Sunday, February 25, 2018

Published 2:47 AM by with 0 comment

भाभी ने चुत चुदाई करवा के सिखाई बायोलॉजी

भाभी ने चुत चुदाई करवा के सिखाई बायोलॉजी

(Bhabhi Ne Chut Chudai Karwa Ke Sikhayi Biology )

कामुकता से भरी लंड को खड़ा करने वाली और चूत में उंगली करने को विवश कर देने वाली कामुक चोदन कहानियां इस साईट पर पढ़ने और लिखने को मिल जाती हैं.
मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि मेरी इस कहानी को पढ़कर जिन पुरुष दोस्तों के पास चूत का इंतज़ाम है, वो चूत या गांड मारने लगेंगे और जिन महिला दोस्तों के पास लंड का इंतज़ाम है, वो अपनी अपनी चूत में लंड घुसवाने को विवश हो जाएंगी. साथ ही जिन दोस्तों और सहेलियों के पास लंड या चूत का इंतज़ाम नहीं है, वो चूत में उंगली या लंड की मुट्ठ जरूर मारेंगे.

कहानी शुरू करने से पहले मेरा परिचय देना तो बनता है.
दोस्तो, मैं आगरा से 25 वर्षीय वीशु कपूर नाम का एक सजीला नौजवान हूँ लेकिन पिछले कुछ महीनों से अपनी मौसी के साथ अहमदाबाद में रह रहा हूँ और वहीं एक रेणुका लेडीज मसाज पार्लर में एक मसाज बॉय की हैसियत से काम कर रहा हूँ. जिसमें मुझे लड़की या औरतों की फुलबॉडी मसाज और उनकी जरूरत के हिसाब से उनकी चुदाई भी करनी पड़ती है और कभी कभी रेणुका मैडम मुझे होम सर्विस के लिए भी भेजती हैं. इसके एवज में वो हर ग्राहक से एक मोटी रकम वसूलती हैं, उसका 50% मुझे रेणुका मैडम को पे करना पड़ता है.

जिम जाने के कारण मेरा बदन गठीला है, मेरे लंड की लम्बाई 9 इंच है और मोटाई घोड़े के लंड जैसी है.

अब मैं आपको ज्यादा बोर न करते हुए अपनी कहानी पर आता हूँ. बात आज से करीब 6 साल पहले की है. मेरे गाँव में एक राम सहाय यादव नाम के एक पड़ोसी थे जिनको मैं प्यार से ताऊजी कहता था. उनकी तीन लड़कियां अंजलि, पारुल और संगीता और एक लड़का बॉबी यादव था, जो ताऊजी के परिवार में सबसे छोटा था.


ताऊजी ने तीनों लड़कियों की शादी बहुत पहले कर दी थी. बॉबी भाई मुझसे करीब 3 साल बड़े थे, इसलिए मैं उन्हें भैया कह कर पुकारता था. ताऊ के घर में इकलौता पुत्र होने के कारण उसकी शादी भी धूमधाम से की गई, जो कि समय से 6 महीने पहले ही कर दी गई थी.

तीनों बहनों की शादी में मैं बहुत छोटा था इस कारण मुझे सब कुछ याद नहीं है, लेकिन बॉबी भैया की शादी का मुझे बहुत अच्छी तरह ध्यान है. उस समय मैं गाँव से दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद ग्यारहवीं में एडमीशन लेने के लिए अपने आगरा वाले मकान में रहने लग गया था. तो बॉबी भैया मुझे खुद आगरा वाले मकान पर निमंत्रण देने के लिए आये थे.

भैया मुझे यह धमकी दे गए कि जब तक मेरी शादी में वीशु तू नहीं आएगा, ये समझ लेना कि तब तक मैं घोड़ी पर नहीं बैठूँगा.
मैंने कहा- भैया आप चिंता न करो मैं आपकी शादी में जरूर पहुँचूंगा.

