Wednesday, February 14, 2018

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सेक्सी माया की अन्तर्वासना-1-Antarvasna

antarvasna
आआह्ह्ह.. आआह्ह्ह.. चिल्लाते हुए माया अपनी गांड उछाल रही थी. आज माया का जोश सातवें आसमान पे था और अंकित भी उसे चोदने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता था. वो बस अपनी बीवी को रगड़ कर चोदना चाहता था.

अंकित और माया की शादी को लगभग दस साल हो गए थे. वैसे तो उनकी सेक्स लाइफ शुरू से ही अच्छी थी, लेकिन पिछले 4-5 सालों में माया की वासना बढ़ने लगी थी. अंकित को भी इससे कोई शिकायत नहीं थी. माया को चोदते हुए अंकित की नज़र माया के चूचों पे पड़ी. माया के 36C के भारी भारी मम्मे अंकित के हर धक्के से ताल से ताल मिला रहे थे. पकी हुई 35 साल की उम्र में भी माया ने खुद को फिट कर रखा था. उसका 36-28-34 का फिगर किसी को भी पागल करने के लिए काफी था.

बेड के कोने पे लेटी माया ने अपनी टांगें अंकित की कमर में डाल रखी थीं. अंकित बेड के नीचे खड़ा हुआ माया की चुत में अपना लंड अन्दर बाहर.. अन्दर बाहर कर रहा था. अंकित जानता था कि माया किसी भी पल झड़ सकती है और अंकित भी झड़ने ही वाला था. अंकित ने झुक कर माया का एक निप्पल मुँह में ले लिया और दूसरे को मरोड़ने लगा. अंकित के झुकने से उसके लंड के ऊपर का हिस्सा माया की चूत के दाने को रगड़ने लगा.

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अपने दाने और मम्मे पर हुए इस हमले से माया पिघलने लगी- आआह्ह्हह आआआअह्ह्ह. और जोर से अंकित.. जोर से चोदो.. चूस लो मेरे मम्मों को.. आह.. और जोर से डालो.. आआह्ह्ह.. उह्ह्ह्ह…
इसी वक्त अपनी कमर उठाते हुए माया झड़ने लगी. अंकित भी माया की चुत की गर्मी सहन नहीं कर पाया और माया की चुत में झड़ते हुए माया के ऊपर गिर गया.
माया को अंकित का भार अपने बदन पे अच्छा लग रहा था. दोनों हांफते हुए एक दूसरे से लिपट गए और नींद के आगोश में समा गए.



जब माया की आँख खुली, तब सुबह हो चुकी थी. माया सीधे नहाने चली गई. आज उसके लिए बड़ा दिन था. माया आज एक नयी कंपनी ज्वाइन करने वाली थी. यह एक तेजी से बढ़ती हुई कंपनी थी और यहाँ माया जल्दी ही अपने बॉस, कंपनी के एमडी को इम्प्रेस करना चाहती थी.

माया नहा के निकली और अपनी अलमारी से एक पंजाबी सूट निकाला. माया बहुत सुन्दर थी. गोरा चिट्टा रंग, साढ़े पांच फुट की हाइट और ऊपर से उसका 36-28-34 का फिगर. आज भी माया 28 साल से ज्यादा नहीं लगती थी. माया खुले विचारों वाली मॉडर्न औरत थी. ऑफिस में कई लोग उससे फ़्लर्ट करते थे और माया को इससे कोई परहेज़ नहीं था. जब माया के फ़्लर्ट करने की वजह से लोगों का लंड खड़ा हो जाता था, माया को बहुत मज़ा आता था. उसे लगता था कि वो किसी को भी अपने वश में कर सकती है. अंकित उसका पहला प्यार था और शादी के बाद माया अंकित के अलावा किसी भी मर्द से नहीं चुदी थी. या कहिये माया को किसी से चुदने की जरूरत नहीं पड़ी. अंकित उसे हर तरह से खुश रखता था और दोनों हफ्ते में 3-4 बार सेक्स कर ही लेते थे. पर आजकल माया को किसी और लंड की दरकार भी हो चली थी और इसका कारण उसकी बढ़ती कामवासना थी.

माया ने पंजाबी सूट में खुद को निहारा. वो जानती थी कि आज बहुत से लोग उसे देख कर उसके नाम की मुठ मारेंगे. टाइट फिटिंग की वजह से माया के मम्मे और भी बड़े लग रहे थे. मम्मों का ऊपर का हिस्सा सूट से बाहर झांक रहा था. अपनी बलखाती हुई कमर पे माया ने हाथ फिराया और एक चुन्नी डाल ली. माया ने अपनी गाड़ी निकाली और ऑफिस की ओर चल दी.

