील चाचा बिल्कुल नंगे पड़े थे। बेशक मैं तब छोटा था, मगर मैं समझ गया कि रात शकील चाचा ने मेरी इज्ज़त लूट ली। पहले तो मैं बहुत रोया, फिर सोचा मैं कोई लड़की हूँ, जो रो रहा हूँ। मगर उसके दो चार दिन बाद शकील चाचा ने मुझे पूरे होशो हवास में ज़बरदस्त चोदा। अपने लंड पर तेल लगा कर उन्होंने मेरी गांड मारी। उस मुझे दर्द तो कम हुआ, पर मज़ा आया। मैं सोचने लगा कि इसमें मुझे मज़ा क्यों आया। मगर शकील चाचा को तो जैसे घर में ही चुदाई के लिए रंडी मिल गई हो। वो हर दूसरे तीसरे दिन मेरी गांड मारते। फिर कभी दिन में कभी रात मे। करते करते 4 साल हो गए। मैंने कभी मर्द का लंड नहीं चूसा था, उन्होंने ही मुझे ये आदत डाली। पहले लंड चुसवाते, फिर गांड मारते, और उसके बाद अपना माल पीने को कहते।

मैंने पूछा- तो क्या तू मेरा माल भी पिएगा?
वो बोला- अब तो अच्छा लगने लगा है, माल न पीऊँ तो लगता है, कुछ आधा अधूरा सा रह गया।

मैंने कस कर उसकी गांड मारी और जब मैं झड़ने को हुआ, मैंने अपना लंड उसकी गांड से निकाल कर उसके ही मुंह में दे दिया, जिसे उसने बड़े प्यार से चूसा, और जब 2 मिनट की चुसाई के बाद मेरा गरम माल उसके मुंह में गिरा तो वो घूंट भर भर के पी गया। सारे का सारा माल पी गया और मेरे लंड को पकड़ कर खूब चाटा, आखरी बूंद तक वो चाट गया।
सच में बड़ा मज़ा आया, लौंडे की गांड मार कर।

उसके बाद मेरा तो थोड़े से दिनों बाद ही दिल करने लगा कि मैं उसकी गांड मारूँ। सच कहूँ तो कभी कभी तो अपनी पत्नी को भी मैं सेक्स के लिए मना कर देता, ये सोच कर के कल को लौंडे की गांड मारनी है, आज सेक्स की छुट्टी करो।
और वैसे भी मेरी बीवी मेरा माल नहीं पीती थी, अब तो साला मुंह में माल गिराने में जो स्वाद आता था, वो साला कोंडोम में या बीवी के पेट पर माल गिराने में कहाँ आता था।

फिर एक दिन तौफीक बोला- अंकल अगर आप मुझे इंग्लिश की ट्यूशन देने के बहाने मेरे घर आ जाया करो, तो हमारे मिलने का एक बढ़िया रास्ता खुल जाएगा।
मुझे क्या ऐतराज हो सकता था, मैंने हाँ कर दी।

उसके बाद मैं हर रोज़ तौफीक को इंग्लिश की ट्यूशन देने उसके घर जाने लगा, मगर फिर भी उसकी अम्मी के दीदार नहीं हुये। मैं अक्सर उसकी अम्मी के बारे में पूछता क्योंकि ट्यूशन के वक़्त चाय नाश्ता वही बना कर भेजती थी और बहुत लज़ीज़ नाश्ता होता था। मगर वो कभी मेरे सामने नहीं आई, हर वक़्त पर्दे में रहती थी। और यही बात मुझे उसकी तरफ खींचती थी, मुझे लगता था कि अगर मैंने तौफीक के अम्मी की शक्ल न देखी तो ना जाने क्या कयामत आ जाएगी।




मैं हर रोज़ तौफीक को इंग्लिश की ट्यूशन देने उसके घर जाने लगा, मगर फिर भी उसकी अम्मी के दीदार नहीं हुये। मैं अक्सर उसकी अम्मी के बारे में पूछता क्योंकि ट्यूशन के वक़्त चाय नाश्ता वही बना कर भेजती थी और बहुत लज़ीज़ नाश्ता होता था। मगर वो कभी मेरे सामने नहीं आई, हर वक़्त पर्दे में रहती थी। और यही बात मुझे उसकी तरफ खींचती थी, मुझे लगता था कि अगर मैंने तौफीक के अम्मी की शक्ल न देखी तो ना जाने क्या कयामत आ जाएगी।
तौफीक की ट्यूशन के दौरान मैं अक्सर उस से उसकी अम्मी के हुस्न के बारे में पूछता, वो भी बताता के उसकी अम्मी बहुत हसीन हैं।

