Sunday, February 25, 2018

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आपा यानि बहन के साथ सुहागरात

आपा यानि बहन के साथ सुहागरात

(Aapa yani Behan Ke Sath Suhagrat)

यह मेरी दूसरी सेक्स कहानी है मेरी और मेरी चचेरी बहन की… जिसका बदला हुआ नाम रज़िया है!
उसके बारे में बता दूं कि वो रँग में तो थोड़ी साँवली है मगर उसका हुस्न ऐसा कि कोई भी उसे देखे तो उसका पानी पानी हो जाए!
उसकी उम्र 28 साल है, उसकी अभी शादी नहीं हुई है, उसका फ़िगर 34-30-36 का है, उसका फिगर मुझे सही से इसलिए पता है क्योंकि मेरी जनरल स्टोर की शॉप है और मेरी चचेरी बहन रज़िया मेरे से ही ब्रा और पैन्टी ले जाती है और वो ज्यादातर नेट वाली ही ब्रा पैन्टी पसंद करती है. माह में 2 बार वो ब्रा पैन्टी खरीदती है. पता नहीं उसे इन सबका कितना शौक है!

खैर अब मैं कहानी पर आता हू!

वो ज्यादातर सलवार सूट ऐसा पहनती है जिसमें उसके हर अंग का उभार साफ साफ दिखाई दें! देखने में मेरी बहन किसी रंडी से कम नहीं लगती है. बड़े गले का सूट पहनती है वो जिससे उसके मम्मे बाहर निकलने के लिए बेताब रहते हैं! मेरा तो दिल करता है बस अभी पकड़ के चूस जाऊँ!

मैं उसके घर जाता रहता हूँ जिस कारण मुझे उसके हुस्न के दीदार होते रहते हैं. मैं अपनी चचेरी बहन की चुदाई करना चाहता रहा था मगर कभी मौका नहीं मिला. और काफी दिन हो गए थे चाची की चूत मारे हुए भी तो कब तक मुट्ठी मार के काम चलाता यार!
वो मेरी बहन थी इसलिए ये काम थोड़ा मुश्किल था!


लेकिन अगर शिद्दत से चाहो तो हर काम आसान हो जाता है. मैं जब भी उसके घर जाता और मेरी चचेरी बहन रज़िया मेरे सामने झुक कर झाड़ू लगाती हुई मिल जाती तो मुझे तो जन्नत के दीदार हो जाते. उसके 34 साइज़ के दूध देख कर मेरा तो लंड खड़ा हो जाता और फिर घर आ कर मैं उसके नाम की मुट्ठी मारता!
ऐसा बहुत दिन तक चलता रहा, अब मैं और बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था.

मैंने एक आइडिया सोचा कि कैसे रज़िया कि जवानी का रस पिया जाए! वैसे भी उसका निकाह तय हो चुका था और दो महीने बाद उसका निकाह था. और मैं उसकी शादी से पहले ही उसके साथ सुहागरात मनाना चाहता था… एक रात के लिए उसका पतिदेव बन जाना चाहता था.

एक दिन सुबह मैं उसके घर गया तो वो मुझसे बोली- आलम, आज मैं शॉप पर शॉपिंग करने आऊँगी, कुछ सामान लेना है!
उसकी मॉम बोली- तो उसमें क्या… ले आना, वैसे भी तो लाती रहती हो!
मैंने कहाँ- हाँ हाँ आंटी, अपनी ही शॉप है, उसमें क्या कहना!

मैंने रज़िया से कहा- दोपहर के बाद आना, ठीक रहेगा!
उसने कहा- ठीक छोटे भाई!
मैंने स्माइल दी और मैं अपनी शॉप पर आकर सोचने लगा कि कैसे रज़िया को पटाया जाए! मुझे जल्दी करना होगा वर्ना उसकी शादी हो जाएगी और मेरी हसरत अधूरी रह जाएगी.

