Sunday, February 18, 2018

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रिश्तेदारों में चुदाई का घमासान

रिश्तेदारों में चुदाई का घमासान
(Rishtedaro Me Chudai Ka Ghamasan)
मेरा नाम राजवीर है, मेरी उम्र 19 साल है. दिखने में मैं बहुत सुंदर और अच्छे शरीर का मालिक हूँ. जो सेक्स स्टोरी मैं आप लोगों को बताने जा रहा हूँ, वो थोड़ी बड़ी है. ये एक फैमिली सेक्स स्टोरी है.

मेरे घर में मेरे मम्मी पापा और मेरे दो चाचा चाची रहते हैं और उनके बच्चे भी हैं. हम सब लोग साथ में ही रहते हैं. हम सब काफी रईस हैं.. मतलब पैसों की कोई कमी नहीं है.

इस कहानी के सभी किरदारों का पहले मैं परिचय दे देता हूं.

सबसे बड़े मेरे ताऊ मनोज, उम्र 48 साल. मेरी बड़ी ताई संगीता, उम्र 46 साल. उनके दो बच्चे, लड़का सोनू 20 साल का और 22 साल की लड़की शीतल.
मेरे छोटे ताऊ प्रेम की उम्र 45 साल है, छोटी ताई माला 43 साल की हैं, उनके भी दो बच्चे हैं. लड़का आकाश 17 साल का है, लड़की सोनिया 19 साल की है.

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अब मेरे पापा जो सबसे छोटे हैं, उनका नाम सुधीर है. उनकी उम्र 43 साल, मम्मी रचना की उम्र 42 साल की है. मेरा कोई भाई बहन नहीं है.

एक साल पहले की बात है. मेरे घर में सब नार्मल था. मेरे घर की सभी औरतें खुले विचारों की हैं. वो घर में ही एक से कपड़े पहनती हैं. शायद शारीरिक सम्बन्ध को हमारे घर में एक मनोरंजन समझा जाता था. अभी तक मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं हुई थी कि किसका किसके साथ खेल चलता है. घर में डिनर के वक्त सभी लोग शराब की चुस्कियां लेते रहते थे. मम्मी, ताई वगैरह भी ड्रिंक करती हैं. मैंने मम्मी को सिगरेट पीते भी देखा है.



एक दिन मेरी बड़ी दीदी शीतल अपने कॉलज के लिए तैयार होकर नीचे आईं. उनको देख कर मेरे होश उड़ गए. उनकी टाइट ड्रेस में उनकी चूचियां कमाल की लग रही थीं. वो आकर मेरे साथ नाश्ता करने लगीं.. फिर वो चली गईं.

रात को मैं अपने कमरे में था, मुझे बाथरूम जाने की जरूरत लगी, मैं नीचे जाने लगा. तभी मेरी नजर अपनी दीदी शीतल के कमरे की तरफ गई, उनके कमरे की लाइट जल रही थी. मैंने सोचा देखता हूँ. मैंने उनकी खिड़की से देखा, वो एक हाथ अपने लोवर में डाले थीं और एक हाथ में फ़ोन से बात कर रही थीं.
उनकी बातें मुझे साफ़ सुनाई दे रही थीं. वो फ़ोन पर बोल रही थीं और अपनी बुर को सहला रही थीं. फिर मैं बाथरूम करके अपने कमरे में आकर सो गया.

एक दिन जब मैं कॉलेज से घर पहुँचा तो सब लोग शीतल दीदी को डांट रहे थे. मुझे पता चला कि वो किसी केशधारी लड़के से प्यार करती हैं और शादी करना चाहती हैं.
थोड़ी मेरे बड़े ताऊ ने उस लड़के के माता पिता को बुलाया और उनसे बात करने लगे.

उन लोगों ने कहा कि आप अगर चाहो तो हम शादी के लिए तैयार हैं.
ताऊ जी ने कहा- पर ये कैसे हो सकता है.
वो लोग बोले- आजकल सब हो सकता है.. इसमें क्या बुरा है. हमारे घर की लड़की भी अन्य बिरादरी के परिवार में ब्याही है.
उन लोगों का खुलापन देख कर चाचा ने ‘हां’ कर दी.

