Friday, February 23, 2018

Published 8:00 PM by with 0 comment

कामवाली बाई ने चुत चुदाई बड़े नखरे करके

कामवाली बाई ने चुत चुदाई बड़े नखरे करके

(Kamwali Bai Ne Chut Chudai Bade Nakhre Karke)

बात तब की है, जब मुझे कोलकाता में आए हुए एक साल हो गया था और मैं अपनी बीवी को मिस कर रहा था. मैंने अपने दोस्तों से सुना था कि काम वाली बाई भी दे देती है, यदि उसको सही से पटा लिया जाए. मेरे यहाँ भी एक बाई काम करती थी, जिसका नाम ममता था.. वो दिखने में बहुत सुन्दर थी और दो बच्चों की माँ थी, फिर भी अपने आपको बड़ा मेन्टेन करके रखा हुआ था.

अब मैं भी किसी औरत के जिस्म को मिस कर रहा था, आखिर मेरे पास भी लंड है, कब तक मनाता या हाथ से काम चलाता. आखिर एक जिस्म की प्यास तो जिस्म से ही मिटती है. बाकी सब तो सिर्फ मन बहलाने के उपाय हैं.

अब तक ममता से मेरी ज्यादा बात नहीं होती थी, हम दोनों बस अपने काम से काम ही रखते थे. वो मेरे फ़्लैट पर सुबह और शाम दोनों समय आती थी. आज तक कभी किसी औरत को पटाने के बारे में नहीं सोचा था, वो भी सिर्फ सेक्स के लिए, तो समझ में ही नहीं आ रहा था कि उससे बात कैसे की जाए और अपना काम निकलवाया जाए. डर भी लग रहा था कि कहीं बुरा मान गई तो क्या होगा.. कहीं लेने के देने न पर जाएं.

पर कहते हैं न कि जब लंड खड़ा हो तो उस समय सिर्फ चूत ही दिखाई देती है और जब तक की वो शांत न हो जाए, कुछ समझ में नहीं आता. मेरी भी हालत कुछ इसी तरह की थी कि जब ममता काम करके चली जाती तब सोचता चलो कल उससे बात करूँगा, पर जब आती तब हिम्मत ही नहीं होती.

इसी उधेड़बुन में समय निकलता जा रहा था और मेरी प्यास बढ़ती जा रही थी. अब तो मुठ मारने से भी चैन नहीं मिल रहा था. अब तो आलम ये हो गया था कि ममता हो न हो, मैं उसका नाम लेकर मुठ मारने लगा. पर चैन मिलने की जगह बेचैनी बढ़ती ही जा रही थी.

फिर एक दिन सोच ही लिया, जो भी होगा देखा जाएगा, अब तो ममता से बात करके ही रहूँगा.

ममता जो कि दिखने में बिल्कुल सेक्सी माल थी, उसका फिगर भी मस्त था. उसका 32-28-36 का फिगर लंड खड़ा कर देता था. उस पर उसका गोऱा रंग, बड़ी बड़ी आँखें.. आह.. वो अक्सर साड़ी नाभि से नीचे बाँध कर पहना करती थी.


जिस दिन मैंने पक्का कर लिया था कि अब उससे बात करना ही है, उसके अगले दिन में व्हिस्की की एक बोतल लेकर घर आया और शाम से ही पीने बैठ गया और उसका इंतजार करने लगा.

लगभग एक घंटे बाद वो आई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.
काम खत्म करके जब वो जाने लगी तब मैंने उसे बुलाया और कहा कि मुझे आपसे कुछ बात करनी है.
वो मेरे रूम में आई और मुझसे पूछने लगी- क्या बात है?
मैंने उससे कहा कि भाभी आप बुरा मत मानना..
वो बोली कि क्या बात है.. आप बोलिये? मैं बुरा नहीं मानूँगी, लेकिन जो भी बोलना है जल्दी बोलिए.