शादी जयपुर में थी क्योंकि भैया जयपुर में सेटल थे, उनकी शादी को मैंने अटेंड किया जोकि किसी मैरिज गार्डन से थी. मैंने देखा कि बॉबी भैया की दुल्हन काया बहुत ही खूबसूरत थी.

खैर मैं शादी अटेंड करके सीधा आगरा लौट आया और अपनी पढ़ाई पर लग गया क्योंकि मेरे एग्जाम जो थे. मैंने बहुत ही मेहनत से पढ़ाई की और अपनी 11 वीं की परीक्षा बहुत ही अच्छे नंबर से पास की.

फिर गर्मियों की छुट्टी में मेरा जयपुर घूमने का मन हुआ.. तो मैंने अपनी मम्मी और पापा से अनुमति माँगी, उन्होंने भी मुझे झट से हाँ कह दी.

पापा ने बताया कि बेटा जयपुर में तो अपना पड़ोसी बॉबी यादव भी रहता है.
मैंने कहा- पापा ये तो मुझे भी पता है बॉबी भैया जयपुर में रहते हैं लेकिन ये नहीं पता कि वो जयपुर में कहाँ रहते हैं. मतलब मेरे पास बॉबी भैया का पता नहीं है.
पापा बोले- पते का क्या है, मैं अभी ले लेता हूँ.

ये कहकर वो चले गए और कुछ देर बाद उन्होंने मुझे बॉबी भैया का पता और मोबाइल नंबर लाकर दे दिया.

मैंने अपनी तैयारी की और ट्रेवल एजेंसी में एक सीट बुक करा कर सुबह की बस से मैं जयपुर निकल गया. जैसे ही मेरी और बॉबी भैया की नज़र मुझ पर पड़ी, तो वो खाना छोड़कर मुझे गले मिले और उन दोनों ने मेरा खूब स्वागत सत्कार किया.

उसके बाद 3 से 4 दिन तक उन्होंने मुझे पूरा जयपुर घुमाया. भाभी का नेचर मुझे कुछ अटपटा सा लगा क्योंकि वो भैया से लड़ाई सी लड़ती रहती थीं.. तो मुझे ये महसूस होने लगा कि शायद भाभी कहीं मेरी वजह से तो भैया से नहीं लड़ रही हैं.

चौथे दिन मैंने अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया तो भैया ने मुझसे पूछा- वीशु तू अभी ये क्या कर रहा है?
मैंने भाभी के सामने ही भैया से कहा- भैया मैं नहीं चाहता कि आप और भाभी में मेरी वजह से लड़ाई या झगड़ा हो इसलिए मैं अपने घर जाना चाहता हूँ.
भाभी ने कहा- नहीं देवर जी, ऐसी कोई बात नहीं है, ये बात मैं भगवान के मन्दिर के सामने कसम खाकर कह रही हूँ. आपके साथ तो हमारे ये दिन कैसे हँसते हँसते गुजर गए, पता ही नहीं चला इसलिए प्लीज आप न जाओ और अगर आपका पढ़ाई का या किसी और काम का नुकसान हो रहा हो तो मैं आपको रोकूँगी भी नहीं.

ये बात भाभी ने भैया के सामने ही कही तो मैंने कहा कि नहीं भाभी मेरे एग्जाम भी खत्म हो चुके हैं और मेरा पढ़ाई के अलावा कोई काम इम्पोर्टेन्ट नहीं है.
भैया बोले- फिर तो जब तक तेरा कॉलेज नहीं खुलता तब तक तू हमारे साथ ही रहेगा ओके.

मुझे भी भैया के सामने अपने घुटने टेकने पड़े और भाभी ने खुद मेरा बैग मुझसे लिया और वादा लिया कि कभी आप ये कभी नहीं महसूस करोगे कि हम दोनों ही आपके बारे में ऐसी कोई बात रखते हैं. साथ साथ मुझसे भी वादा किया कि वो दोनों भी मेरे सामने कभी नहीं लड़ेंगे.

हालांकि उस समय मैं सेक्स के बारे में कुछ ज्यादा नहीं जानता था और न ही मेरे मन में काया भाभी के लिए कुछ गलत था, पर मेरा लंड जब कभी खड़ा जरूर हो जाता था.