सगाई के लिए पापा ने एक होटल बुक किया, जिसमें सिर्फ हमारे परिवार और उनके परिवार के लोग थे. उनका परिवार भी बहुत बड़ा था. वो लोग भी अमीर थे. उनके घर के लोगों में एक नजर डाल लेते हैं.
लड़के का नाम रवीन्द्र सिंह था, वो 22 साल का था. उसके माता पिता में पिताजी गुरप्रीत सिंह 45 साल के और माता रजनी 42 साल की थीं. उनकी एक़ लड़की भी है रूपिंदर जो 20 साल की है. उसके छोटे चाचा दिलजीत सिंह 42 साल के हैं और उनके छोटी चाची अमनदीप 40 साल की हैं. छोटे चाचा के एक ही लड़का है, कर्मजीत, वो 21 साल का है.

सगाई के दिन सब लोगों ने एक दूसरे का परिचय लिया. मैंने देखा कि मेरी बड़ी ताई संगीता और गुरप्रीत सिंह जी बातें कर रहे थे. उनकी नजरें मेरी ताई के ब्लाउज पर थीं. मेरी ताई ने एक साड़ी पहन रखी थी, उनका ब्लाउज काफी टाइट था, जिसमें उनकी चूचियाँ बाहर की तरफ आ रही थीं. सभी लोग की नजरें सभी औरतों पर थीं.

फिर तय हुआ कि एक महीने के अन्दर शादी कर दी जाए.

मेरे घर में मेहमान आने लगे. सबसे पहले मेरे बुआ फूफा आए. फूफा रामकुंवर 42 साल के बुआ रूपा 40 साल की. शीतल दीदी की मौसी और मौसा मौसी सुनीता 44 साल और मौसा पुनीत 46 साल के हैं.. सब लोग आए.

रात को सब हॉल में बातें कर रहे थे. मुझे फूफा जी नहीं नज़र आ रहे थे. तभी मैंने देखा कि मेरी मम्मी भी नहीं थीं. फिर मैं मम्मी के कमरे में गया, तो देखा कि वहां पर फूफा जी मम्मी से बातें कर रहे थे. मैंने देखा कि मम्मी उठ कर जाने लगीं, तो फूफा जी ने उन्हें पीछे से पकड़ लिया और उनकी गर्दन पर किस करने लगे.. अपने दोनों हाथों से उनकी चुचियों को दबाने लगे.

मम्मी- छोड़िये ना.. ये सही नहीं है.
फूफा जी बोले- सब सही है रचना.. तुमको मैं कब से पसंद करता हूं.
मम्मी बोलीं- अच्छा ठीक है आज रात को बेसमेंट में मिलना.
इतना कह कर मम्मी चली गईं.

फिर मैं रात को पहले से ही जाकर बेसमेंट के रूम में खूब पुराना सामान रखा है, वहाँ जाकर छुप गया.
कुछ देर बाद कमरे की लाइट जली तो देखा कि फूफा जी थे, कुछ देर बाद मेरी मम्मी भी आ गईं. जिस पटरे के पीछे मैं था, मुझसे दो कदम की दूरी पर मम्मी और फूफा जी थे. मम्मी ने रेड नाइटी पहनी थी और बालों को खुला छोड़ा था. वे सिगरेट पी रही थीं, ऐसा लगता था वो दो पैग लगा कर फूफा जी से चुदवाने ही आई थीं.

फूफा जी ने उन्हें पकड़ लिया और उनके होंठों पर किस करने लगे. मम्मी भी शायद गर्म थीं, वो भी उन्हें किस कर रही थीं.
फिर मम्मी बोलीं- ननदोई जी, आज के लिए इतना ही रहने दो.
फूफा ने मम्मी से कहा- आज हाथ आई हो.. बिना कुछ किए नहीं जाने दूँगा.

मम्मी बोलीं- पर यहाँ पर कहां करोगे?
फूफा जी एक हाथ से मम्मी की चूचियों को मसलते हुए बोले- ज़मीन पर ही लिटा कर चोद दूँगा.

फूफा ने मम्मी की नाइटी की डोर खोल कर उतार दिया और उनको जमीन पर लिटा दिया. फूफा उनके ऊपर चढ़ कर उनकी चूचियों ब्रा के ऊपर से ही पीने लगे.
मम्मी फूफा जी के निक्कर के ऊपर से उनका लंड हिलाते हुए बोलीं- लगता है ननदोई जी ज्यादा ही प्यासे हो.
फिर मम्मी ने हाथ मोड़ कर ब्रा का हुक खोल दिया और अपनी चूचियों के निप्पल को फूफा जी के मुँह में दे दिया. फूफा जी किसी कुत्ते की तरह मम्मी की चूचियों को चूस रहे थे.