ऑफिस में माया का वेलकम खुद एमडी ने किया और माया को सभी से मिलवाया. माया लोगों की नज़रों में अपने लिए हवस देख सकती थी. खासकर कोने में खड़ा हुआ एक आदमी, जो कि उसे 40 के आस पास लगा, वो लगातार माया को ही घूरे जा रहा था.

“बहनचोद आज तो आँखों से ही बलात्कार कर देगा ये हरामी..” ये सोचते हुए माया ने मन ही मन मुस्कुराते हुए उससे हाथ मिलाया.
“माया, यह है मिस्टर अमित.. आपके पहले प्रोजेक्ट पे ये आपके साथी होंगे और इसलिए आप दोनों का केबिन एक ही है.” ये कहते हुए एमडी ने माया को अमित से मिलवाया. माया ने मुस्कुराते हुए अमित से हाथ मिलाया और सोचने लगी कि पहला प्रोजेक्ट इस हरामी के साथ.. साए का लंड न जाने कैसा होगा.

माया को ऑफिस ज्वाइन किये हुए दो दिन हो चुके थे और अमित के बारे में जिस भी लड़की से पूछा, माया को उससे और चिढ़ होती गई. अमित एमडी का साला था और एक नंबर का ठरकी था. ऑफिस में कोई भी लड़की ऐसी नहीं थी जिस पर अमित ने लाइन न मारी हो. माया मन में सोचने लगी कि साले का लंड मतलब का हुआ तो ही इसको घास डालूंगी वरना इसने मुझसे पंगा लिया तो इस हरामी को ऐसा सबक सिखाऊंगी कि साला अपनी बीवी को भी आँख उठा के नहीं देख पाएगा.

यही सब सोचते हुए माया अपने केबिन में एक फाइल ढूंढ रही थी. उसे याद आया कि वो फाइल ऊपर वाले शेल्फ में रखी है. आज माया ने साड़ी पहनी थी और जैसे ही माया ने फाइल उतारने के लिए अपना हाथ बढ़ाया, उसे अपने पेट पे एक हाथ महसूस हुआ. माया फ़ौरन पलटी उसके सामने अमित खड़ा था. माया ने सोचा भी नहीं था कि अमित की इतना हिम्मत हो सकती है. अमित के चेहरे की मुस्कराहट को माया ने देखा और मुस्कुरा दी. तभी अमित का मोबाइल बज उठा और अमित माया को आँख मार कर चला गया

अगले 4-5 अमित और माया में बस उतनी ही बात हुई, जितनी जरूरी थी. माया को देखते ही अमित अपनी आँख मार देता. माया को लगने लगा था कि अमित को उसका जिस्म पसंद आ गया है और अमित उसको अपने लंड के नीचे लेटाना चाहता है.

माया ये सब सोच ही रही थी कि अमित की आवाज उसके कानों में पड़ी- माया, आपके लिए कॉफी लाया हूँ. आपकी मीटिंग से पहले ये आप में एनर्जी भर देगी.

आज माया की एक बहुत ही बड़े क्लाइंट कि साथ मीटिंग थी जिसमें खुद एमडी होने वाले थे. ये प्रेजेंटेशन इस कंपनी में माया का भविष्य बना और बिगाड़ सकती थी. माया ने जैसे ही कॉफी लेने के लिए हाथ बढ़ाया, कॉफी माया की साड़ी पर गिर गई.

“रियली सॉरी माया, सब मेरी गलती है. जल्दी से इससे साफ़ कर लो.” ये कहते हुए अमित ने माया को साड़ी साफ़ करने के लिए टिश्यू पकड़ाया. माया तुरंत लेडीज वाशरूम की तरफ भागी. गरम कॉफी गिरने की वजह से माया जो पेट पे जलन हो रही थी. माया ने पहले अपने पेट पर से, फिर अपनी सेमीट्रांसपेरेंट साड़ी पर से कॉफी साफ़ की.
“साला चूतिया, देख के कॉफी भी नहीं दे सकता.” सोचते हुए माया साड़ी ठीक करने लगी. लेकिन पेट पे जलन की वजह से माया साड़ी ठीक से नहीं पहन पा रही थी. माया ने साड़ी अपनी नाभि से दो इंच नीचे की, तब जाके उसे अच्छा लगा. ठन्डे पानी की वजह से जलन तो कम हो गई थी, लेकिन माया को ये पता था कि वो साड़ी ऊपर नहीं बांध पाएगी. माया ने खुद को शीशे में देखा. साड़ी नीचे बाँधने की वजह से माया और भी सेक्सी लग रही थी.
“ये ट्रांसपेरेंट साड़ी भी आज ही पहननी थी मुझे..” बड़बड़ाते हुए माया बाहर निकली और सीधे अपने केबिन में घुस गई, जहां अमित नहीं था.