फिर दोपहर का टाईम हो गया और मैं खाना खाने घर चला गया और शॉप नौकर के सहारे छोड़ दी. फिर खाना खा कर शॉप पे आकर रज़िया के बारे में सोचने लगा और नौकर को खाना खाने भेज दिया.
और तभी मन में एक विचार आया, मैं उठा और उठ कर जो नेट वाली ब्रा का न्यू सामान आया था, चेक करने लगा, उसमें बहुत अच्छी अच्छी टाइप की नेट वाली ब्रा थी! मैंने कुछ ब्रा के डिब्बे 32 साइज़ के लिए और कुछ 34 साइज़ के लिए फिर दोनों के साइज़ वाले लेबल आपस में बदल दिये!
और बैठ कर रज़िया आपा का इन्तजार करने लगा.

अचानक से रज़िया आपा आ गयीं.
मैंने कहा- बहुत देर बाद आई हो?
उसने कहा- काम था!
मैंने कहा- अच्छा!

फिर वो बोली- थोड़ा सामान दे दो!
मैंने कहा- बताओ?
उन्होंने एक रेड कलर की लिपस्टिक, क्रीम, पाउडर वगैरा लिया, मेरे मन में आया कि लगता है प्लान फेल हो गया, वो ब्रा और पैन्टी नहीं ले जाएँगी!
इतना सोच रहा था कि रज़िया आपा बोली- जोड़ दो, टोटल कितने पैसे हुए हैं?
यह सुन कर तो मैं अन्दर ही अन्दर उदास सा हो गया. मैंने टोटल किया तो 165 रुपये बने तो उन्होंने मुझे 500 का नोट मुझे दिया.

मैं बोला- आज तो बड़े सस्ते में काम हो गया, आपका इतने दिन बाद आई हो आपी, फिर भी?
तो वो बोली- अच्छा ब्रा और पैन्टी में कुछ न्यू आया है क्या?
मैंने कहा- हाँ, बहुत अच्छी अच्छी तरह की आई हुई हैं!
वो बोली- तो दिखा दो!

मैं तो इसी इन्तजार में ही था… ‘पूरा प्लान बना के रखा है मेरी जान!’ मैं मन में सोचने लगा!
वो बोली- क्या सोच रहे हो?
मैंने कहा- कुछ भी नहीं आपा!

फ़िर मैं वही डिब्बे ब्रा के उठा लाया जो थे तो 32 साइज़ के लेकिन उन पर लेबल 34 साइज़ का लगा था!
मैं बोला- अप्पी 34 लगती है ना?
वो बोली- इतनी जल्दी भूल जाओगे तो कैसे काम चलेगा?
मैं मुस्कुरा दिया!

और वो डिब्बे उसके सामने रख दिए, वो उसमें से पसंद करने लगी.
उसने एक पिंक और एक रेड कलर की ब्रा निकाली और मुझसे बोली- इसी कलर की पैन्टी भी निकाल दो.
मैंने नेट वाली मिलती जुलती पैन्टी मिला के दे दी और फिर उसके रूपय भी ले लिए और वो फिर घर चली गयी!

मैं फिर अपने काम में व्यस्त हो गया और आहिस्ता आहिस्ता शाम हो गयी और मैं रज़िया के बारे में ही सोचता रहा!
और सुबह उठ कर उसके घर गया. मुझे यक़ीन था कि रज़िया अप्पी मुझसे ब्रा के बारे में जरूर कुछ बोलेंगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ, शायद मॉम की वजह से उसने कुछ नहीं कहा!
फिर मैं घर आया और तैयार होकर शॉप के लिए निकल गया!

शॉप पे जाके बैठा ही था कि मेरा मोबाइल फोन बजा, मैंने निकाल कर देखा तो रज़िया अप्पी का फोन था! उनका नंबर देखते ही मेरे मुखड़े पर मुस्कान आ गयी!
मैंने फोन रिसीव किया और बोला- क्या हुआ अप्पी, कैसे याद किया?
वो बोली- ये ब्रा तुमने कितने नंबर की दी थी मुझे?
मैं बोला- देखो उस पे साइज़ लिखा होगा!