मम्मी- आआह धीरे धीरे पियो ना..
फूफा जी मम्मी के निपल्स को काटने लगे.
मम्मी, ‘आउच काटिये मत..’

कुछ देर चुचियों को पीने के बाद फूफा ने मम्मी की दोनों टाँगों के बीच में अपने सर को रखा और उनकी चूत पर अपनी जीभ लगा दी. मम्मी की गुलाबी चूत को फूफा अपनी जीभ से चाटने लगे. मम्मी तड़फने लगी- आआह.. स्स्स.. आउच.. आआस्स्स.. हाआआ..

फूफा जी तेजी से मेरी मम्मी की चूत पर अपनी जुबान चला रहे थे. मम्मी ‘आआह आआह..’ कर रही थीं.
मम्मी ने कहा- आआह ननदोई जी अब चोदो भी..

फूफा ने झट से अपनी नेकर को उतारा. मैंने देखा उनका लंड बहुत मोटा और लंबा था.. लगभग 7 इंच का. मम्मी फूफा के लंड को सहलाते हुए बोलीं- लगता है आज मेरी चूत फट जाएगी.
फूफा ने अपने लंड को मम्मी की चूत पर टिकाया और एक धक्के में अन्दर कर दिया.
मम्मी चिल्लाने लगीं- आआह.. मर..गई.. आआह बहुत दर्द हो रहा.

फूफा जी धीरे धीरे धक्के लगाने लगे. मम्मी ‘आआह सस्सस्य..’ कर रही थीं. फिर मम्मी को भी मजा आने लगा, अब वो भी नीचे से अपनी कमर उछाल रही थीं.
फच्च फच्च की आवाज आ रही थी. फूफा- तुझे चोदने में मजा आ रहा है रानी.. आआह ले
मम्मी- आह.. आज कोई मर्द मिला है चोद ना.. आआह..

कुछ देर बाद फूफा जी हाँफने लगे और आआह की आवाज के साथ झड़ गए और मम्मी के बगल में लेट गए. मम्मी अपनी टांगों को फैलाए लेटी थीं, उनकी चूत से फूफा का रस टपक रहा था.
कुछ देर बाद मम्मी ने अपनी नाइटी पहनी और फूफा जी ने भी अपने कपड़े पहने. फूफा जी मम्मी को किस किया और दोनों चले गए.
फिर मैं भी जाकर अपने कमरे में सो गया.

अगले दिन शीतल दीदी की ससुराल देखने के लिए मेरी बड़ी ताई संगीता और बुआ गईं और उनके साथ मैं भी गया. हम लोग दीदी की ससुराल पहुँचे तो उनका घर बहुत बड़ा था.
चाची बुआ से बोलीं- इस घर में शीतल बहुत खुश रहेगी.

तभी सामने से शीतल के सास ससुर आ रहे थे. उनकी सास ने सलवार सूट पहना था, जिसमें वो माल लग रही थीं. ससुर भी हट्टे कट्टे थे. ताई उनसे बातें करने लगीं.
कुछ देर बाद ससुर बोले- मुझको काम है, मैं रात में आऊंगा. मेहमानों को रोक कर रखना.
ताई से रजनी जी ने कहा- आज तो आपको रुकना होगा.

ताई ने ‘हां’ कर दी. कुछ देर बाद दीदी की चचिया सास अमनदीप भी आ गईं. उन्होंने एक टी-शर्ट और जींस की टाईट पैंट पहनी थी, जिसमें वो बड़ी कड़क माल लग रही थीं. उनकी बड़ी बड़ी चुचियां खूब हिल रही थीं.

रात को मुझे उन लोगों ने एक रूम दिया, जिसमें मैं रुक गया लेकिन बुआ और ताई रात को नहीं दिख रही थीं. मैं चुपके से जाकर देखने लगा. मुझे उनके लिविंग रूम से कुछ आवाजें आ रही थीं. मैंने देखा तो दंग रह गया. गुरप्रीत चाची को गोद में लिए उनकी चुचियों को दबा रहा था और बुआ पता नहीं कहां थीं.