एक दिन मैंने उससे कहा- तौफीक मुझे तेरी अम्मी देखनी है कि वो कितनी हसीन है।
वो बोला- अंकल अम्मी यूं किसी के भी सामने नहीं आती है, मगर मैं ऐसा इंतजाम कर सकता हूँ कि आप उनको देख सको।

एक दिन दोपहर को तौफीक का फोन आया और उसने मुझे अपने घर बुलाया। मैं उसके घर गया, उसका रूम भी ऊपर चौबारे में था। अब तौफीक तो मेरी बीवी, मेरी रखैल, या यूं कहो के मेरी रंडी ही बन गया था। जब भी हम मिलते थे, तो सबसे पहले वो मेरे होंठ चूमता था, पहले पहल मुझे कुछ दिक्कत हुई, एक दूसरे मर्द के होंठ चूमने में मगर अब तो आदत सी हो गई, थी और मैं भी बड़े आराम से उसकी होंठ, उसकी जीभ तक चूस जाता था। एक दो बार तो मैंने उसका लंड भी चूस लिया था। अब यार जब वो ताबड़तोड़ मेरा लंड चूस कर मेरा माल गिराने वाला होता था, तो मुझे भी जोश आ जाता था, तो मैंने भी उसका लंड चूस लिया। मुट्ठ तो उसकी बहुत बार मारी है, जब भी उसकी गांड मारता तो उसको और मज़ा देने के लिए अपने एक हाथ से उसका लंड पेल देता, उसका भी पानी निकल जाता और मेरा माल तो वो हमेशा पी ही जाता था।

खैर मुद्दे पे आते हैं, हम दोनों ऊपर खिड़की में जा कर खड़े हो गए और नीचे देखने लगे, तभी पीछे वाले रूम से एक भरपूर गोरी चिट्टी औरत निकल कर बाहर आई। खूबसूरत चेहरा, दूध जैसा गोरा रंग, गुलाबी होंठ, कजरारी आँखें, गुदाज़ जिस्म। मैं तो देख कर हैरान ही रह गया। इतना शानदार हुस्न मेरे पड़ोस में है और मैंने इतने दिनों से इसको आज तक नहीं देखा था।
वो नीचे कपड़े धो रही थी, और मैं उसको देख ऊपर उसके बेटे को रगड़ रहा था।

मैंने तौफीक से कहा- तौफीक, मुझे तेरी अम्मी को चोदना है, जैसे मर्ज़ी कर, इस औरत को अपनी जगह ला कर लेटा, वरना अपनी कुट्टी।
वो बोला- अरे अंकल क्या बात करते हो, अपनी कुट्टी नहीं हो सकती।
मैंने कहा- तो अपनी अम्मी को मना लेगा तू?
वो बोला- कोशिश करके देखूंगा, वैसे अम्मी अब्बा से अक्सर कहती है कि उनके बिना उनका दिल नहीं लगता।
मैंने कहा- दिल नहीं बच्चे, उसका भी चुदवाने को दिल करता है, तभी दिल नहीं लगता, बस मुझे नहीं पता, तू कैसे करेगा, तू जाने, अब तो मुझे हर हाल में तेरी अम्मी की चूत चाहिए, वरना अपने लिए भी कोई और अंकल ढूंढ ले।
वो बोला- अरे नहीं अंकल, आप यारी मत तोड़ो यार, मैं देखता हूँ, कुछ करता हूँ।

फिर कुछ दिन उसने पता नहीं अम्मी से क्या बात की कि एक ट्यूशन पढ़ाते वक़्त वो खुद हमें चाय नाश्ता देने आई। पहली बार वो मेरे सामने आ कर बैठी। कितना खूबसूरत चेहरा, जिसे कभी भी किसी भी मेक अप की ज़रूरत नहीं थी। बेहद गोरा रंग, हल्का गुलाबीपन गालों पे, मोती भरी बाहें, दो बहुत भी भरपूर मम्मे, मैंने देखा के अपने मम्मों संभालना उसको भी मुश्किल लग रहा था। मेरे पास वो सिर्फ 2 मिनट बैठी, कुछ रस्मी सी बातें करके उठ कर चली गई, जाती हुई की मैंने जो हथनी जैसी भारी भरकम गांड देखी, मैंने तो अपना लंड पकड़ कर सहलाने लगा।