तब मैंने उसको बोला- मेरा एक दोस्त है और उसको एक लड़की चाहिए, उस काम के लिए.. क्या आप किसी ऐसी लड़की को जानती हैं.
अब वो गुस्से में आकर मुझसे बोली- आप मुझे क्या समझते हैं. आइन्दा इस तरह की बात मुझसे मत कीजिएगा.
और वो गुस्से में मेरे फ्लैट से बड़बड़ाते हुए चली गई.

मेरी तो गांड फट गई थी, पिटे हुए मुँह जैसी हालत देखने लायक थी. मुझे डर भी लग रहा था कि कहीं ये किसी से कुछ बोल न दे. मेरा नशा और लंड की गर्मी दोनों ही शांत हो गए.

अब समझ में ही नहीं आ रहा था कि क्या करूँ. फिर सोचा जो भी होगा कल होगा, अभी व्हिस्की का मजा लो और किसी लड़की का कल्पना करते हुए मुठ मारकर लंड को शांत करो और सो जाओ.

मुझे उस समय यही ठीक लगा, मैंने मुठ मारी और सो गया. सुबह ममता के आने से पहले ही मैं अपने ऑफिस चला गया.
अगले दिन भी मैं उसके आने से पहले ही ऑफिस के लिए निकल गया. शाम को मेरे लौटने के करीब एक घंटे बाद ममता काम करने आई. आज मैं किचन में देखने भी नहीं गया कि वो क्या कर रही है, वो भी कुछ पूछने नहीं आई कि क्या बनाना है.. वो अपना काम खत्म करके चली गई.

इसी तरह कुछ दिन बीत गए. फ़िर शनिवार को शाम में वो अपने समय से जल्दी ही आ गई और अपना काम करने लगी.

फिर जब वो काम करके वापस जाने लगी तो मेरे पास मेरे कमरे में आई और बोलने लगी कि क्या हुआ है, अब तो आप बात भी नहीं करते?
मैं चुप ही रहा तो वो फिर से बोली- देखिए मैं ऐसी औरत नहीं हूँ.

जब वो मेरे पास बात करने आई थी तो काम करने की वजह से पसीने से भीग चुकी थी, जिसके कारण उसकी साड़ी उसके बदन से चिपकी हुई थी. इस वजह से उसकी चूची के उभार साफ़ साफ़ दिखाई दे रहे थे.. और इसी वजह से मेरे पेंट के अन्दर मेरे लंड खड़ा हो रहा था, जिसे छिपा पाना भी मुश्किल हो रहा था.

ममता मुझसे बात कर रही थी और मेरी नज़रें उसके चूची के पहाड़ों पर टिकी थीं जिसे उसने भी पकड़ लिया और अपनी साड़ी ठीक करने लगी.
फिर एकाएक मुझसे बोली- मैं आपसे बात कर रही हूँ और आप कहाँ देख रहे हैं?

मैंने उससे बोला कि मैंने तो आपको नहीं बोला था देने के लिए, मैंने तो आपसे पूछा था कि आप किसी को जानती हैं, जो देगी और बदले में पैसे लेगी. पर आप ही बुरा मान गईं. यदि मुझे आपको बोलना होता कि आप दे दो, तो मैं अपने दोस्त के लिए थोड़ी बात करता.. अपने लिए कोशिश नहीं करता?
तब ममता ने चौंक कर मुझे देखा और बोली- क्या बोला आपने..?
मैं बोला- जो आपने सुना!
तब वो बोली- नहीं एक बार और बोलिए.. जो अभी अभी आपने बोला.
तब मैं बोला कि यदि आपको बोलना होता कि आप अपनी दे दो, तो मैं अपने लिए बोलता.. न कि दोस्त के लिए.
वो बोलने लगी- छी छी.. मुझे नहीं मालूम था कि आप मेरे बारे में ऐसा सोचते हो.
मैंने उससे बोला- इसमें खराबी क्या है? आप सुन्दर हैं, जवान हैं तो क्यों नहीं..!

इस बार मैंने भी नोटिस किया कि वो भी चेहरे पर आश्चर्य का भाव लिए हुए वहीं पर खड़ी रही. मुझे भी लगा कि इसे भी अच्छा लग रहा है.