ताई ने एक पतली सी साड़ी पहनी थी, उनका पल्लू नीचे गिरा हुआ था और गुरप्रीत उनकी चुचियों को मसल रहा था, चाची आआह कर रही थीं.
ताऊ बोलीं- आज लगता है रिश्ता पक्का हो गया.
गुरप्रीत ने हंसते हुए कहा- जी हां आज तो पूरा मजबूत वाला रिश्ता बना कर ही रहूँगा.

ताई उठ कर अपनी साड़ी खोलने लगीं वो सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थीं. उनकी भरी चूचियां देख कर गुरप्रीत उनकी चुचियों को पकड़ कर मसलने लगा.
ताई बोलीं- आआह स्स्स समधी जी आउच धीरे करिये ना.
गुरप्रीत ने उनके ब्लाउज के हुक खोले और उतार दिया. फिर ताई की ब्रा भी खोल दी. ताई की चुचियां आजाद हो गईं.

फिर गुरप्रीत ने ताई संगीता को लिटा दिया और उनकी चुचियों को मुँह में लेकर चूसने लगा.
वो- आआह क्या मस्त चुचियां हैं तेरी.. वाह..
ताई- हां पी लो राजा.. सस्स काटिये मत.. आउच..

फिर गुरप्रीत ने उनके पेटीकोट के नाड़े को खींच कर खोल दिया और उसे उतार दिया. इसके बाद ताई की रेड पैंटी को भी उतार दिया. गुरप्रीत संगीता ताई की चूत को हाथों से मसलने लगा.
ताई ‘आआह प्लीज आआह..’ कर रही थीं.
फिर उसने ताई की चूत पे अपने लंड को टिकाया और अन्दर कर दिया.
ताई- आआह स्स्स धीरे कीजिये ना..

गुरप्रीत तेज धक्के लगाने लगा, ताई गांड उठाते हुए ‘आआह स्स्स..’ कर रही थीं. कमरे में फच्च फच्च की आवाज आ रही थीं.
गुरप्रीत- ले साली.. कितनी गर्म माल है तू आआह..
ताई- हां स्स्स हां मैं गर्म हूँ.. चोदो मेरे राजा.. आआह आय रे आआह..
फिर गुरप्रीत बोला- मैं जाने वाला हूँ, कहां डालूँ?
ताई- अन्दर ही डाल दो ना.

गुरप्रीत ने अपने माल को ताई की चूत में छोड़ दिया. मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है.

अब मैं बुआ को ढूँढने लगा. मैं चुपके से उनके घर में घूमने लगा. मेरी नजर गेस्टरूम में गई, मैं वहां गया तो देखा कि बुआ और दिलप्रीत सिंह दोनों बातें कर रहे थे.
बुआ सिर्फ एक शर्ट और लोवर में थीं, उनके बाल बिखरे थे. मैं पास गया तो देखा कि दिलप्रीत बुआ की चुचियों को दबा रहा था.
दिलप्रीत बोला- रूपा, तुम्हें चोद कर मजा आ गया.
बुआ- तुम्हारा लंड ले कर मुझे भी मजा आ गया.
मैं समझ गया कि इसने बुआ को चोद दिया है.

फिर बुआ बोलीं- चलो देखते हैं कि संगीता भाभी को गुरप्रीत ने चोदा कि नहीं. वैसे भी हम दोनों यहाँ चुदवाने ही आई थी.
बुआ उठ कर जाने लगीं साथ ही दिलप्रीत भी जाने लगा, मैं छुप गया. फिर मैं भी उनके पीछे जाने लगा.

अब बुआ ताई के पास आ गईं और गुरप्रीत ने बुआ को देखा तो वो उनकी चुचियों को दबाते हुए बोला- रूपा, तुम एक बार रचना की चूत दिला दो.
बुआ बोलीं- ठीक है दिला दूँगी.
बुआ गुरप्रीत के साथ कमरे में रह गई और ताई दिलप्रीत के साथ हो गईं. मैं चला आया और अपने कमरे में आकर सो गया.

सुबह जब आँख खुली तो बाहर गया और देखा कि चाची और बुआ दोनों तैयार थीं.

हम तीनों अपने घर लौट आये.
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