“हाय तौफीक, तेरी अम्मी मादरचोद, कुछ कर साले, इसको नहीं चोदा, तो जिंदगी झंडवा हो जाएगी रे, कुछ कर मेरी जान, कुछ कर!”
तौफीक बोला- चिंता मत करो, कुछ न कुछ तो मैं आपको ज़रूर करके दूँगा, आपने मुझे इतना मज़ा दिया है, मेरा भी तो फर्ज़ बनता है कि मैं आपके लिए कुछ करूँ!

उसके बाद पता नहीं तौफीक अपनी अम्मी से क्या कहता रहा, मगर अब अक्सर से वो रोज़ ही हमारे लिए चाय नाश्ता लेकर खुद आती, और फिर धीरे धीरे मैंने भी अपनी बातों का जाल फैलाया, और उसके लिए कभी कुछ कभी कुछ गिफ्ट लाने शुरू किए। बातें बढ़ती बढ़ती दोस्ती में बदल गई।
अब मेरा तो मकसद एकदम साफ था, तो मैं तो बहुत तेज़ चल रहा था, एक दिन मैंने उनको अपने पसंद की एक साड़ी लाकर देने की बात कही, थोड़े से इंकार के बाद वो मान गई। मैंने थोड़ा बेशर्म हो कर पूछ लिया- अब जब साड़ी ही ला रहा हूँ, तो सर से पाँव तक सब कुछ ला देता हूँ।
वो मेरा मतलब समझ गई और हंस कर चली गई, मतलब उसको कोई ऐतराज नहीं था।

मैंने अगले दिन बाज़ार से एक बहुत अच्छी साड़ी खरीदी, और साथ में टेलर से उसका ब्लाउज़ भी सिलवा दिया, फिर दूसरी दुकान से जाकर उसके साइज़ के ब्रा और पेंटी भी खरीदे। जब सब कुछ तैयार हो गया, तो एक डिब्बे में पैक करवा कर उसके घर ले गया और अब मैं ऊपर नहीं बल्कि सीधा सकीना बनो के रूम में गया।
वो बेड पे बैठी टीवी देख रही थी, मुझे देख कर मुस्कुरा कर उठ खड़ी हुई, मैंने उन्हें अभिवादन करके उनको गिफ्ट दिया, जिसे उसने बड़ी खुशी से ले लिया।

उसके बाद मैंने तौफीक को ट्यूशन दी और अपने घर आ गया।

अगले दिन जब वो ट्यूशन के वक़्त चाय लेकर आई, मैंने उनसे पूछा- गिफ्ट पसंद आया आपको?
वो बोली- जी, बहुत हसीन है।
मैंने कहा- अजी हसीन तो आपके पहनने से हो गया। फिटिंग तो ठीक आई न?
वो बोली- जी बहुत अच्छे से!
मैंने पूछा- सभी कपड़ों की?

मेरा मतलब तो उसके ब्रा और पेंटी से था।
वो बोली- जी बिल्कुल, पर आपको इतनी जहमत करने की क्या ज़रूरत थी।
मैंने थोड़ा रोमांटिक होते हुये कहा- अजी इसमें जहमत कैसी, आपके लिए तो जान हाजिर है।

वो शर्मा कर हंस दी और बोली- आपकी पसंद की दाद देनी पड़ेगी और आपकी नज़रों की भी, हर चीज़ बिल्कुल जैसे मेरे लिए ही बनाई गई हो, इतनी फिट आई है।
मैंने कहा- हमें क्या पता, हमें तो पहन कर दिखाया नहीं आपने!
वो थोड़ी शरारत से बोली- वो भी दिखा देंगे।
मैंने कहा- तो अभी दिखा दीजिये!

