Wednesday, February 28, 2018

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बस के सफर से बिस्तर तक-4

बस के सफर से बिस्तर तक-4

(Bus Ke Safar Se Bistar Tak- Part 4)

“उफ्फ्फ… महेश्शश… इईईई… श्श्श्शशश… अआआ… ह्ह्ह्हह… इईईई… श्श्श्शश… अआआ… ह्ह्ह्हहह…” कहते हुए वो जोरो से अपनी चुत को मेरे मुँह पर घिस रही थी।
शायद ममता जी स्खलित होने की कगार पर पहुँच गयी थी… मजा तो मुझे भी बहुत‌ आ रहा था मगर मैं सोचने लगा की कहीं… ‘ममता जी एक बार स्खलित होने के बाद मुझे दोबारा से अपने आप को‌ हाथ लगाने से मना‌ तो नहीं करने लगेगी? अगर मना नहीं करेंगी तो वो नखरे तो जरूर ही दिखायेंगी और मुझे उन्हें मनाने के लिये फिर से मेहनत करनी पड़ेगी.”

यह बात मेरे दिमाग में आते ही मैं उनकी चुत को‌ छोड़ कर अलग हो गया और सीधा उनके ऊपर चढ़ कर लेट गया।< ‌मेरे ऐसा करने पर ममता ‌जी थोड़ा खीज सी‌ गयी और कसमसाते हुए मुझे अपने ऊपर से धकेलने लगी मगर मैंने उन्हें पकड़े रखा और फिर से उनके होंठों को चूमने लगा। ममता जी‌ की‌ जाँघें फैली हुई थी और मेरा लंड सीधा उनकी सुलगती हुई चुत को ही छू रहा था. मुझसे अब रहा नहीं गया... मैंने अब देरी ना करते हुए एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर पहले तो उनकी चुत के मुहाने पर लगा कर एक बार हल्का सा घिसा और फिर एक जोर का धक्का लगा दिया. मगर ये क्या मेरा लंड फिसल गया और धक्का उनकी चूत के दाने पे लगा। "ओयीईई... अआआ...ह्ह्ह्ह..." ममता जी ने कराहते हुए कहा। मैंने फिर से अपने लंड को ठीक जगह पे रख कर अबकी बार और सख्ती से धक्का दिया जिससे मेरे लंड का सुपाड़ा चूत के दरवाज़े में घुस गया और ममता जी "अआआ... ह्हहहह आउच... श्श्श्शश..." करके इतनी जोर से चीख‌ पड़ी कि अगर ड्राईंगरूम का दरवाजा बंद नहीं होता तो शायद ममता जी की चीख पड़ोसियों तक को सुनाई पड़ जाती। ममता जी की चीख से मैं डर गया कि कहीं घरवाले ना जाग जायें इसलिये मैंने जल्दी से ममता जी के मुँह को दबा लिया और कुछ देर के लिये वहीं की वहीं बिल्कुल थम गया। ममता जी की चूत बहुत कसी हुई लग रही थी, मैं तो सोच रहा था कि ममता जी की चुत ने अब तक काफी बार लण्ड खाये होंगे और सब कुछ आसानी से हो जायेगा! मगर वैसा लग नहीं रहा था। मैं भी अब सचेत हो गया और सोचने लगा कि कहीं ममता जी के चीखने से हमारा भाण्डा न फूट जाए, इसलिये मैंने अब प्यार से काम लेना ही उचित समझा। मैंने अब थोड़ा सा रुक कर एक हल्का सा धक्का दिया, इस बार मेरा सुपारा थोड़ा और अन्दर गया और ममता जी ने "उह्ह्ह... हूहूहू... ऊऊऊ..." करके जोर की सांस ले कर अपने शरीर को कड़ा कर लिया। उनकी चूत की दीवारों में मेरे लंड का सुपारा फँस सा गया था इसलिये मैंने अब थोड़ा जोर का झटका देने का सोचा। मैंने अपनी सांस रोकी और एक जोरदार धक्का उनकी चूत पर दे मारा। इस बार मैंने ममता जी के मुँह को एक हाथ से दबा रखा था इसलिये वो चिल्ला तो नहीं पाई मगर "उऊऊऊ... हूहूहूहू... ऊऊऊऊ... ऊऊऊऊ..." कह कर जोर से छटपटाने लगी।