भैया रोज सुबह 8 बजे ऑफिस के लिए घर से निकल जाते थे, शाम को 8 बजे के बाद ही आते थे. भैया एक कंपनी में मार्केटिंग जॉब करते थे जिस कारण से उन्हें कभी कभी जयपुर से बाहर भी जाना पड़ता था.

रोजाना भाभी एक अजीब सी उदासी लिए रहती थीं, जिसे मैं उनके साथ हँसी मजाक करके दूर करने की कोशिश में लगा रहता था. भाभी कभी कभी सिर्फ मुस्करा देतीं लेकिन अधिकांशतः उनके चाँद से मुखड़े पर उदासी ही छाई रहती थी.
मैंने भैया के ऑफिस जाने के बाद सही मौका देखकर अनायास ही काया भाभी से पूछ लिया कि भाभी आखिर ऐसी क्या बात है जो आप इतनी उदास रहती हो?

काया भाभी मेरी बात को टाल गईं, तो मैंने ज्यादा जोर देना उचित नहीं समझा और मैं नहाने चला गया.

हाँ दोस्तो, मैं आपको यह बात बताना भूल ही गया कि मैं उस समय पट्टे के कपड़े का सिला हुआ नाड़े वाला अंडरवियर पहनता था लेकिन आज की तारीख मैं कैसा भी कोई अंडरवियर नहीं पहनता हूँ.

उस दिन मैं नहाने से पहले अपना तौलिया रखना भूल गया और नहाने के बाद मैंने भाभी से तौलिया माँगा. इस वक्त मेरा अंडरवियर भीगा होने के कारण उसमें से मेरा लंड साफ साफ दिख रहा था क्योंकि वो मेरे लंड से चिपका हुआ था.

तौलिया देते समय काया भाभी ने मेरा लंड देख लिया, जो सिकुड़ा हुआ भी लम्बा सा दिख रहा था और मोटा भी था.
मेरे लंड को देखकर काया भाभी की आँखों में चमक आ गई. उस समय के बाद काया भाभी का नेचर एकदम से बदल गया मतलब उनका उदास चेहरा खिल सा उठा.

मैं मूर्ख फिर भी नहीं समझ पाया कि आखिर काया भाभी की उदासी अचानक से कैसे दूर हो गई. मैं यही समझता था कि शायद मैं काया भाभी को किचन में या घर के काम में हेल्प करता हूँ इसलिए काया भाभी खुश रहती हैं.

खैर एक दिन दोपहर के समय गर्मी अधिक होने की वजह से मैं अपने बिस्तर पर जैसे ही लेटा, वैसे ही लाइट चली गई तो भाभी मेरे पास आ गईं और मुझसे बात करने लगीं.
उनका ध्यान मेरे लंड पर ही था और बातों बातों में उन्होंने मुझसे पूछा- वीशु एक बात मुझे बताओ कि तुम आगे भविष्य में क्या बनना चाहते हो?

मैंने बताया कि भाभी मैं एक डॉक्टर बनना चाहता हूँ लेकिन मेरी बायोलॉजी बहुत कमजोर है. आपने तो जूलॉजी में एमएससी किया है, तो क्या आप मुझे बायोलॉजी पढ़ाओगी?
भाभी ने झट से कह दिया कि हाँ हाँ क्यों नहीं.. लेकिन तुम्हें मुझे फीस देनी पड़ेगी.
मैंने कहा कि भाभी मैं इस समय तो कुछ भी कमाता हूँ नहीं, तो मैं आपको फीस कैसे दूँगा? लेकिन मैं आपसे यह वादा जरूर करता हूँ कि जब भी मैं कमाऊँगा, उस दिन मैं आपकी फीस जरूर दूँगा, ये मेरा वादा है आपसे. बस कैसे भी करके आप मेरी बायोलॉजी मजबूत करवा दीजिये, तो मैं आपका यह एहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूँगा.