वो उठ कर चली गई, तो तौफीक बोला- अम्मी कपड़े बदलते वक़्त बाथरूम की कुंडी नहीं लगाती है।
मेरे लिए तो ये सबसे बड़ी काम की बात थी, मैं भी उठ कर तभी नीचे चला गया, मगर मैं बाथरूम के अंदर नहीं गया। बाहर बेड पे साड़ी रखी थी, मतलब ब्रा पेंटी और ब्लाउज़ पेटीकोट वो ले गई थी।
थोड़ी ही देर में वो बाथरूम से बाहर निकली।

“अरे यार!” मेरा तो मुंह खुल का खुला रह गया। कमर पे बांधा गहरे हरे रंग का पेटीकोट, पेटीकोट के ऊपर गोरा मांसल पेट और बीच में गहरी नाभि। पेट के ऊपर दो खूब बड़े खरबूजे जैसे गोल मम्मे।
अब ब्लाउज़ का गला गहरा बनवाया था मैंने तो उसका काफी बड़ा क्लीवेज भी दिख रहा था। मुझे देख कर वो एकदम से चौंक गई और अपने दोनों हाथ जोड़ कर अपने सीने के आगे कर लिए और ड्रेसिंग टेबल के स्टूल पर बैठ गई।

मैंने कहा- बहुत हसीन, इतना हुस्न तो मैंने आज तक नहीं देखा।
वो शर्मा गई- आप यहाँ!
मैंने कहा- मैं तो जी एक इल्तजा लेकर आया था, आपके पास!
“कहिए” वो बोली।
मैंने कहा- अब क्या कहें, अब तो आप पहन चुकी!
“जी” वो चौंक कर बोली।

मैंने कहा- जी मैं तो ये कहने आया था कि अगर आपकी इजाज़त हो तो क्या मैं ये कपड़े आपको अपने हाथों से पहना सकता हूँ। क्योंकि अपनी सोच से मैं ये अंदाज़ा लगा चुका था, जिस औरत को आधे कपड़ों में मेरे सामने खड़े होने से गुरेज नहीं, वो और भी कुछ ज़रूर सोच रही होगी।
वो चुप रही तो मैंने कहा- क्या मैं आपके साड़ी बांध सकता हूँ?
वो बोली- आपको बांधनी आती है?
मैंने कहा- जी बहुत अच्छे से!
वो बोली तो कुछ नहीं पर उठ कर खड़ी हो गई।

मैंने झट से साड़ी उठाई और उसके पास गया, मैंने साड़ी खोल कर उसका एक कोना अपने हाथ में पकड़ा और उसके बिल्कुल सामने खड़े हो कर पूछा- इजाज़त है?
उसने हाँ में सर हिला दिया।
मैंने उसकी कमर पर साड़ी लगाई और बांधनी शुरू की मगर मेरा हाथ उसकी कमर पर लगते ही उसने अपनी आँखें बंद कर ली। मैंने उसके साथ कोई बदतमीजी नहीं की, बड़े अदब से मैंने उसकी साड़ी बांधी और जब बंध गई तो उसके सर पे आँचल देकर मैंने उसे आँखें खोलने को कहा।

उसने आँखें खोल कर सामने शीशे में देखा और देखती ही रह गई। वो शीशे में खुद को देख रही थी, मेरे लिए यही मौका था, आगे बढ़ कर अपनी हसरत पूरी करने का। मैंने हिम्मत की और उसको पीछे से अपनी आगोश में ले लिया।
वो चुप थी, मैं भी चुप था, मगर दोनों के दिल बहुत ज़ोर ज़ोर से धडक रहे थे। मैंने उसको अपनी आगोश में लेकर उसके दोनों नर्म मुलायम हाथ अपने हाथों में पकड़ लिए तो उसने भी अपनी उंगलियाँ मेरी उंगलियों में फंसा दी, ये सीधा इशारा था, हमारे मोहब्बत के कबूल होने का।

मैंने सबसे पहले उसके कान के पास एक हल्का सा चुंबन लिया- आई लव यू, सकीना!
मैंने उसके कान में कहा।

वो मुस्कुरा दी, तो मैंने उसका मुंह अपनी तरफ घुमाया, फिर माथे पर, आँखों पर गाल पर नाक पर और फिर उसके होंटों पर भी चूमा। वो बिल्कुल शांत थी। मुझे उसके होंटों से जैसे रस टपकता सा लगा।
मैंने उसका नीचे वाला होंठ ही अपने होंटों में ले लिया और खूब चूसा, उसकी गर्म सांस मेरी गाल पर टकरा रहे थे। मैंने अपना एक हाथ उसके हाथ से आज़ाद करवाया और उसके विशाल मम्में पर रखा।