 ममता जी की छटपटाहट से मैं चकित सा हो गया मगर तभी मुझे मेरे लंड के पास व जिस हाथ से मैंने अपने लंड को पकड़े हुए था उस पर कुछ गर्म‌ गर्म‌ से द्रव का अहसास हुआ, मैंने ठीक ‌से हाथ लगा कर देखा तो मेरी हैरानी की कोई सीमा‌ नहीं रही... क्योंकि मेरा आधा लंड ममता जी की चूत में समाया हुआ था और उनकी चुत से खून की धार बाहर निकल रही‌ थी जिसका गर्म अहसास मुझे अपने लंड व जांघों के पास भी हो रहा था. "ओह... ये तो बिल्कुल कुंवारी हैं, इसलिये ही ये इतना भाव खा रही थी." मैंने अपने मन में सोचा. मैं तो सोच रहा था कि ममता जी‌ की‌ इतनी उम्र हो गयी है इसलिये अभी तक उनका किसी ना किसी लड़के के साथ तो चक्कर रहा ही होगा मगर वो तो अभी तक बिल्कुल कुवाँरी ही थी, मेरी हैरानी की कोई सीमा नहीं थी। खैर मुझे मन‌ ही मन में काफी खुशी भी हो रही थी कि आज मुझे एक‌ और कुंवारी लड़की के कौमार्य को भंग करने का सौभाग्य मिल‌ रहा था। मेरा आधा लण्ड तो ममता जी की चुत में समा ही चुका था, बस अब किला फ़तेह करना ही बाकी था, ममता जी की चुत का किला फतेह करने के लिये मैंने सांस रोक कर एक जबरदस्त धक्का मारा जिससे मेरा आधे से ज्यादा लंड ममता जी की कुँवारी कोमल व चिकनी मुनिया को चीरता हुआ अन्दर घुस गया और ममता जी "उऊऊ... हूहूहूऊऊऊ... उँऊँगू गूँगूँ... उँऊँ गगूँगूँ... उँऊँगगूँगूँ..." करके छटपटाते हुए दोनों हाथों से मेरी पीठ पर घूंसे बरसाने लगी। मैं तड़प उठा... लेकिन बिना रुके अपना लंड पूरा बाहर खींच कर एक और जोर का झटका लगा दिया. इस बार लगभग मेरा पूरा लंड उनकी चूत में उतर गया और फिर से ममता जी के मुँह से एक घुटी घुटी चीख निकल गयी. ममता जी ने दोनों हाथों से मेरी‌ कमर को पकड़ लिया और असहनीय पीड़ा से छटपटाने लगी. मैं अब कुछ देर रुक ‌गया और उन्हें पुचकारते हुए कहा- बस, जो होना था वो हो चुका है, अब तुम्हें तकलीफ नहीं होगी। ममता जी को तसल्ली ‌देने के लिये मैंने उनकी एक चूची को भी अपने मुँह में भर लिया ‌और धीरे धीरे उसे चुभलाना शुरू कर दिया, साथ ही‌ दूसरी चूची को अपने हाथ से हल्के हल्के दबाने भी लगा। मुझे पता था कि किसी कुवाँरी लड़की की चूत में लंड अटक जाए और उसे दर्द देने लगे तो उसका ध्यान उसकी चूचियों को चूस कर कैसे बाँटना चाहिए ताकि वो अपना दर्द भूल जाए। अभी तक कुँवारी लड़कियों के साथ के मेरे तजुर्बे को ध्यान में रख कर मैंने ममता जी को प्यार से सहलाते हुए उलझाये रखा और धीरे धीरे अपने लंड को उनकी चुत के अन्दर रखते हुए धीरे धीरे रगड़ता भी रहा। कुछ देर‌ तक‌ तो ममता जी बिलखती रही और फिर धीरे धीरे शांत होने लगी। ममता जी जब कुछ शाँत सी हो गयी तो मैंने उनके मुँह पर से अपना हाथ हटा लिया, मेरे हाथ हटाते ही ममता जी कुछ बोलने को हुई, ममता जी मुझ पर बहुत गुस्सा थी, शायद वो कुछ कहना चाह रही थी मगर