Thursday, February 15, 2018

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सेक्सी माया की अन्तर्वासना-2-antarvasna

antarvasna
सेक्सी माया की अन्तर्वासना-1-Antarvasna 
में आपने पढ़ा कि माया को अपने पहले प्रेंजेटेशन में सफलता मिल गई थी इसी के साथ उसको अमित और उस्मान के लंड मिलने की उम्मीद हो चली थी. वो अपने केबिन में आई और घर जाने की तैयारी कर रही थी.
अब आगे..

तभी केबिन का दरवाजा खुला और सुमित अन्दर आया. माया ने बधाई लेने के लिए सुमित की तरफ हाथ बढ़ाया ही था कि सुमित बोला- माया डार्लिंग, मुझे तेरी पेंटी चाहिए.. अमित सर ने कहा है कि उनकी रंडी आज बिना ब्रा पेंटी के ही घर जाएगी.

ये सुमित के मुँह से सुनते ही माया के होश उड़ गए “सुमित तुम भी?”
माया बस इतना ही बोल पाई. आज तक अपने लिए इस तरह की बातें किसी से नहीं सुनी थीं लेकिन उसे इस खेल में मजा आने लगा था. फिर अगले ही पल माया ने मादक स्वर में कहा- ओके सुमित तुम एक मिनट के लिए बाहर जाओ, मैं तुम्हें उतार कर देती हूँ.

सुमित चहकते हुए बोला- अमित सर ने कहा है कि पेंटी में खुद उतारूं, नहीं तो वो आपकी पेंटी नहीं लेंगे.
माया हंस कर बोली- तो रोका किसने है आ जा.. उतार ले.

वो केबिन का दरवाजा बंद कर के सुमित के सामने खड़ी हो गई. सुमित माया के सामने घुटने के बल बैठ गया. जैसे ही सुमित ने ऊपर देखा, सुमित का मुँह खुला का खुला रह गया. गोरा सफ़ेद पेट और उस पर सुन्दर सी नाभि और उसके ऊपर विशाल उन्नत वक्ष, जो ब्लाउज में कैद थे. ब्लाउज झीना होने के कारण सुमित को गोरे गोरे मम्मों की झलक मिल रही थी और उसका लंड पेन्ट फाड़ के बाहर आने को तैयार था.

“जल्दी करो, मुझे घर के लिए निकलना है. मेरे पति मेरा वेट कर रहे हैं”

माया बस यही बोल पाई.



उसने धीरे धीरे माया की साड़ी ऊपर उठानी चालू की. सुमित हर पल का भरपूर मज़ा लेना चाहता था. जैसे जैसे माया की साड़ी ऊपर जा रही थी, माया की साँसें तेज़ होती जा रही थीं. जो कुछ हो रहा था, उसे बहुत अच्छा लग रहा था, सुमित का उसकी टांगों पर स्पर्श उसे उत्तेजित भी कर रहा था.

उससे भी बुरा हाल सुमित का था. अब वो माया के घुटनों तक पहुँच चुका था और माया की जाँघों की तरफ बढ़ रहा था. माया की सुडौल जाँघें अब सुमित को दिखने लगी थीं कि तभी माया ने उसका हाथ पकड़ लिया.
माया ने हांफते हुए कहा- बस सुमित, साड़ी को इससे ऊपर मत करो..

सुमित समझ चुका था कि लोहा गर्म है, लेकिन वो माया के साथ ज़बरदस्ती करके मज़ा ख़राब भी नहीं करना चाहता था. सुमित को एक आईडिया आया. सुमित ने साड़ी को वहीं रखा और अपने घुटनों पे थोड़ा सा ऊपर हो गया. इससे अब सुमित का चेहरा माया के पेट के सामने था. सुमित थोड़ा माया के पास खिसका और अपनी गर्म सांसें माया के पेट पे छोड़ने लगा. माया ये सब देख रही थी और सुमित को रोकना भी नहीं चाहती थी, लेकिन जैसे ही सुमित की गर्म सांसें माया के पेट पे पड़ीं, उसका सर अपने आप पीछे की तरफ झुक गया.