कितना बड़ा मम्मा था, कोई और छोर ही नहीं मिल रहा था, मगर फिर भी कितना नर्म, मखमली मम्मा। मैंने एक एक करके उसके दोनों मम्में दबाये तो उसने भी मेरा ऊपर वाला होंठ अपने होंठों में पकड़ कर चूस लिया।
उसकी सांस और तेज़ हो गई थी।
मैंने उसे अपनी ओर घुमाया और कस उसको अपनी बाहों में जकड़ लिया, पति के प्यार की प्यासी सकीना ने भी मुझे अपनी मजबूत आगोश में ले लिया और खुद भी ऊपर को मुंह उठा कर मेरे होंठ चूस लिए।

मैंने भी ताबड़तोड़ उसके सारे चेहरे को चूम डाला, जहां भी चूमा वहीं पे एक लाल निशान पड़ जाता। उसके मोटे मोटे गाल अपने होंठों में लेकर चूस डाले, गोरे गाल सुर्ख हो गए। मैंने नीचे को देखा, ब्लाउज़ के बड़े से गले उसका बड़ा सारा क्लीवेज दिख रहा था।
मैंने उसकी गर्दन को चूमा और गर्दन को चूमता हुआ नीचे उसके मम्मों की तरफ बढ़ा और फिर उसके विशाल गोरे मम्मों को भी पहले चूमा फिर अपने होंटों में लेकर चूसा और उसके गुलाबी मम्मों पर भी लाल लाल निशान बनाने लगा।

मेरे सर को पकड़ कर सकीना ने अपने सीने से लगा लिया, मगर मैंने अपने होंठ उसके क्लीवेज पर रखे और अपनी जीभ निकाल कर उसके क्लीवेज के बीच घुमाते हुये चाटने लगा।
“आह, बस करो चंदर बाबू, मार डालोगे क्या!”
मैंने कहा- इतना पागल नहीं, जो इतनी हसीन औरत को मार दूँ, हाँ तुम्हारी ज़रूर मरूँगा, पर तुम्हें नहीं।
वो हंस पड़ी- तो देर किस बात की?
वो बोली।

मैं तो उसे खींच कर बेड पर ले गया और उसे बेड पे पटक दिया और एक एक करके उसके कपड़े उतारने लगा। पहले ब्लाउज़ के बटन खोले, ब्लाउज़ उतार दिया, फिर ब्रा उतारी, उसके बाद पेटीकोट का नाड़ा खोला और पेटीकोट और चड्डी दोनों उतार दिये, बिल्कुल नंगी कर दिया उसे और बेड के ऊपर खड़े हो कर, मैं अपने कपड़े उतारने लगा।

एक एक करके मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिये और बिल्कुल नंगा हो गया। वो भी मेरे 7 इंच के कड़क लंड को देख रही थी, और मैं उसकी भरपूर देह को जो काले रंग की चादर पर लेटी ऐसे लग रही थी, जैसे कोई दूध की नदी उफान पर बह रही हो। सर पाँव तक गोरी, हर अंग को जैसे गुलाब से रंगा हो।
बिल्कुल साफ शेव की हुई चूत, बगलों में पूरी सफाई, खुद को बहुत सजा संवार कर रखा हुआ था।

मैंने उसके खूबसूरत जिस्म को देख कर कहा- सच में सकीना, तुमसे सुंदर औरत मैंने आज तक नहीं देखी, जितनी तुम खूबसूरत हो उतना ही तुम अपनी सफाई का भी ख्याल रखती हो।
वो बोली- मेरे शौहर को मेरे जिस्म पर एक फालतू बाल पसंद नहीं, इसी लिए मैं हमेशा खुद को एकदम साफ करके रखती हूँ।
“और मुझे भी यही चीज़ पसंद है!” कह कर मैं उसके ऊपर लेट गया, मेरा लंड उसकी नाभि से लगा हुआ था, दिल तो कर रहा था कि उसकी नाभि में ही अपना लंड घुसा दूँ।

उसने अपनी टाँगें खोली और मैंने अपनी कमर उसकी जांघों के बीच में सेट की, अब मेरे लंड का टोपा उसकी चूत के ऊपर टिका था। मैंने अपने लंड के टोपे से ही उसकी चूत का दाना मसला। अब लंड से चूत मसली तो उसको भी मस्ती चढ़ी, उसने मेरा चेहरा अपने हाथों में पकड़ा और बोली- अब और न तरसाओ, बस आ जाओ।
मतलब वो मेरा लंड अपनी चूत में चाहती थी।