उसने ब्रा शायद हाथ में ही ले रखी थी, वो बोली- लिखा तो 34 ही है! लेकिन ये मेरे नहीं आ रही है बहुत टाइट हो रही है इसका हुक भी नहीं लग रहा है!
मैंने कहा- फोन कट करो, जहाँ से माल आता है, मैं वहाँ पता करके अभी कॉल करता हूं तुम्हें… ठीक?
वो बोली- ओके!

मैंने फोन कट किया और मेरे मन में लड्डू फूटने लगे थे और अप्पी के बारे में सोच कर ही मेरा लंड खड़ा हो गया! मैंने लंड हाथ में पकड़ा और सहलाते हुए कहा- रुक जा बेटा, थोड़ा सबर तो कर, रज़िया तेरी ही है!
फिर कुछ देर बाद अप्पी को फोन करके बताया कि उन्होंने बोला है कि सही से चेक करो, थोड़ा आगे पीछे करके पहनो, सबका साइज़ सही है, जब 34″ लिखा है तो 34 ही है!
मुझे तो पता ही था कि साइज़ तो पर्फेक्ट है, ये तो मेरा किया कराया है!
तो अप्पी बोली- बहुत ट्राई किया, नहीं आ रही है सही मॉम भी घर पे नहीं है जो उनकी हेल्प ले लूँ!
मैंने कहा- मॉम कहाँ गयीं?
तो अप्पी बोली- नानी के घर!

इतना सुन कर तो मुझे बिलकुल कंट्रोल नहीं हो रहा था, दिल कर रहा था अभी घर जाकर उसे चोद दूँ जाकर!
मैंने कहा- ओके, मैं शाम को आकर देख लूंगा कि क्या कमी है!
रजिया बोली- हाँ, तुम्ही देखना आकर… पता नही कहाँ से बेकार का माल ले आए? कलर और डिजाइन इतनी अच्छी और साइज़ पता नहीं कैसा!
मैं हंस कर फोन पर ही बोला- लगता है एक रात में ही तुम मोटी हो गयी हो!
उसने ‘पागल’ कह कर फोन कट कर दिया!

अब मेरा शॉप पे बिल्कुल भी मन नहीं लग रहा था, बस मैं इस इन्तजार में था कि जल्दी से रात हो और मेरी अधूरी वासना को पूरा करने का मौका मिले!
फिर शाम हुई, आज मैंने टाईम से पहले ही शॉप क्लोज कर दी और घर की तरफ निकल पड़ा. दिल में बस एक तमन्ना थी ‘रज़िया अप्पी!’

मैं घर आकर फ्रेश हुआ और खाना खा कर मॉम को बोला- मैं फ्रेंड के घर जा रहा हूँ, पार्टी है, थोड़ा लेट आऊंगा!
क्यूंकि रज़िया अप्पी आर्मी में थे तो वो बाहर ही रहते थे और उसकी छोटी बहन मॉम के साथ नानी के घर गयी थी! तो मुझे पूरा चांस था कि आज तो रज़िया के साथ सुहागरात मनेगी जरूर!

मैंने अप्पी के दरवाजे पर जाकर बेल बजाई तो आवाज आई- कौन?
मैंने कहा- आलम!
वो बोली- आती हूं!

उसने आकर दरवाज़ा खोला, वो रेड कलर का टाइट सूट पहने थी, देख कर मेरे मुँह में पानी आ गया और मैं अंदर आ गया.
मैं बोला- हाँ तो बताओ आपी, तुम्हारी क्या प्रॉब्लम है?
वो बोली- हाँ रुको, लाती हूँ!
रजिया ने अंदर से दोनों ब्रा के डिब्बे लाकर मेरे हाथ में दे दिए.
मैंने खोलकर देखा तो बोला- देखो लिखा तो 34″ ही है, लो सही से चेक करो जाकर!
वो बोली- कर चुकी हूँ! नहीं आ रही है.
मैंने कहा- करो तो?
वो बोली- ओके लाओ… क्या तुम्हारे सामने ही चेक करूँ!