तब तक मैंने अपने होंठों से उनका मुँह बन्द कर दिया और वो बस "उऊऊ... उउऊऊऊ... उँगूँगूँगूँ.. उँगूँगूँगूँ.." करके रह गयी। अपने होंठों को छुड़ाने के लिये ममता जी ने चेहरा भी घुमाने की कोशिश की मगर मैंने हाथ से उनके सिर को पकड़ लिया और उनके होंठों का रसपान करता रहा। एक लम्बे चुम्बन के बाद मैंने जब उनके होंठों ‌को छोड़ा तो ममता जी "ओय... छोड़ मुझे... छोड़... महेश, छोड़ मुझे... अब बस्स... मुझे नहीं करना..." कहते हुए मुझे हटाने के लिये मेरी छाती पर धक्के मारने लगी, लेकिन मैंने उन्हें छोड़ा नहीं बल्कि उनके दोनों हाथों को बिस्तर के साथ लगा कर पकड़ लिया और फिर से उनके गालों को चूमने लगा। मैं अब फिर से ममता जी के होंठों पर आ गया और उन्हें प्यार से चूसने लगा, साथ ही साथ मैंने अपने लंड को बिल्कुल धीरे धीरे उनकी चूत में वैसे ही फंसा कर आगे पीछे करना शुरू कर दिया। चूत को मैंने चाट चाट कर भरपूर गीला कर दिया था और साथ ही उनकी चूत ने पानी छोड़ कर चिकनाई और भी बढ़ा दी थी लेकिन इतनी चिकनाई के बावजूद भी मेरा लंड ममता जी की चुत में ऐसे फंस गया था जैसे बिना तेल लगे बालों में कंघी फंस जाती है। मैंने अपनी कोशिश जारी रखी और लंड से उनकी चूत को रगड़ता रहा जिससे ममता जी 'उँहूँहूँहूँ... उँऊँऊँ... उँऊँऊँ... उँगूँगूँगूँ...' करके कसमसाती रही. मगर ममता जी ने भी बस कुछ देर तक ही मेरा विरोध किया और फिर वो भी हल्के हल्के मेरे होंठों को दबाने लगी। शायद उन्हें भी अब मजा आने लगा था इसलिये उन्होंने अपने बदन को भी ढीला छोड़ दिया था। मैंने भी अब उनके हाथों को छोड़ दिया और एक हाथ से उनकी चूचियों को मसलना शुरू कर दिया। ममता जी को भी अब मजा आ रहा था इसलिये उनके हाथ आजाद होते ही मेरी पीठ पर आ गये और धीरे धीरे मेरी पीठ पर रेंगने लगे। ममता जी भी अब अपने दर्द को भूल कर चूचियों की मसलाई और चूत में लंड की रगड़ का मजा लेने लगी थी। मैंने भी महसूस किया कि अब उनकी चूत ने अपना मुँह खोलना शुरू कर दिया है और धीरे धीरे उनके कूल्हे भी नीचे से हल्की हल्की हरकत सी करने लगे हैं। मुझे अब समझते देर नहीं लगी कि ममता जी अब फिर से उत्तेजित हो गयी है इसलिये मैं अब उसी अवस्था में अपने लंड को बाहर निकल कर धक्के मारने लगा। मैंने अपनी गति धीमी ही रखी थी ताकि उन्हें दुबारा दर्द का एहसास न हो। मैं मंद गति से चोद रहा था और वो मेरे पीठ पर अपने हाथ फेर रही थी। मैं धीरे धीरे धक्के लगाते हुए उनके गोरे गालों पर चुम्बनों की बरसात सी कर रहा था, ममता जी भी अब मेरे चुम्बनों का जवाब देने लगी थी और मेरी पीठ के चारों तरफ अपने हाथों का घेरा बना कर मुझसे लिपटती जा रही थी। ममता जी अब जोश में आती जा रही थी, उनके मुँह से कराहों के साथ हल्की हल्की सिसकारियाँ फूटनी शुरु‌ हो गयी थी और साथ ही उनकी कमर की‌ हरकत भी तेज हो गयी‌ थी। मैंने भी अब धीरे धीरे अपने धक्कों का माप व गति को थोड़ा बढ़ा दिया जिससे ममता जी जोर से "अआआ.. ह्हह... इईई... श्श्शशश... अआआ.. ह्हह... अ.