अब सुमित जानता था कि माया उसके साथ मजे ले रही है. सुमित ने अपने हाथ ऊपर बढ़ाना शुरू किया और अपनी गर्म सांसें और तेज़ माया के पेट पे छोड़ने लगा. सुमित के हाथ के साथ साथ सुमित भी थोड़ा थोड़ा ऊपर होता जा रहा था और जैसे ही सुमित के हाथ माया की पेंटी तक पहुँचे, सुमित ने माया के मम्मे के थोड़ा सा नीचे अपने होंठ लगा दिए. इससे माया को होश आया और उसने तुरंत सुमित को अपने से दूर धकेला. तब तक सुमित माया की पेंटी नीचे सरका चुका था. माया ने अपने पैर उठाए और पेंटी निकाल के सुमित को दे दी. सुमित भी थोड़ा हड़बड़ा गया और तुरंत उठ कर बाहर निकल गया.

माया ने जल्दी से अपना हुलिया ठीक किया, अपना सामन समेटा और पार्किंग की तरफ दौड़ पड़ी. सुमित के स्पर्श ने उसे मस्त कर दिया था. पार्किंग में उसे अपनी गाड़ी दिखाई दी और गाड़ी के पास खड़ा उस्मान भी.
उस्मान माया के मम्मों को घूरते हुए बोला- क्यों मैडम, सुमित सर ने ज्यादा परेशान तो नहीं किया ना?
“नहीं उस्मान, अभी मुझे जल्दी है मैं बाद में बात करती हूँ.”

माया को काफी देर हो चुकी थी और उसे घर जाना था. वो चाह कर भी रुक नहीं सकती थी.

“मुझे भी कहां आपको अभी अपनी गन दिखानी है मैडम. लेकिन आपको जल्द ही देखने को मिलेगी. खैर, अमित सर ने कहा है कल से पूरे हफ्ते आपको बिना ब्रा पेंटी के ही ऑफिस आना है.
माया बोल पड़ी- हां हां, मुझे पता है.
“तू तो बहुत समझदार है मेरी रंडी..”

उस्मान ने अपना हाथ आगे बढ़ाया.. इससे पहले वो माया को छू पाता, उसे दूर से पार्किंग की तरफ आते हुए एमडी दिख गए. उस्मान फटाफट वहां से निकल गया और माया भी इस वक्त एमडी से नहीं मिलना चाहती थी, इसलिए वो भी अपनी गाड़ी में बैठ कर अपने घर की तरफ निकल पड़ी.

घर पहुँच के माया सीधे नहाने चली गई. आज जो कुछ भी हुआ, वो सब उसकी आँखों के आगे घूम रहा था. वो सोच रही थी कि आने वाला हफ्ता पता नहीं कैसे निकलेगा. बिना ब्रा पेंटी के ऑफिस कैसे जाऊँगी में.. अंकित को क्या कहूँगी. किसी को पता लग गया तो क्या होगा.

माया खुद से बात करते हुए नहाने लगी. शावर चालू करके जैसे ही माया के बदन पे ठंडा पानी पड़ने लगा, उसे अच्छा लगने लगा.

“आज सुमित को में नहीं रोकती तो ना जाने क्या होता..” माया की आखों के सामने वो मंजर आ गया. उफ्फ.. सुमित के हाथ मेरी जांघों को कैसे सहला रहे थे.” माया ने अपना सर नीचे किया और उसे लगा जैसे सुमित अब भी अपने घुटनों के बल नीचे बैठा है. माया को सुमित की सांसें अपने पेट पर महसूस होने लगीं और उसका हाथ अपने आप उसकी चुत पे चला गया.
“उस्मान का सीना कितना चौड़ा था और सुमित की सांसें कितनी गर्म..”

यही सब सोचते हुए माया की उंगलियां तेज़ तेज़ चलने लगीं.