भाभी ने मुझे बायोलॉजी पढ़ाना शुरू कर दिया. उस दिन भाभी जब मुझे बायोलॉजी पढ़ा रही थीं, तो एक चैप्टर था रिप्रोडक्शन.. जो मेरी समझ में नहीं आ रहा था. मैंने भाभी से कहा कि भाभी मुझे यह चैप्टर समझ नहीं आ रहा है.

पहले तो भाभी थोड़ी हिचकिचाईं.. फिर थोड़ा संभल कर उन्होंने मुझे पढ़ाना शुरू किया कि रिप्रोडक्शन का हिन्दी में अर्थ होता है प्रजनन.
मैंने भाभी से पूछा- ये प्रजनन क्या होता है?
भाभी ने बताया कि हर जीव में एक प्राकृतिक गुण होता है कि वो अपने परिवार को बढ़ाने हेतु जनन क्रिया करे ताकि वो अपने बच्चे पैदा करके अपने परिवार को बढ़ा सके.
मैंने बड़ी ही मासूमियत से पूछा कि भाभी यह सब कैसे होता है?
भाभी मेरी तरफ आँखें तानते हुए बोलीं कि अच्छा तो तू यह सीखना चाहता है?
मैंने कहा- हाँ..

तो बोलीं- ओके सबसे पहले मुझे यह बता कि तेरी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?
मैंने मना कर दिया- नहीं भाभी, मेरी अभी तक कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है.
भाभी ने मुझसे कहा- तेरे जैसी उम्र में तो अब तक गर्लफ्रेंड बन जानी चाहिए. खैर अगर तुझे जनन क्रिया सीखनी है तो मैं जैसे जैसे कहूँ, वैसे ही करेगा.

मैंने हाँ में सर हिला दिया, तभी लाइट आ गई तो भाभी बोलीं- चल यहाँ गर्मी बहुत है.. कूलर में बैठ कर समझाती हूँ. मैं भाभी के साथ झट से कूलर वाले कमरे में चला गया चूंकि उस कमरे में गर्मी होने के कारण मैं सिर्फ अंडरवियर और बनियान में ही था. जबकि इस कमरे में कूलर की ठंडक के कारण यहाँ ठंडा था.

भाभी ने जनन क्रिया समझाने से पहले मेरा लंड अंडरवियर के ऊपर से ही पकड़ लिया और उसे सहलाने लगीं.

मैंने भाभी से कहा- भाभी ये आप क्या कर रही हो?
भाभी बोलीं- मैं तुझे जनन क्रिया सिखा रही हूँ.

मैं शांत हो गया. उनके मेरे लंड पर हाथ लगते ही मेरे लंड में तनाव आने लगा और मेरा लंड अंडरवियर से बाहर झाँकने लगा. तभी भाभी ने नीचे से अपना हाथ मेरे अंडरवियर में डाल दिया और मेरे लंड को बाहर खींच कर सहलाने लगीं.

अब तक मेरा लंड एकदम से तन गया, जिसे देख कर भाभी ने कहा- अरे बाप रे ये तेरा तो बहुत बड़ा और मोटा लंड है और मुझे दिखाते हुए बताया कि इसे लंड, शिश्न, लौड़ा आदि नामों से जानते हैं और जब ये योनि में घुसकर धक्के लगाता है, तो इसमें से एक सफ़ेद गाड़ा सा पदार्थ निकलता है, जिसे वीर्य कहते हैं. जब वीर्य योनि में जब गिरता है तो बच्चा पैदा होता है.. और इस सारे घटनाक्रम को जनन क्रिया कहते हैं.
मैंने पूछा- भाभी ये योनि क्या होती है और वीर्य कैसे निकलता है?
भाभी ने कहा- दो मिनट रुक मैं तुझे अभी समझाती हूँ.