माया ने घड़ी की तरफ देखा और अपनी फाइल ढूंढ़ने लगी. वो सोच रही थी “यार तू इतनी लापरवाही कैसे कर सकती है माया. इतनी महत्वपूर्ण फाइल और तू रख के भूल गई.”
तभी माया को अमित की आवाज सुनाई दी- माया, क्या ढूंढ रही हो? वो आपकी महत्वपूर्ण फाइल?
माया अमित का खेल समझ चुकी थी- अमित, अगर वो फाइल मुझे नहीं मिली तो बड़ी दिक्कत हो जाएगी यार, तेरे पास हो तो दे ना!

अमित अपनी चेयर पे बैठ गया, उसके चेहरे पे विजयी मुस्कान थी और माया जानती थी.
माया अमित से लगभग लिपटते हुए बोली- अमित प्लीज वो फाइल मुझे दे दो, बदले में तुमको क्या चाहिए मैं दे दूंगी.
“सच में माया मुझे तुम सब कुछ देने को तैयार हो?”

अमित के बात करने के तरीके से माया को सब समझ आ गया कि ये चोदने के चक्कर में है लेकिन इस वक्त उसे वो फाइल चाहिए थी जो कि कंपनी के लिए बहुत महत्वपूर्ण थी.
माया ने अपना पल्लू गिरा कर मम्मों की झलक दिखाई और कहा- हां यार.. जल्दी करो मीटिंग में देर हो रही है.
“मैं तुम्हें वो फाइल दे सकता हूँ, लेकिन बदले में मुझे क्या मिलेगा?”
माया ने कहा – क्या चाहिए तुम्हें, बोलो?
“फाइल के बदले में मुझे तुम्हारी ब्रा चाहिए, अभी.”

माया की आँखें खुली की खुली रह गईं और उसे समझने में सिर्फ एक मिनट लगा कि अमित क्या मांग रहा था.
“ब्रा का क्या करोगे?”
“क्योंकि अभी तेरी ब्रा सूँघ कर ही काम चला लूँगा बाद में तेरे आमों को चूस कर रस पियूंगा. अभी मैं बाहर जा रहा हूँ, पांच मिनट में वापस आऊंगा. तब तक मुझे तुम्हारी ब्रा तुम्हारी टेबल पे मिलनी चाहिए.” कहते हुए अमित रूम से बाहर चला गया.

अपनी सीट पे बैठते हुए माया अमित के लंड के बारे में सोचने लगी. उसके लंड से चुदाई का ख्याल करते हुए उसकी चूत गीली हो गई. फिर खुद को संभालते हुए माया उठी और गेट बंद किया. उसे पता था 5 मिनट जल्दी ही निकल जाएंगे. अपना पल्लू हटाया और जल्दी से ब्लाउज खोलने लगी. फिर ब्रा निकाल कर टेबल पे रखी और ब्लाउज का हुक बंद ही कर रही थी कि दरवाजे पे दस्तक हुई. माया जैसे ही ब्लाउज बंद करके मुड़ी, सामने सुमित खड़ा था. वो माया का जूनियर था और माया को शायद मीटिंग के लिए याद दिलाने आया था. टेबल पे रखी ब्रा देख कर सुमित का मुँह खुला का खुला रह गया.

“मैं थोड़ी देर में वापस आता हूँ.” कह के सुमित केबिन से बाहर निकल गया.
“पता नहीं आज क्या क्या और देखना बचा है.” बुदबुदाते हुए माया दरवाजे की तरफ बढ़ने लगी कि तभी अमित अन्दर आ गया और उसके पीछे था उस्मान. उस्मान ऑफिस में पियून था.
“ये यहाँ क्या कर रहा है?” माया ने अमित को देखते हुए पूछा.
अमित ने कहा- उस्मान अपना ही दोस्त है और जिस दिन तुम पहली बार आई थी, मेरी उस्मान से शर्त लगी थी कि तुम पैडेड ब्रा पहनती हो. बस वही शर्त जीतने के लिए उस्मान को यहाँ लेके आया हूँ.”
“लाओ अब जल्दी से तुम्हारी ब्रा मुझे दे दो, जिससे में उस्मान को बता सकूं कि मैं कभी गलत नहीं होता.”

माया ने अपनी ब्रा उठाई और अमित की तरफ फेंक दी. अमित ने ब्रा को अपने हाथ में लिए और नंबर पढ़ते हुए कहा- देख 36C.. उस्मान, सही कहा था ना मैंने.. पैडेड भी है और साइज भी वही है.”
“हां सर.. आपका अंदाजा बिल्कुल सही निकला.” अमित के हाथ से ब्रा लेते हुए उस्मान बोला.