मैंने दोनों ब्रा उसे दे दी उसे और वो अन्दर रूम में लेकर चली गई और कुछ देर बाद बाहर आई मैंने गौर से देखा तो शर्ट से उसके बूब्स साफ दिख रहे थे. यह नज़ारा देख कर तो मेरे अंदर करंट दौड़ गया!
शायद जल्दी में वो अपनी ब्रा पहनना भूल गयी थी!

बाहर आते ही मेरे हाथ में ब्रा फेंक दी और बोली- लो चेक कर ली, नहीं आई!
मैंने कहा- रेड वाली ट्राई करो, शायद इसी का नंबर चेंज हो!

वो अंदर गयी और अंदर से ही उसने आवाज़ लगायी- देखो आके… तुम मानते भी नहीं हो!
मैं जैसे ही रूम में दाखिल हुआ, मेरी तो जान ही निकल गयी, अप्पी नीचे तो सलवार पहने थी लेकिन ऊपर ब्रा पहनने की कोशिश कर रही थी आगे से boobs पूरे छुपे थे लेकिन पीछे अपने हाथों से हुक लगाने की कोशिश कर रही थीं! लेकिन हुक लगता भी कैसे बूब्स 34 इंच के और ब्रा 32 इंच की… ब्रा उन बूब्स पर कैसे फिट आती!

मैंने उसकी पीठ के करीब आकर कहा- थोड़ा और खींचो, लग जाएगा हुक इतना सुनते ही अप्पी बोली बोल रहे हो, ख़ुद ना हेल्प कर दो!
इतना सुनना ही था कि मुझे तो जैसे आमंत्रण मिल गया हो, मैं तो इस पल का वर्षों से इन्तजार कर रहा था! वो कहते हैं ना ‘जिसे शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है.’

मैंने अपने हाथ में दोनों ब्रा के हुक लिए और थोड़ा ज़ोर लगाया मगर हुक नहीं लग पाया लेकिन मेरे हाथों के स्पर्श से अप्पी थोड़ा बहकने लगीं!
मेरा हाथ हुक खींचने के कारण मेरी उंगलियाँ उनकी नंगी पीठ में चुभ रहीं थीं!
वो बोली- बस देख लिया कितनी छोटी ब्रा दे दी!
बोली- इतनी अच्छी डिज़ाइन है, मुझे पसंद भी बहुत आई लेकिन पता नहीं कैसा साइज़ है!
मैंने कहा- आ जाएगी ब्रा लेकिन तुम कुछ कहना ना!
बोली- कैसे? लगाओ हुक, हम भी तो देखें!

इतना सुना ही था, मैंने एक हाथ में मेरे ब्रा का हुक था और दूसरा हाथ मेरा अप्पी के बूब्स पे पहुंच गया और बूब्स ज़ोर से दबा दिए मैंने!
वो बोली- क्या भाई, ये क्या कर रहे हो?
मैंने कहा- अपने ग्राहक की प्रॉब्लम सॉल्व!
मैंने पूरी तरह से उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया.

पहले तो अप्पी बोली- छोड़ो मुझे, कोई आ जाएगा, और मैं तुम्हारी बहन हूँ.
मैंने कहा- हाँ… लेकिन आज तुम मेरी वाइफ बनोगी!

थोड़ी देर तो उसने मेरा विरोध किया लेकिन वो भी शायद बहुत प्यासी थी, 28 की उम्र तक उसे लंड का स्वाद चखने को नहीं मिला! अब वो गरम हो गयी और उसने सारे शरीर का भार मेरे शरीर पर छोड़ दिया! मैंने ब्रा छोड़ दी और अब मेरे दोनों हाथ उसके बूब्स को मसल रहे थे और ब्रा सरक कर नीचे गिर गई.
अब मेरा लंड पूरी तरह से टाइट हो चुका था जो सलवार के ऊपर से ही अप्पी की गांड में घुसना चाह रहा था. मेरा एक हाथ अप्पी की सलवार का नाड़ा खोलने की योजना बना रहा था!