“उस हरामी उस्मान को मेरे चूचों को अच्छे से महसूस किया होगा. क्या उसने मेरे मम्मों को छुआ भी था?? छुआ ही होगा.. कौन रह सकता है इन मम्मों से दूर..” सोचते हुए माया अपने मम्मों को दबाने लगी.

अब उसकी उंगलियां चुत के ऊपर दाने को रगड़ रही थीं, जो बहुत देर से फड़क रहा था.

“उउउमम्म उम्म्ह… अहह… हय… याह… सीईई आआह्ह्ह…” कहते हुए माया झड़ने लगी. माया की आँखें बंद होने लगीं और वो नीचे बैठ गई. लेकिन माया की चुत में अभी भी आग लगी थी.

माया नहा कर बाहर निकली और एक सेक्सी सी मैक्सी पहन कर बेडरूम में घुस गई. उसने अंकित के कलेक्शन में से एक क्सक्सक्स पोर्न मूवी चला ली और अंकित का इंतज़ार करने लगी.

कुछ देर बाद अंकित अपनी चाभी से दरवाजा खोल के घर में घुसा. उसे बेडरूम में से कुछ जानी पहचानी आवाज आने लगी और वो बेडरूम की तरफ बढ़ चला. जैसे जैसे अंकित बेडरूम के पास जाने लगा, उसका शक यकीन में बदल गया. उसे पता था कि माया कभी कभार ही पोर्न देखती है. बेडरूम के बाहर पहुँच कर अंकित ने अपने कपड़े उतार दिए.. अब वो पूरी तरह नंगा था और उसका लंड अपने पूरे शबाब पे था. अंकित ने धीरे से दरवाजा खोला और उसकी आँखें बड़ी हो गई. सामने टीवी पर उसकी पसंदीदा पोर्न चल रही थी, जिसमें जेना जेम्सन को दो हब्शी आगे पीछे से एक साथ चोद रहे थे और बिस्तर पर उसकी सेक्सी बीवी अपनी टांगें फैलाए चुत में उंगली डाल के अपनी गांड हिला रही थी.

अंकित बिना कुछ बोले अन्दर चला गया. माया की आँखें बंद थीं और चुत में से इतना पानी निकल रहा था कि चादर पे निशान बन गया था.
पूरे कमरे में जानी पहचानी खुशबू फैली हुई थी. अंकित ने एक लम्बी सांस ली और माया की चुत पे अपनी जीभ टिका दी. माया ने चौंक कर अपनी आँखें खोलीं, लेकिन अगले ही पल वापस बंद कर लीं.

अब अंकित माया के दाने को जीभ से चाट रहा था और साथ ही साथ चूस भी रहा था. माया ने अंकित के बाल कसके पकड़ रखे थे. अंकित ने माया की मैक्सी के अन्दर से हाथ डालते हुए माया के दोनों चुच्चे पकड़ लिए. इस दोहरे हमले को माया सह नहीं पाई और चिल्ला चिल्ला के झड़ने लगी

“अंकित.. प्लीज़ आआअह्ह्ह और जोर से चाटो और चाटो मेरे राजा.. खा जाओ मेरी चुत को.. आआअह्ह्ह्ह.. इस्स्स..” अब अंकित माया की गांड से लेकिन चुत तक धीरे धीरे अपनी जीभ चलाने लगा. जैसे ही तूफ़ान शांत हुआ, माया ने अंकित को बिस्तर पे लेटा दिया और उसका पूरा का पूरा लंड मुँह में भर के कस कस के चूसने लगी. अंकित की आँखें बंद हो चुकी थीं और वो जन्नत में था. माया को पता था कि अंकित को क्या चाहिए. माया ने अंकित का लंड अपने मुँह से बाहर निकाला और अंकित के टट्टों को अपने मुँह में भर लिया. कुछ देर उन्हें चूसने के बाद.. अब माया अंकित के लंड को चाटने लगी.