मैंने भी ओके कहा तो भाभी ने सबसे पहले अपनी साड़ी उतारी फिर अपना ब्लाउज खोला, उसके बाद भाभी ने पीछे की तरफ हाथ बढ़ाकर अपनी ब्रा का हुक खोल दिया, जिससे उनके दोनों दूध उछलकर बाहर आ गए. भाभी के दूध ऐसे तने हुए बड़े बड़े और गोल गोल थे, जैसे वो कोई शादीशुदा न होकर एक कुँवारी लड़की हों.

भाभी ने मेरा हाथ पकड़कर अपने दूध पर रख दिया और उसे दबाने के लिए बोला तो मैं उनके दूध को धीरे धीरे दबाने लगा, जिससे मुझे बहुत मजा आ रहा था.
भाभी ने कहा- वीशु दूध पीएगा?

मैंने झट से हाँ कह दी तो भाभी ने तुरंत ही अपने हाथ से मेरे सर को पकड़ा और अपने एक दूध पर लगा दिया. मैं एक छोटे बच्चे की तरह भाभी का एक दूध पीने लगा लेकिन उनके दूध में दूध नहीं था. मैंने भाभी से कहा- भाभी आपकी छाती में दूध तो है ही नहीं?
वो बोलीं- बुद्धूराम जब तक मैं माँ नहीं बनूंगी तब तक मेरी छाती में दूध कैसे आएगा? अगर तुझे मेरी छाती का दूध पीना है तो मुझे माँ बना.
मैंने कहा कि भाभी मैं आपको कैसे माँ बनाऊँ? मुझे नहीं आता.

भाभी बोलीं- तेरे भैया में तो दम ही नहीं है क्योंकि उसका लंड तो खड़ा ही नहीं होता है. जब उसका लंड खड़ा होकर मेरी चूत में घुसेगा नहीं.. तो मैं कैसे तेरे भैया के बच्चे की मैं कैसे माँ बन सकती हूँ?
मैंने भाभी से पूछा- भाभी चूत कैसी होती है?
भाभी एकदम जोर जोर से हँसने लगीं- कमाल है तू चूत नहीं जानता मतलब तूने अभी तक चूत नहीं देखी?
मैंने कहा- नहीं.
भाभी ने तुरंत अपने दूध को मेरे मुँह से निकाला और खड़ी हो कर मुझे फिर से पूछने लगीं- क्या वाकयी तूने अभी तक कोई भी चूत नहीं देखी?
मैंने कहा- नहीं भाभी अभी तक नहीं देखी.
भाभी बोलीं- रुक मैं तुझे अपनी चूत दिखाती हूँ ओके..

ये कहकर उन्होंने अपने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपना पेटीकोट उतार दिया. दूध जैसी गोरी भाभी सिर्फ काले रंग की चड्डी में बहुत मस्त लग रही थीं. इधर भाभी ने मेरी बनियान और अंडरवियर उतार कर मुझे भी एकदम नंगा कर दिया. फिर भाभी ने भी अपनी काली चड्डी उतार दी और एकदम नंगी हो गईं. मैंने देखा कि भाभी की चूत एकदम छोटी और चिकनी थी.

उन्होंने मुझको बैठाया और मेरे सामने खड़ी होकर अपनी दो उंगलियों से अपनी चूत को खोलकर कहा- ले देख.. ऐसी होती है चूत और चूत में दो छेद होते हैं.

लेकिन मुझे एक भी छेद नज़र नहीं आ रहा था.. तो मैंने भाभी से कहा- भाभी इसमें तो कोई छेद नहीं है?
भाभी बोलीं- पगले जब इसमें अभी तक कोई लंड घुसा ही नहीं.. तो छेद कहाँ दिखाई देगा.

उन्होंने एक एक करके दोनों छेद दिखाए जिसमें ऊपर वाला छेद मूतने के लिए बताया कि इस वाले छेद से मूत निकलता है और नीचे वाले छेद में लंड घुसेड़ा जाता है. तब लंड के बीज से बच्चा बनता है, जो इसी छेद से बाहर निकलता है.