मैंने झट से उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया जिससे उसकी सलवार सरक कर नीचे गिर गई, अब वो सिर्फ पैन्टी में थी, मैंने रज़िया अप्पी को अपनी तरफ मुखड़ा करके घुमा लिया और अपना हाथ पैन्टी में डालना चाहा तो अप्पी के हाथ ने मेरा हाथ पकड़ कर रोक लिया. मैंने अपने होंठ अप्पी के होंठों से मिला दिए और उनका रस पीने लगा जिस से उसके हाथ की पकड़ ढीली होने लगी और वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी!

मेरा हाथ तुरंत मेरी बहन की पैन्टी में प्रवेश कर गया, वहां तो पहले से ही सैलाब आया था, उसकी चूत पूरी तरह से भीग चुकी थी और अब तो बस वो चुदने को बिल्कुल तैयार थी! मैंने जैसे ही चूत पे हाथ रखा… क्या बताऊँ यारो, वो फूली हुई गुजिया जैसी चूत थी जिसे मैंने कस कर रगड़ा.
अब उसकी आवाज़ बदल चुकी थी और उउई उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह उउई जैसी आवाज़ निकलने लगी थी!

अब मैं सुहागरात मनाने के लिए बिल्कुल तैयार था, मैं उसे उठा कर उसकी मॉम के बेड पे ले गया जहां वर्षों पहले उसकी माँ ने सुहागरात मनाई होगी!
मैंने उसे बेड पर फेंका. वो बोली- प्यार से भाई!
मैं पूरा कट्टर मर्द की तरह उस पर टूट पड़ा और उसकी पैन्टी को फाड़ के फेंक दिया.
अप्पी बोली- मेरी न्यू वाली पैन्टी तुमने फाड़ दी!
मैंने कहा- जानेमन आज से तू मेरी वाइफ है, मैं तुझे अच्छी अच्छी पैन्टी ला के दूँगा, अपनी तो शॉप ही है!

फ़िर मैं अपनी बहन की चूत को चाटने लगा जिसमें से अमृत बह रहा था, मैं उस अमृत को पीए जा रहा था! फिर मैंने अप्पी को अपनी तरफ खींचा और उसके मुंह में अपना लंड देकर उसे बोला- चूस मेरी रंडी… बहुत दिन तड़पया तुमने!
और मेरा 7 इंच का मोटा लंड वो मुँह में ‘ऊउन हूंन…’ करके चूसे जा रही थी और मैं उसके बूब्स से खेल रहा था.

फिर मैंने उसे लिटाया और उसकी चूत पर लंड का टोपा रखा और जोर लगाया, वो पूरी तरह से कुँवारी थी तो उसे थोड़ा दर्द हुआ.
वो बोली- बेबी आराम से… आज रात मैं तुम्हारी ही हूँ!

मैंने ज़ोर का धक्का मारा और आधा लंड अंदर हो गया, अप्पी की तो चीख ही निकल गयी! फिर मैं धीरे धीरे अंदर बाहर करता रहा. जब उसकी चूत खुलने लगी तो मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा और अप्पी का भी अब दर्द जा चुका था और उसे भी मज़ा आने लगा था!
अब वो मुझे सइयां कह कर बुला रही थी- चोदो मेरे सइयां… आज शादी से पहले मेरी सुहागरात है!
और कुछ देर चोदने के बाद वो झड़ गयी और मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने अपना पूरा वीर्य अपनी बहन की चूत में ही छोड़ दिया!

मैं उसी के पास लेटा रहा. और कुछ देर बाद टाईम देखा तो 1 बज चुका था! मैं उठा और अपने कपड़े पहनने के बाद अप्पी से बोला- कैसी रही तुम्हारी सुहागरात की ट्रेनिंग?
बोली- ट्रेनिंग नहीं, रियल सुहागरात थी!
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