अ.ओय... इईई... श्श्शशश... अआआ.. ह्हह... इईई... श्श्शशश... अआआ.. ह्हह..." की आवाज करने लगी। ममता जी भी अब अपने कूल्हों को उचका उचका कर मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैं भी अब पूरे जोश में आ गया और अपने कमर से ऊपर के भाग को ऊपर उठा कर धक्के लगाने लगा जिससे ममता जी और भी जोर से "अआआ.. ह्हह... इईई... श्श्शशश... अआआ.. ह्हह... अओय... इईई... श्श्शश... अआआ.. ह्हह... इईई... श्श्शशश... अआआ..." की अवाज करने लगी। मैंने ममता जी की चूचियों को अब भी थाम रखा था और उन्हें मसलते हुए तेजी से धक्के लगा रहा था। ममता जी ने भी अब अपने पैरों को उठा कर मेरी कमर में फँसा लिया और तेजी से अपने कूल्हे उचका उचका कर धक्के लगाने लगी। अब तो मेरा जोश दोगुना हो गया और मैं भी उत्तेजना में उनकी चूचियों को बेदर्दी से मसलते हुए अपनी पूरी ताकत व तेजी से धक्के लगाने लगा जिससे ममता जी जोरो से "अआआ..ह्हह... इईई... श्श्शशश... अआआ.. ह्हह... अआआ.. ह्हह... इईई... श्श्शशश... अआआ.. ह्हह..." की आवाजे निकालने हुए चीखने लगी। मुझे अब डर लगने लगा था कि ममता जी की आवाज कहीं घर वाले सुन ना लें इसलिये मैंने आगे बढ़ कर ममता जी के होंठों को अपने मुँह में भर कर बन्द कर दिया मगर वो अब भी उऊँऊँ... ह्हहँ... ह्हह... उऊँऊ ह्हहँ... उऊँऊँ ह्हह... हुँअ.. की आवाज करती रही थी। मैं अपनी पूरी ताकत व तेजी से धक्के लगा रहा था और मेरे हर धक्के के साथ ममता जी उऊम्म ह्हह... उऊँऊँ ह्हहँ... उऊँओ ह्हह... उऊऊह्ह... हुँअ.. करके अपनी कमर को उचका रही थी। हम दोनों का ही वक़्त करीब आ चुका था और हम दोनों ही अपनी पूरी ताक़त से एक दूसरे को चोद रहे थे। मैं ऊपर से और ममता जी नीचे से धक्के लगा कर मज़े ले रही थी। हम दोनों की ही सांसें उखड़ गयी थी और पसीने से बदन भीग गये थे. तभी ममता जी के मुँह से गुर्राने जैसे आवाज़ निकलनी शुरू की और वो तेज़ी से हिलने लगी "उऊऊ.. गुऊंन्न... गुण... उऊँऊँ.ह्हहँ... उऊँऊँ ह्हहँ... उऊऊ... गुऊंन्न... गुण... उऊऊँ ह्हह... उऊँऊँ ह्हहँ..." फिर तभी ममता दीदी ने मुझे जोर से भींच लिया और शांत पड़ गई... उनकी चूत ने ढेर सारा पानी छोड़ दिया जो ममता ‌की जांघों के साथ साथ मेरे लंड व मेरी जांघों पर भी फ़ैल गया। ममता जी अब थोड़ी सी निढाल हो गई थी इसलिए उनकी पकड़ कुछ ढीली हो गयी मगर मैं अब भी अपनी उसी गति से उन्हें धक्के लगा रहा था. मैं भी अब अपनी चरम सीमा पर था, मैंने एक जोर की सांस ली और सांस रोक कर दनादन उसकी चूत के परखच्चे उड़ाने लगा, फच्च... फच्च... फ्च... फ्च्च... की आवाज़ के साथ मैंने तेज़ी से उनकी चूत में अपना लंड अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. "ओह्ह्ह... महेश्शश... बस कर... मर जाऊँगी... अब... बस्स्स... हम्म्म..." ममता जी ने अब कसमसाते हुए कहा, ममता जी इतनी देर से