मैंने कहा- पहले थोड़ा और तो चूस लूँ तुम्हें, यहाँ वहाँ बहुत कुछ है, जहां तुम्हारे बदन से रस टपक रहा है, वो तो पी लूँ!
वो बोली- अभी और बहुत से मौके मिलेंगे, जितना चाहे रस पी लेना, पर अभी मेरी आपसे गुजारिश है कि पहले आ जाएँ।

मैं थोड़ा सा ऊपर को उठा तो उसने खुद अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर अपनी चूत पर रख लिया। गीली गुलाबी चूत में बड़े आराम से मेरा लंड घुस गया। जैसे किसी ने नर्म मखमल से मेरे लंड को लपेट दिया हो।
मैंने धीरे धीरे से उसके मम्में दबाते हुये उसके होंठ चूसते हुये उसकी चुदाई शुरू की। थोड़ी देर बाद उसने अपने दोनों हाथों में अपने पाँव के अंगूठे पकड़ लिए और अपनी टाँगें पूरी तरह से खोल दी और बोली- अब आराम का वक्त गया चंद्र बाबू, गाड़ी की रफ़्तार बढ़ो, पेलो, जितनी तेज़ पेल सकते हो।

मैंने भी अपनी रफ्तार तेज़ कर दी। घपाघप जब लंड पेला तो उसकी चूत तो पानी के फव्वारे छोड़े, और साथ में वो भी सिसकारियाँ आहें भरने लगी, और वो भी आराम से नहीं पूरी आवाज़ में!
जैसे सारे मोहल्ले को सुनाना चाहती हो, बताना चाहती हो कि देखो लोगो… मैं चुद रही हूँ।
खूब शोर मचाया उसने ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… हाय…’ के अलावा ‘हाय मर गई, हाये अल्लाह, बचा लो, हाय मैं मर गई!’ तो बहुत बार बोली।
खूब तड़पी, खूब उछली, मगर उसने अपने हाथों से अपने पाँव के अंगूठे नहीं छोड़े। पूरी खुली चूत होने से लंड भी ताबड़तोड़ अंदर बाहर आ जा रहा था। कितनी देर मैंने उसे सीधे लेटा कर चोदा। फिर उसे घोड़ी बनाया, फिर ज़बरदस्त चोदा, तीन चार बार आसन बदल बदल कर मैंने उसे चोदा।

बहुत ही गर्म औरत थी, वो 20 मिनट की चुदाई में वो शायद 7 या 8 बार झड़ी। उसको ज़ोर से चोदने में मेरे पसीने निकल गए।
इतने में तौफीक अंदर आया, मगर जब उसने देखा कि मैंने उसकी अम्मी को घोड़ी बना रखा है तो वो मुस्कुरा कर वापिस चला गया।

फिर मेरी मेहनत रंग लाई और मैंने भी अपने वीर्य की धारें मार मार कर उसकी चूत को भर दिया। बहुत खुश हुई वो मेरा माल गिरने पर!
माल के गिरते ही मैं भी गिर गया। कितनी देर सांस में सांस न मिली।

जब कुछ संभला तो वो मेरे लिए पिस्ता बादाम वाला गर्म दूध बना कर लाई, मुझे देकर बोली- लो पियो इसे, और थोड़ी और ताकत बढ़ाओ।
मैंने कहा- क्यों इतना कम था क्या?
वो बोली- नहीं बहुत है, मगर जैसे यह एक राउंड था, मुझे तो ऐसे बहुत से राउंड चाहियें।
मैंने कहा- चिंता मत करो, जानेमन, सारी रात इसी तरह पेल सकता हूँ मैं।
वो बोली- तो ठीक है, अब हम फिर किसी रात को ही मिलेंगे, और उस दिन मैं अपनी सुहागरात तुम्हारे साथ मनाऊँगी।
मैं भी खुश हो गया।

उसके बाद मैं वापिस अपने घर आ गया क्योंकि ट्यूशन का टाइम खत्म हो चुका था।

आज 2 महीने हो गए, अब तो बीवी भी बोलने लगी है कि मैं उसकी तरफ ध्यान नहीं देता, मगर क्या करूँ, अब तो जब ट्यूशन पढ़ाने जाता हूँ, कभी माँ खींच लेती है, कभी बेटा। उन दोनों की भरपूर चुदाई करने के बाद, अब बीवी के लिए प्यार बचता ही कहाँ है।
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