मैं अपने बिस्तर से उतर कर ममता के सामने जाकर खड़ा हो गया.. मुझे अपने सामने एकाएक पाकर वो थोड़ा घबरा गई. वो पीछे को होने लगी और दीवार से सट कर खड़ी हो गई, क्योंकि अब पीछे हटने के लिए जगह नहीं थी.
वो बेचैनी में मेरी तरफ देखकर बोलने लगी- ये आप क्या कर रहे हैं.. आप पीछे हटिए.
लेकिन मैंने आगे बढ़ कर उसके कंधों पर हाथ रखा और उसकी आँखों में देखते हुए बोला कि भाभी आप मुझे अच्छी लगती हो, क्या आप मुझे दोगी?
ममता ने हकलाते पूछा- क्या?
अब मेरी भी हिम्मत बढ़ गई थी. मैंने भी बोल दिया कि आपकी चूत.. भाभी बस एक बार आप मुझसे चुदवा लो प्लीज सिर्फ एक बार..
वो दबे स्वर में बोली- आप पागल हो गए हैं.

वो मुझे धक्का देकर भाग गई. मुझे उससे ऐसी उम्मीद नहीं थी तो मैं लड़खड़ाते हुए अपने बिस्तर पर गिर गया और वो दरवाज़ा खोल कर चलती बनी.

मैं थोड़ा उदास हो गया कि आज चौका मारने का अच्छा मौका था लेकिन हाथ से निकल गई, फिर सोचा कि चलो अब तो ये अपनी चूत दे ही देगी.. और एक बार दे दी तो फिर तो जब चाहो तब उसकी चूत और मेरा लंड खेल सकेंगे.
यही सोचता हुआ कि चलो अब तो एक दो दिन का कष्ट और है.. उसके बाद तो मौज ही मौज होगी.

मैं खाना खाकर सोने के लिए अपने बेड पर चला गया. सोने के पहले ममता का नाम लेकर मुठ मारी और सो गया. यही सोचते हुए कि चलो आज भाग गई कल सुबह तो आएगी ही, यही सब सोचते हुए मैं सो गया.

लेकिन अगले दो दिन मैं उसका इंतज़ार करता रहा और अपने लंड को समझाता रहा कि चिंता मत कर, चूत का इंतज़ाम हो गया है और मुठ मारकर सो जाता.

दो दिन से चार दिन, फिर पांच दिन इसी तरह वह पूरे सात दिन के बाद आई.. लेकिन आज कुछ ज्यादा ही सजधज कर आई थी. उसे देखते ही लंड तन कर खड़ा हो गया और ममता भी तिरछी नज़र से मेरे लंड के तरफ देख रही थी.

जब वो किचन में जाने लगी, तब मैंने उसे अपने कमरे में आने के लिए बोला लेकिन वो बोली- नहीं, जो बोलना है यहीं बोलिए.. मुझे आपके बैडरूम में नहीं जाना है.. आपकी नीयत ठीक नहीं है.

जैसा कि आप सब जानते हैं कि उस दिन के बाद से मेरी हिम्मत बढ़ गई थी तो मैं भी उससे बोला- तुम इतना सजधज कर आओगी भाभी.. तो क्या होगा और मेरी नियत नहीं ख़राब हुई है बल्कि आपको देखकर मेरा लंड बिगड़ गया है.
इस पर उसने इतरा कर बोला कि आपका वो बिगड़ गया है, तो आप उसको सीधा करो.. इसमें मैं क्या करूँ.

इसी तरह की बात करते हुए वो जब रोटी बनाने लगी, तब मैं उसके पीछे जाकर खड़ा हो गया और उसकी पीठ को अपने हाथों से सहलाने लगा, मैं कभी इधर कभी उधर.. उसके जिस्म पर अपने हाथ से सहलाने लगा.
वो बोली- मुझे खाना बनाने दीजिये नहीं तो मैं लेट हो जाऊँगी.
मैंने उससे बोला- मुझे इसकी नहीं, किसी और चीज की भूख लगी है.
वो बोली- उसके लिए मैं कुछ नहीं कर कर सकती, आप जाओ यहाँ से.