फिर उस्मान माया की ब्रा को अपने चेहरे के पास ले गया और सूंघने लगा. ये सब देख के माया का मन कर रहा था कि ऑफिस से भाग जाए. शर्म के मारे वो जमीन में गड़े जा रही थी.
माया ने कहा- अब तो मुझे वो फाइल दे दो अमित.
फाइल आगे बढ़ाते हुए अमित बोला- ये लो तुम्हारी फाइल.
लेकिन तभी उस्मान बोला- सर, हम कैसे मान ले ये वही ब्रा है जो मैडम आज पहन कर आई हैं?

ये सुनते ही माया हंसने लगी. उसने जैसे ही कदम जाने के लिए बढ़ाया, अमित ने माया का हाथ पकड़ लिया और झट से उसका पल्लू कंधे पे से नीचे खींच लिया. ट्रांसपेरेंट साड़ी की तरह ब्लाउज भी थोड़ा झीना था और ध्यान से देखने पर माया के काले निप्पल देखे जा सकते थे.

माया ने अपने चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया. मौके का फायदा उठा के उस्मान ने माया की नाभि के नीचे अपनी उंगली फिरा दी. उस्मान के छूने से माया सिहर उठी. शादी के बाद से आज तक अंकित के अलावा इस तरह उसे किसी ने नहीं छुआ था. माया के जिस्म में करंट दौड़ने लगा.

तभी एक आवाज आई और उसने देखा उस्मान के हाथ में कैमरा था. माया ने अपना हाथ अमित से छुड़ाया और उस्मान से कैमरा बंद करने की कहने लगी.

उस्मान ने तुरंत कैमरा अपने पीछे कर लिया और माया उससे कैमरा छीनने की कोशिश करने लगी. माया के मोटे मोटे मम्मे उस्मान के सीने से रगड़ने लगे, लेकिन इससे बेखबर माया तो बस कैमरा छीनना चाहती थी. तभी अमित ने पीछे से अपने दोनों हाथ माया की कमर से होते हुए पेट से सटा दिए और माया को पीछे खींच लिया.
उदास होते हुए उस्मान बोला- क्या सर, अभी तो मज़ा आने लगा था. मैडम के कबूतरों का थोड़ा और मज़ा ले लेने देते.

उसकी बात सुन के माया को होश आया के वो क्या कर रही थी और उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया. वो होंठ दबा कर कटीली मुस्कान बिखेरने लगी.
खुश होते हुए उस्मान बोला- ब्रा तो मैडम की ही है.

इससे पहले कोई और कुछ बोल पाता, माया के फ़ोन पे एमडी का कॉल आ गया. माया को याद आया, उसकी मीटिंग है और सब उसका वेट कर रहे हैं. अमित से फाइल छीनते हुए माया लेडीज वाशरूम की तरफ भागी. शीशे में खुद को देख कर अपने हुलिए को ठीक किया.

“जो हो गया वो हो गया. इन दोनों मादरचोदों से तो बाद में निपट लूँगी. पहले मुझे इस मीटिंग के बारे में सोचना होगा.” ये सब सोचते हुए माया बाहर निकली और सीधे मीटिंग रूम में घुस गई. जहां लगभग सब पहुँच चुके थे.
एमडी ने सबका परिचय माया से करवाया और जैसे ही माया अपनी प्रेजेंटेशन स्टार्ट करने वाली थी, उसकी नज़र अमित पे पड़ी, जो की सबसे पीछे बैठा मुस्कुरा रहा था. पिछले बीस मिनट में जो भी हुआ था, माया के सामने आ गया और माया को ये भी याद आ गया कि उसने ब्रा नहीं पहनी है और साड़ी भी नाभि से दो इंच नीचे पहनी है. माया सबके सामने तो साड़ी ठीक कर नहीं सकती थी, इसलिए उसने अपनी प्रेजेंटेशन चालू की.

पहले दस मिनट के बाद किसी का भी ध्यान माया की प्रेजेंटेशन पे नहीं था. खुद एमडी भी माया के निप्पल और सपाट पेट को देख रहे थे. इस हुलिए में माया साक्षात् काम की देवी लग रही थी. माया ये जानती थी और वो फैसला कर चुकी थी कि जब सब सम्मोहित हो ही चुके हैं, तो क्यों ना डील को फाइनल किया जाए जिससे एमडी पे वो अपनी धाक जमा सके. उसके बाद अमित के साथ कैसे निपटना है, वो सोचूँगी.

प्रेजेंटेशन खत्म होते ही कमरा तालियों से गूंज पड़ा. एमडी ने माया को गले से लगा लिया. क्लाइंट भी बहुत खुश नज़र आ रहा था और उसने तभी डील फाइनल कर दी. माया ख़ुशी ख़ुशी अपने केबिन में वापस आ गई और घर जाने की तैयार करने लगी.

आज जो कुछ ऑफिस में हुआ, उसे सोच कर माया की चूत भी गीली हो रही थी.
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