लंड के धक्के खा खा कर थक गई थी और झड़ने के बाद उसे लंड को झेलने में परेशानी हो रही थी। उन्होंने अपना सर बिस्तर पर रख कर अपने दोनों हाथों से बैड पर बिछी चादर को भींच लिया और अब कराहते हुए मेरे लंड के प्रहार को झेलने लगी। इसके बाद मैंने भी तीन चार ज़बरदस्त धक्के अपनी पूरी ताकत से लगा कर अपने लंड को पूरा जड़ तक ममता जी की चूत में ठेल दिया और उनके बदन को जोर से भींच कर ममता जी की चुत को अपने वीर्य से भरने लगा। ममता जी की चुत को अपने वीर्य से ऊपर तक भरने के बाद मैं भी निढाल हो कर उनके बदन पर ही लेट गया। ममता भी अब अपने दोनों हाथों को मेरी पीठ पर ला कर मुझे अपने से चिपका लिया और लम्बी लम्बी सांसें लेने लगी। हम दोनों ही अब ऐसे हांफ रहे थे मानो काफी मीलो दौड़ कर आये हों। हम दोनों उसी हालत में काफी देर तक लेटे रहे, फिर ममता जी ने धीरे से कराहते हुए मुझे उठने को कहा. मैं ममता जी पर से उठ कर उनके बगल में लेट गया और एक बार फिर से ममता जी के होंठों को चूमने लगा मगर ममता जी ने मुझे धकेल कर दूर हटा दिया और उठ कर मेरे बगल में बैठ गयी। ममता जी ने उठते ही पहले तो अपनी चुत को देखा जो खून से लथपथ थी और शायद उसमें से‌ अभी भी हम दोनों के प्रेमरस और उनकी चूत की सील टूटने की वजह से निकले खून का मिश्रण अभी भी रिस रहा था। तभी ममता जी की नजर बिस्तर पर पड़ी- हे भगवन... यह क्या किया तूने... ममता जी ने बिस्तर पर खून के धब्बे देख कर चौंकते हुए कहा और जल्दी से बिस्तर पर से उठ कर खड़ी हो गयी। बिस्तर से उठ कर ममता जी बैडशीट को उतारने‌ के लिये उसे दोनों हाथों से पकड़ कर खींचने लगी मगर मैं अभी तक‌ बिस्तर पर ही लेटा हुआ था इसलिये उनसे बैडशीट खिंच नहीं रही‌ थी। "छ छछोड़... छोड़ इसे..." ममता जी ने घबराई सी आवाज में कहा और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बिस्तर पर से उतार दिया। ममता जी ने वो बैडशीट बिस्तर से उतार कर पहले तो उस बैडशीट से ही अपनी चुत व जांघों को‌ साफ‌ किया और फिर उसको अलग से छुपा कर रख‌ दिया। मैंने एक बार फिर से ममता जी को पकड़ने की कोशिश की मगर वो बिदक गयी और मुझसे अलग हो कर जल्दी जल्दी अपने कपड़े पहनने लगी। मैंने भी अब उन्हें पकड़ने की कोशिश नहीं की बल्कि उन्हें कपड़े पहनते देखता रहा। सारे कपड़े पहनने के बाद ममता जी रजाई ओढ़ कर सो गयी। मैं भी अब बिस्तर पर आ गया और ममता जी की रजाई में घुसने लगा मगर ममता जी ने मुझे दूसरी रजाई में सोने के लिये कहा मगर मैं कहाँ मानने वाला था, कुछ देर तक तो मैं ऐसे ही पड़ा रहा और फिर धीरे से ममता जी की रजाई घुस गया. ममता जी ने भी अब मुझे ज्यादा कुछ नहीं कहा और मेरी बाँहो में बाँहे डाल कर चुपचाप सो गयी। मैंने भी अब ममता जी के साथ कुछ किया नहीं, बस ऐसे ही उन्हें अपनी बाँहो में भर कर लेट गया और फिर पता नहीं कब मुझे नींद आ गयी। 
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