अब मैं भी गुस्से से किचन से निकल कर अपने बेडरूम में चला आया और लेट गया. आज मैं उसके रहते ही अपने बेडरूम में लंड निकाल कर उसका नाम लेकर धीरे धीरे से हिलाने लगा और उसका इंतजार करने लगा क्योंकि मुझे पता था कि जाने के पहले वो मेरे कमरे में जरूर आएगी.

जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ.. वो अपना काम खत्म कर जब जाने को हुई तब उसने मुझे आवाज़ लगाई, लेकिन मैं चुप रहा. तब उसने दो तीन बार और आवाज़ दी. जब मैं कुछ नहीं बोला तो वो मेरे बेडरूम में आई और मेरे हाथ में लंड को देखकर.. उसका मुँह खुला का खुला रह गया.
मैंने भी उसको दिखाने के लिए और जोर जोर से अपने लंड को सहलाने लगा और उसका नाम लेकर मुठ मारना जारी रखा.

कुछ देर तक वो देखती रही फिर पलट कर जाने को हुई तो मैंने लपक कर उसको पकड़ लिया और उसे खींच कर बेड पर बैठा लिया.
अब मैंने उसके सामने खड़े होकर एक हाथ उसके कंधे पे रखा और दूसरे से उसका नाम लेते हुए लंड को सहलाता रहा.

वो बोलने लगी- आप बहुत गंदे हो, आप मेरे साथ ये सब क्यों कर रहे हो? मैं आपको क्या समझती थी और आप क्या निकले.
मैं बोल पड़ा- भाभी जब लंड खड़ा होता है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता. आप मान जाओ.. बस एक बार मेरे लंड को अपने चूत में डालने दो.
वो बोली- नहीं, ऐसा नहीं हो सकता है.

फिर मेरे बार बार कहने पर वो बोली कि पहले आप सच बोलो, उस दिन आप जो लड़की खोज रहे थे वो अपने दोस्त के लिए नहीं बल्कि अपने लिए खोज रहे थे.
मैं बोला- हां ये सही है मैं आपको चोदना चाहता था पर डायरेक्टली नहीं पूछ पा रहा था इसलिए दोस्त का नाम लेकर बात की थी. लेकिन अब तो मैंने आपको सच बोल दिया, अब तो आप मुझे चोदने दो प्लीज..
वो बोली- नहीं.. मुझे सोचने का कुछ समय चाहिए.
मैं बोल पड़ा कि आप मुझे चोदने दो बदले में मैं आपको पैसे भी दे दूंगा.
वो बोली कि यदि पैसे के लिए मुझे यह काम होता तो मैं आपके यहाँ नौकरानी का काम क्यों करती.. यही काम न करने लगती.

उसकी इस बात पर मैं चुप हो गया. इसी तरह उसके मन में जो भी आता गया, वो बोलती रही और मैं चुपचाप सुनता रहा.
फिर वो बोली कि मुझे देर हो रही है, अब चलना चाहिए.
तब मैं बोल पड़ा- भाभी पैसे नहीं चाहिए तो मत लो, पर एक बार तो दे दो.

वो बोली कि मैंने बोला न कि मुझे सोचने के लिए कुछ समय चाहिए कि अपना जिस्म आपको दूँ कि नहीं.
तब मैं भी बोल पड़ा- ठीक है पर आज तो अपने हाथ से ही मेरी मुठ मार दो.. कम से कम आज तो ठंडक कर दो.
वो आनाकानी करने लगी- नहीं.. जब मैं बोल रही हूँ कि मुझे समय चाहिए आप तब भी नहीं मान रहे हैं.
फिर मेरे बहुत मनाने पर बोली- ठीक है लेकिन फिर कभी नहीं और यदि आपने जोर जबरदस्ती की तो मैं काम छोड़कर चली जाऊँगी.