माया अब पूरी तन्मयता से टट्टों से लेकर सुपारे तक अंकित का लंड चाट रही थी और टट्टों को अपने कोमल हाथों से दबा भी रही थी. अंकित बिस्तर पे पड़ा हुआ बस आहें भर रहा था. माया ने फिर से अंकित का पूरा लंड निगल लिया. माया की इस जोरदार चुसाई से अंकित की हालत ख़राब हो चली थी. उसने अपने हाथ आगे बढ़ा के माया के बोबे अपने हाथों में भर लिए और निचोड़ने लगा. बीच बीच में वो माया के निप्पल भी खींच देता.. इससे माया का मज़ा और भी बढ़ गया था.

तभी माया ने एक उंगली अंकित की गांड में घुसा दी. अंकित के लिए ये पहली बार था और इसलिए उसे थोड़ा दर्द तो हुआ, लेकिन माया की चुसाई की वजह से उसे मज़ा आने लगा. माया अंकित की गांड अपनी उंगली से चोदने लगी और अंकित ज्यादा देर टिक ना सका. अंकित ने अपना सारा माल माया के मुँह में ही निकाल दिया और माया ने एक बूंद भी बाहर नहीं निकलने दी. अंकित ना जाने कितनी देर तक झड़ता रहा. कुछ देर बाद जब माया सारा रस पी चुकी थी, वो उठी और अंकित के ऊपर आ गई.

अंकित माया को चूमते हुए बोला- क्या बात है जान, आज जैसे तो तुमने कभी लंड नहीं चूसा?
माया ने इठलाते हुए जवाब दिया- तुम्हें कोई शिकायत है क्या?
अंकित माया की गांड दबाते हुए बोला- शिकायत तो तब भी नहीं की, जब तुमने मेरी गांड में उंगली डाल दी. आज मुझे भी अपनी गांड मार लेने दो.
“तुम्हें पता है ना अंकित मुझे गांड मरवाने में डर लगता है. मैं तो चाहती हूँ कि तुम मेरी गांड का फीता काट दो… लेकिन फिर डर के मारे रह जाती हूँ. चलो अब मूड मत ख़राब करो और जल्दी से मुझे आगे से चोद दो. बहुत परेशान कर रखा है इस निगोड़ी चुत ने..” कहते हुए माया ने अंकित का लंड अपनी चुत पर सैट किया और धीरे धीरे नीचे होने लगी. माया की चुत पहले से ही गीली थी. अंकित का लंड चुत में समाता गया. जब लंड जड़ तक समां गया, माया ने अपनी गांड को हिलाना चालू किया. अपने चुच्चे दबाते हुए माया अपनी गांड हिला रही थी. ये देख कर अंकित का जोश दुगना हो गया और अंकित नीचे से धक्के लगाने लगा.

फच्च फच्च फच्च की आवाज कमरे में गूंजने लगी. माया की चुत में अंकित का लंड सटासट अन्दर बाहर हो रहा था. माया ने अपने दोनों हाथ अंकित के सीने पे रख रखे थे और अंकित के लंड पे उछल रही थी.

अंकित ने एक हाथ से माया का दाना रगड़ना शुरू किया और दूसरे से एक निप्पल खींचना मरोड़ना चालू कर दिया. अंकित जानता था कि माया की वासना कैसे बढ़ानी है. माया के उछलते हुए मम्मों को देख के अंकित और उत्तेजित हो रहा था और माया के चुत की गर्मी अंकित की हवस को और भड़का रही थी. अंकित ऊपर की ओर उठा और माया का एक चुच्चा अपने मुँह में भर के चूसने लगा. अंकित के बैठने से उसके पेट का सबसे निचला हिस्सा माया के दाने को रगड़ने लगा और माया अपनी गांड और जोर से हिलाने लगी. उसको लग रहा था कि अंकित उसके मम्मे को खा ही जाएगा.

अब अंकित और माया दोनों ही कभी भी झड़ सकते थे लेकिन अंकित इस खेल को और खेलना चाहता था. उसे पता था कि माया भी यही चाहती है. अंकित अपने घुटनों के बल उठा और बिना अपना लंड बाहर निकाले, माया को बिस्तर पे पटक दिया. इसी आसान में अंकित ने 10-12 घस्से लगाए और फिर अपना लंड बाहर निकाल लिया.