मैंने भाभी से पूछा- भाभी आपकी चूत का छेद तो बहुत छोटा है, इसमें मेरा इतना बड़ा और मोटा लंड कैसे घुसेगा?
भाभी बोलीं- सब घुस जाएगा लेकिन मुझे दर्द बहुत होगा. जब तू अपना लंड मेरी चूत में डालेगा तो तू मुझ पर जरा सा भी रहम मत करना, चाहे मैं दर्द से कितनी भी चीखूँ चिल्लाऊं मतलब तू अपना लंड मेरी चूत में डालते समय तू रुकेगा नहीं और जब तक तेरा पूरा लंड मेरी चूत में घुस नहीं जाए, तब ही रुकना ओके.
मैंने भी हाँ में सर हिला दिया.
भाभी बोलीं- अब सर ही हिलाता रहेगा या अब मुझे गरम भी करेगा?
मैंने भाभी से कहा- मुझे नहीं आता आप ही बताओ?

भाभी ने अपना माथा पकड़ लिया और बोली कि मैं किस अनाड़ी के चक्कर में पड़ गई?
मैं उनकी तरफ चूतियों सा मुँह बाए खड़ा था.
फिर भाभी बोलीं- मेरे पूरे बदन पर किस कर और मेरे दूध को दबा दबा कर पी, फिर मेरी चूत चाट.. तब मैं गरम होऊंगी.. अब आया समझ में बुद्धूराम? इसलिए अब शुरू हो जा.

मैं फिर वैसे ही करने लगा जैसे जैसे मुझे भाभी बताती गईं. उसके बाद भाभी ने मुझे 69 पोजीशन भी समझाई कि 69 की पोजीशन क्या होती है वगैरह वगैरह.

फिर भाभी सीधी लेट गई. उन्होंने अपनी दोनों टांगें फैला लीं और घुटने मोड़ लिए. अब भाभी ने मुझे अपनी चूत में लंड डालने के लिए कहा तो मैं भी उनकी चूत के सामने आ गया और चूत को गौर से देखने लगा.

भाभी ने मुझे डाँटते हुए कहा- क्या देख रहा है.. मेरी चूत में अपना लंड डाल ना.
मैंने भाभी की चूत पर अपना लंड रखा और जोर का धक्का पूरी ताकत से लगाया लेकिन मेरा लंड थोड़ा सा फिसल गया. ऐसा ही मैंने दुबारा करने की कोशिश की लेकिन फिर से वही पोजीशन रही.

इस बार भाभी ने कहा कि एक काम कर मेरे दोनों दूध पकड़ कर मेरे होंठ चूस और ला, तेरा लंड मैं पकड़कर अपनी चूत के छेद पर लगाती हूँ. तू बस जोर से धक्का मारना ओके.

जैसे ही भाभी ने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़कर अपनी चूत के छेद पर रखा, तभी मैंने जोरदार धक्का पूरी ताकत के साथ लगा दिया, जिससे मेरे लंड का सुपाड़ा भाभी की चूत में 3 इंच तक घुस गया.
इधर भाभी की जोरदार चीख निकल गई- आssह मsssर गईईई रेss

भाभी के चिल्लाने से मैं एकदम डर गया तो मैं एकदम रुक गया और मैंने अपना लंड भाभी की चूत से बाहर निकाल लिया. जैसे ही मैंने अपना लंड भाभी की चूत से बाहर निकाला तो मेरे लंड के साथ भाभी की चूत से खून भी निकला. भाभी एकदम मेरे ऊपर भभकते कोयले की तरह बरस पड़ीं और बोलीं- भोसड़ी के… मैंने मना किया था कि तू अपना लंड किसी भी स्थिति में बाहर नहीं निकालना. किसी तरह का कोई भी रहम मत करना.. चाहे मैं कितना भी चीखूँ या चिल्लाऊं.. और तूने ऊपर से अपना लंड मेरी चूत से निकाल लिया.

मैंने सिर्फ इतना ही कहकर सॉरी बोला- ओके भाभी अब इस बार ध्यान रखूँगा.
इस बार चूत पर अपना लंड सैट करके फिर से मैंने एक जोरदार धक्का लगा दिया, जिससे मेरा लंड 3 इंच तक घुस गया.