मैंने उसके हाथ में अपना लंड पकड़ा दिया और वो मेरे लंड को सहलाने लगी. मैंने भी मौका पाकर ममता की चूचियों पर हाथ रखकर सहलाने लगा, पर उसने मेरा हाथ हटा दिया और कहा- नहीं ये मत कीजिये.. नहीं तो मैं चली जाउंगी.

फिर मैंने कुछ नहीं किया और चुपचाप लंड का मजा लेता रहा. उसने मेरे लंड की मुठ मारकर मेरे माल को गिरा दिया और उठकर अपने कपड़े ठीक करके चली गई.

उसके अगले दिन से वो आती और अपना काम करके चली जाती. मैंने उससे नहीं पूछा कि उसने क्या सोचा, बस उससे इधर उधर की बातें करता रहता, जब तक वो रहती.

ऐसे ही 20-25 दिन बीत गए. फिर एक दिन मैं व्हिस्की की बोतल लेकर घर गया और टीवी पर ब्लू फ़िल्म देखते हुए व्हिस्की पीने लगा.

तभी दरवाजे की घन्टी बजी तो मैंने टाइम देखा, अभी सात बज रहे थे. मैंने मन ही मन सोचा कि इस समय कौन आ गया क्योंकि ममता आठ बजे आती है. इसी उधेड़बुन में मैंने दरवाज़ा खोल तो ममता गेट पर खड़ी थी.

वो मुझसे हँसते हुए बोली- हटिये, अन्दर आने दीजिये.

मैं गेट से हटा और उसे अन्दर आने दिया. अन्दर आते समय ममता के होंठों पर एक अजीब मुस्कान थी. अन्दर आने के बाद मैंने उसके हँसने का कारण पूछा तो कहने लगी कि वो तो ऐसे ही हँस रही थी.

अन्दर आकर जब उसने व्हिस्की की बोतल और गिलास देखा और टीवी को बंद देखा तो बोल पड़ी- लगता है कि आज फिर मूड बनाया जा रहा है.
मैंने कहा- क्या करूँ तुम देने के लिए मानती ही नहीं हो तो टीवी देख कर ही काम चला रहा हूँ. आज एक महीना हो गया लेकिन तुम अभी तक सोच ही रही हो.

इस पर उसने जो कहा, उसे सुनकर मैं तो चौंक ही गया. ममता बोली- आपने ही तो नहीं पूछा कि मैंने क्या सोचा.
मैंने कहा- ममता भाभी जब तुम सोच चुकी हो तो बता क्यों नहीं दिया कि तुमने क्या सोचा कि तुम मेरा लंड अपनी चूत में लोगी कि नहीं, यदि मैंने नहीं पूछा तो तुम ही बता देतीं.
ममता बोली- आग मुझे नहीं बल्कि आपके वहां पर लगी है, तब मैं क्यों आपको बिना पूछे बोलती कि मैंने क्या सोचा.

अब उसकी इतनी पॉजिटिव रिस्पांस पाकर मैंने टीवी को चालू किया और उसे पकड़ कर अपने गोद में बैठा लिया और बोला कि अब बोल भी दो ममता भाभी.. क्या मेरा लंड तुम्हारी चूत की गहराई में छिपी ज़न्नत का मजा पा पाएगा या नहीं.

उसको अपनी गोद में बैठाते ही नीचे से मेरा लंड खड़ा होकर ममता की गांड के छेद में घुसने की नाकाम कोशिश में लगा हुआ था.

ममता बोली- अपने उसको संभालिये.
मैं बोला- अब बोल भी दो.
वो बोली- देखिये उस दिन जैसे किया था वो करने को राज़ी हूँ और आप ऊपर से सब कुछ कर सकते हैं.. लेकिन मैं आपका अपने अन्दर नहीं लूँगी.
मैं बोला- ये क्या बात हुई.. हाथ से तो मैं भी अपने आप कर सकता हूँ.. फिर क्या फायदा..?
वो बोली- ज्यादा से ज्यादा आप मेरा ब्लाउज़ और ब्रा खोल कर चूस सकते हैं या सहला सकते हैं और पेटीकोट भी खोल दीजिये.. लेकिन पैंटी नहीं खोलूंगी और आप मेरे अन्दर अपने उसे नहीं डालेंगे.