माया को अचानक अपनी चुत खाली खाली लगने लगी. इससे पहले वो कुछ समझ पाती, अंकित ने माया को घोड़ी बना दिया और पीछे से अपना लंड एक झटके में उसकी चुत में उतार दिया. माया के तन बदन में आग लग गई और उसके मुँह से एक मादक सीत्कार निकल गई.

“आअह्ह्ह और चोदो अंकित.. चोद दो अपनी इस चुत को.. जोर से डालो.. आआह्ह्ह ओह्ह्ह्हह मेरे राजा.. मर गईईईईईई… चोद डालो जानूनूनूनूऊऊ..”

अंकित को अब माया की गांड दिख रही थी और उसकी माया की गांड मारने की तड़प बढ़ती जा रही थी. माया को चोदते चोदते अंकित से माया की गांड सहलाना चालू किया. माया की गांड का पिंक छेद अंकित को पागल बना रहा था. अंकित से रहा ना गया और उसने अपनी एक उंगली माया की गांड में डालनी चालू की. माया को पता था कि अंकित क्या चाहता है. शादी के बाद से उसने अंकित को रोक रखा था लेकिन आज जो भी कुछ हुआ ऑफिस में, उसके बाद माया बहुत उत्तेजित भी थी और उसके मन में अंकित को मजा देने की इच्छा भी थी. इसलिए उसने अंकित को नहीं रोका और अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलने लगी.

जब अंकित को समझ आया कि माया क्या कर रही है, वो और उत्तेजित हो गया और माया की चुत को बेरहमी से अपने लंड से और गांड को अपनी उंगली से चोदने लगा. कुछ ही पलों में दोनों झड़ने लगे.

अंकित ने झड़ते हुए बड़बड़ाते हुए कहा- किसी दिन तुझे सैंडविच बना कर चोदने का मन है माया रानी.
माया- आह्ह.. उसके लिए तुझे एक लंड और लाना पड़ेगा मेरी जान.. मेरी भी इच्छा है कि दोनों छेद एक साथ चुदवा लूँ..

यही सब बड़बड़ाते हुए दोनों शिथिल हो गए. आज अंकित और माया को उनकी सुहागरात याद आ गई थी, जब दोनों ने पूरी रात चुदाई की थी. अंकित हांफता हुआ माया की पीठ पर गिर गया और माया उसका वजन संभल नहीं पाई और वो भी बिस्तर पे गिर गई.

अंकित भावुक होते हुए बोला- आज तुमने मुझे वो आनन्द दिया है जान, जो मैं तुम्हें बता भी नहीं सकता..

माया अंकित को अपनी बांहों में लेते हुए बोली- कल का इंतज़ार करो मेरे चोदू राजा.. कल मैं तुम्हारा बरसों पूरा सपना पूरा करूँगी.. कल तुम इस गांड का उद्घाटन करके मुझे पूरी तरह अपना बना लेना.

दोनों एक दूसरे की आगोश में सो गए.

अगले दिन माया ने बहुत ही सिंपल साड़ी पहनी थी. हालांकि वो जानती थी, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ने वाला, लेकिन वो आग में घी नहीं डालना चाहती थी. माया ने अपनी गाड़ी पार्किंग में लगाई और तेज़ कदमों से अपने केबिन की तरफ बढ़ चली. वो ऑफिस आज जल्दी आ गई थी और उस्मान, अमित या सुमित से पहले अपने केबिन पहुँच कर अपनी ब्रा और पेंटी उतार देना चाहती थी. लेकिन शायद उसकी किस्मत ख़राब थी.

“इतनी जल्दी क्या है मैडम?”
उसे उस्मान की आवाज सुनाई दी. उसके कदम और तेज़ हो गए, लेकिन उस्मान एकदम से भाग कर उसके सामने आ गया.
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