भाभी को काफी दर्द हो रहा था, इसलिए मेरे रुकने से पहले ही भाभी कराहते हुए बोलीं- अब यहीं रूक कर धीरे धीरे अपने लंड को मेरी चूत में अन्दर बाहर कर.

मैंने वैसा ही किया और इधर मैं लगातार भाभी के दूध चूस रहा था, जिससे भाभी को दर्द में थोड़ी सी राहत मिली.

तभी मैंने अपना लंड भाभी की चूत से बाहर निकाले बिना पूरा बाहर खींच लिया और फिर दोगुनी ताकत से दूसरा जोरदार धक्का लगा दिया.. जिससे मेरा लंड भाभी की चूत में लगभग 5 इंच तक घुस गया. भाभी की फिर से एक जोरदार चीख निकल गई और भाभी की दर्द के कारण दोनों आँखें ही बाहर को आ गई थीं.

लेकिन पिछली बार की डाँट की वजह से मैंने इस बार भाभी पर कोई भी रहम नहीं किया और ताबड़तोड़ 2 जोरदार धक्के पूरी ताकत के साथ लगा दिये. मेरा लंड भाभी की चूत में जड़ तक घुस गया.

भाभी को अत्याधिक पीड़ा हो रही थी तो भाभी ने मुझे थोड़ा रुकने को कहा तो मैं थोड़ी देर के लिए रुक गया.
फिर भाभी ने मुझसे कहा- वीशु अब धीरे धीरे धक्का मार..

मैं धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. कुछ देर बाद भाभी का दर्द मजा में बदलने लगा और वो नीचे से अपनी कमर ऊपर नीचे करने लगीं और मुझसे धक्कों की स्पीड बढ़ाने को कहा. मैंने भी अपने धक्कों की स्पीड को धीरे धीरे बढ़ाना शुरू कर दिया और कुछ देर बाद भाभी चिल्लाते हुए बोलीं- और तेज और तेज..

मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी और मैं भाभी को शताब्दी एक्सप्रेस की स्पीड से पेलने लगा. भाभी ने जैसे जैसे बताया मैंने उसी तरह से अपना लंड भाभी की चूत से निकाले बिना करीब 15 मिनट तक चोदा.

उसके बाद मैंने भाभी से पूछा कि भाभी अपना लंड आपकी चूत से बाहर निकाल लूँ या नहीं.. क्योंकि मुझे बहुत तेज सूसू आने वाली है.
भाभी बोली- नहीं लंड नहीं निकालना और सूसू अन्दर ही कर ले.. रुक मत धक्के मारता रह.

मैंने कुछ देर और धक्के लगाये तभी मुझे कुछ ऐसा महसूस हुआ कि मेरे लंड से कुछ गाढ़ा गाढ़ा सा निकल रहा है. अब मैं रुक गया और धड़ाम से भाभी के ऊपर ही गिर गया.
भाभी ने मुझे कस कर पकड़ लिया और मुझे बेतहाशा चूमने लगीं.

उसके बाद मैंने भैया के आने तक भाभी को 3 बार चोदा. भाभी ने मुझे समझाया कि कभी भी चुदाई के समय लड़की या औरत पर रहम नहीं करना चाहिए अगर तुमने उस पर रहम करते हुए अपना लंड उसकी चूत से निकाल लिया, तो वो तुमसे कभी नहीं चुदवायेगी. इसलिए चुदाई के दौरान कैसा भी कोई रहम नहीं होना चाहिए ओके. हाँ जब तुम्हारा लंड लड़की या औरत की चूत या गांड में पूरा घुस जाए, तब थोड़ा रुकना चाहिए लेकिन लंड फिर भी बाहर मत निकालना ओके.

मैंने हाँ में अपना सर हिलाया तो भाभी ने कहा- वीशु तूने मुझे आज असली औरत अब बनाया है.. तू बेशक अनाड़ी था, लेकिन तेरे लंड में बहुत दम है. तूने मेरी सारी प्यास बुझा दी.
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