एक तो शराब का नशा और दूसरी ब्लू फ़िल्म की खुमार.. और अब उसकी बातें सुनकर मेरा दिमाग और ख़राब हो गया. मैंने उससे बोला कि क्या फायदा.. जात भी गवाऊं और भात भी नहीं खाऊं. तुम जाओ बाहर.. मैं किसी और को खोज लूंगा.
वो भी बड़बड़ाते हुए चली गई और किचन में जाकर अपना काम करने लगी.

अब मैं भी डीवीडी बंद करके टीवी पर कुछ कॉमेडी सीरियल देखने लगा. शराब की छोटे छोटे घूँट लेने लगा और पैंट के ऊपर से ही अपने लंड को सहलाने लगा.

जब कुछ देर बाद दिमाग हल्का हुआ तो मैंने सोचा कि ममता भाभी तो अपनी चूत चुदवाने के लिए तैयार ही है, अब खुल कर नहीं बोल पा रही है या सिर्फ मुझे तरसा रही है. क्योंकि जब वो सब कुछ खोलने के लिए मान ही गई है तो उसे भी पता है कि इतना करने के बाद तो उसे भी चुदना ही है.

अब मुझे अपनी बेबकूफी और उसकी चालाकी पर हँसी आने लगी, यानि उसने इशारे में ही मुझसे चुदवाने की बात बोल दी थी.

मैंने जल्दी से शराब का गिलास नीचे रखा और लपक कर किचन में गया और ममता से बोला- भाभी.
वो गुस्से में बोली- क्या है?
तब मैं बोला- भाभी आप जो चाहती हो वही होगा.
ममता बोली- अब क्या हुआ उस समय तो बड़े गुस्से में बोले थे कि दूसरी खोज लेंगे तो अब जाइए, मुझे अब आपके साथ उतना भी नहीं करना.

मैंने गैस चूल्हे को बंद किया और ममता को अपने गोद में उठाकर बेडरूम में ले गया और बिस्तर पर पटक दिया और उसके ऊपर चढ़ गया.

वो मेरे नीचे थी और मैं उसके ऊपर, मेरे सीने में ममता की तनी हुई चूचियों के दबे होने का कोमल सा एहसास हो रहा था और वो मेरी आँखों में देख रही थी और मैं उसकी आँखों में देख रहा था. मैं उसकी आँखों में देखते हुए उसकी गुलाब की तरह लाल लाल होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.

कुछ देर बाद वो भी मेरा साथ देने लगी तो मैंने उसका हाथ छोड़ दिया और अपनी उंगली को ममता के बालों में फंसा कर उसके बालों को सहलाने लगा. अब ममता भी धीरे धीरे उत्तेजित होने लगी और मेरे बालों को सहलाने लगी.

अब उसके होंठों को छोड़ कर मैं उसके गालों.. कंधों और कानों को चूमना और सहलाना शुरू कर दिया. अब हमारी साँसों की गर्मी एक दूसरे के जिस्म को छूने लगीं. अब जिस्म पर कपड़े अच्छे नहीं लग रहे थे. मैंने ममता की साड़ी को उसके जिस्म से अलग किया और उसकी नग्न नाभि को अपनी जीभ से सहलाने लगा. ममता मेरे बालों को बड़े प्यार से सहला रही थी. मैं उसकी नाभि को चूमते हुए धीरे से अपने हाथ को उसके चूचों पर रखा और दबाने लगा.

क्या मुलायम और कड़क चूचियां थीं उसकी, दबाने में बहुत मजा आ रहा था. मैंने अपना सर उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए पूछा- तो भाभी चूत चुदवाओगी अब?
वो बोली कि नहीं.. मुझे मालूम है मुझे क्या करना है.

फिर मैंने एक एक कर उसके ब्लाउज़ के बटन खोले और ब्लाउज़ और ब्रा दोनों को एक साथ ही उसके जिस्म से अलग कर दिया. उसकी नंगी चूचियों पर से नज़र ही नहीं हट रही थी, क्या सुन्दर नज़ारा था, गोरी गोरी.. सख्त और मुलायम चूचियां, हाथों से सहलाने के कारण चूचियों पर लाल लाल धारियां के निशान पड़ गए थे, जिसे देखकर लग रहा था कि ये कश्मीरी सेब हैं.

अब बर्दाश्त करना मुश्किल था तो मैं भाभी की चूचियों को मुँह में भर कर चुभलाने लगा और ममता भाभी का हाथ पकड़ कर अपनी पेंट के अन्दर घुसा दिया. भाभी मेरे लंड को सहला रही थी और मैं उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूस रहा था.. दूसरी चूची को अपने एक हाथ से सहला और दबा रहा था.

थोड़ी देर बाद मैं ममता भाभी की चूची चूसते हुए, एक हाथ से उसके पेटीकोट के नाड़े को खोल दिया और उसे उसके मखमली जिस्म से उतार फेंका.

इसके साथ ही अपना एक हाथ उसकी पैंटी के अन्दर डाल कर उसकी चूत को सहलाते हुए उसकी चूत की फाँकों के बीच से अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया.

मेरे ऐसा करते ही ममता जोरों से चिहुंक उठी और जोर जोर से आहें भरने लगी. उसकी उंगलियों का दबाव भी मेरे लंड पर बढ़ गया.

अब अपने को रोक पाना मुश्किल था तो मैं जल्दी से उससे अलग हुआ. मैंने अपने सभी कपड़े उतार फेंके और पूरी तरह से नंगा होकर ममता के ऊपर जाकर चढ़ गया.

मैंने कामवाली ममता भाभी की दोनों चूचियों को पकड़ा और उसकी मस्त चूचियों के बीच में अपना लंड घुसा कर आगे पीछे करने लगा. मुझे बड़ा ही मजा आ रहा था, कुछ देर तक इसी तरह उसकी चूचियों को लंड से चोदता रहा. फिर नीचे उतर कर ममता के बगल में लेट गया. इसके बाद मैंने भाभी को अपने ऊपर ले लिया और उसके होंठों को चूसने लगा. अपने दोनों हाथों को उसकी पैंटी के अन्दर पीछे से डालकर उसके चूतड़ों को सहलाना चालू कर दिया. ममता भी पूरे जोश में आकर मेरा साथ दे रही थी.

फिर मैंने ममता को अपने नीचे लिटाया और अपना लंड उसके मुँह के पास ले गया, तो ममता ने जल्दी से मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया. उसके मुँह की गर्मी जब लंड पर पड़ी तो एक अजब तरह का सुकून मिला और करीब 5 मिनट के बाद मैंने लंड उसके मुँह से निकाला और उसे चित करके मैं उसकी जांघों के बीच में अपना मुँह ले जाकर उसकी जांघों को चूमने लगा. भाभी की पैंटी के अन्दर हाथ डाल कर उसकी चूत की फाँकों को सहलाते हुए अपने दो उंगलियों को उसकी चूत के अन्दर घुसा दिया. मैं उंगली से उसकी चूत को चोदने लगा.

फिर अपना सर उठाकर उसकी तरफ देखा तो वो अपनी आँखें बंद किए हुए चूत की चुदाई का मजा ले रही और हल्की हल्की आहें भर रही थी.

मैं इस मौके का फायदा उठाकर उसकी पैंटी को निकालने लगा, पहले तो उसने भी कमर उठाकर मदद की, लेकिन तभी उसे ख्याल आया कि मैं क्या कर रहा हूँ तो तुरंत ही उसने मेरे हाथों को पकड़ लिया और बोलने लगी- ये नहीं, ये नहीं.
मैं उसको बोला- ममता भाभी मैं सिर्फ आपकी चूत को देखूंगा और हाथों से ही सहलाऊँगा, लंड अन्दर नहीं डालूँगा.

तब जाकर उसने अपनी पैंटी उतारने दी.

अब अपनी आँखों के सामने ममता की कसी हुई और फूली हुई चूत को देखकर तो मेरे होश ही उड़ गए. क्या मस्त चूत थी, गोरी गोरी.. दोनों फाँकें आपस में चिपकी हुईं. ममता के कामरस से भीगी हुई चूत देखकर तो मेरा लंड और भी कड़ा हो गया.

तभी मैंने उसकी चूत के फाँकों को अलग किया और अपनी एक उंगली को उसकी चूत में घुसा दिया. ममता बेचैन होकर मेरे बालों को पकड़ कर जोर जोर से सहलाने लगी.

इसके बाद तो उसकी चूत में लंड घुसाए बिना चैन नहीं आने वाला था. अब काफी फोरप्ले हो चुका था. सिर्फ ममता की चूत में लंड डाल कर उसे चोदना बाक़ी रह गया था. मैं उसकी जांघों के बीच के बरमूडा ट्रायंगल को चूमता हुआ उसकी नाभि तक पहुँचा और उसके नाभि के छेद में अपनी जीभ डालकर उसको सहलाता हुआ.. उसकी चूची को अपने हाथों से दबाता हुआ.. ऊपर की तरफ बढ़ने लगा.

फिर उसकी बाईं चूची की घुंडी को अपने मुँह में लेकर उसकी लाल लाल मख़मली चूची का दूध पीने लगा और अपनी उंगलियों से उसके होंठों को सहलाने लगा.

कुछ देर बाद उसकी चूची को छोड़ कर ऊपर हुआ और ममता के होंठों को अपने होंठों में लेकर चुभलाने लगा और अपने लंड को उसकी चूत पर सहलाने लगा.

तभी ममता ने अपने होंठों को मेरे होंठों से अलग करते हुए कहा- लंड अन्दर नहीं डालना है.
मैंने कहा- चिंता मत करो मैं सिर्फ लंड को तुम्हारी चूत पर सहलाउंगा, अन्दर नहीं डालूँगा.

ये कह कर मैं फिर से उसके होंठों को चूमने लगा और उसकी चूची को भी साथ साथ दबाने लगा और नीचे उसकी चूत पर अपने लंड को सहलाने भी लगा.

कुछ पलों बाद मैंने देखा कि ममता आँख बंद करके पूरे मज़े में है और उसने अपनी जांघों को भी थोड़ा ढीला छोड़ दिया है. उसके ऐसा करते ही मैंने अपने लंड को एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड ममता की चूत को चीरता हुआ उसके अन्दर चला गया.

मेरे ऐसा करते ही ममता अपनी आँखें खोलकर मुझे धक्का देने लगी, किन्तु मैंने उसे जोर से अपने से चिपका लिया और लंड को भाभी की चूत में अन्दर बाहर करने लगा.

कुछ देर बाद ममता भी साथ देने लगी और नीचे से अपनी कमर उचका उचका कर चुदवाने लगी.

अब मेरे दोनों हाथों में ममता की चूचियां थीं, जिन्हें अब में बेदर्दी से जोर जोर से मसल रहा था और उसकी चूत को अपने लंड से चोद भी रहा था.

इतना मजा आ रहा था कि ममता ने भी मुझे जोर से पकड़ लिया था. करीब 15 मिनट तक लगातार उसकी चूत को चोदने के बाद अब लंड में भी प्रेशर बनने लगा था. मैंने ममता की चूत को अपने माल से भर दिया. तभी ममता ने भी अपना माल छोड़ दिया और मेरे साथ चिपक गई.. और मैं भी उसके ऊपर लेट गया.

कुछ देर बाद जब अलग हुए तो देखा कि चादर हमारे कामरस से पूरी तरह भीग चुका था और हम दोनों के चेहरे पर संतोष का भाव था.
      edit

0 comments:

Post a Comment