Tuesday, February 20, 2018

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अंकल ने मेरी चूत और गांड मारी जम के

अंकल ने मेरी चूत और गांड मारी जम के

(Uncle Ne Meri Choot Gand Mari Jam Ke)

लेकिन उसके दिए हुए दस हज़ार पाकर मैं बहुत खुश थी. मुझे पहली बार एहसास हुआ था कि अब तक मैं सिर्फ मौज मस्ती के लिए जो करती थी, वह मुझे रातों रात नोटों के बिस्तर पर पहुँचा सकता है. पापा की मौत के बाद मम्मी से भीख की तरह पैसे मांग मांग कर तंग आ चुकी थी. मुझे इस बार का उस दिन एहसास हुआ कि मेरा एटीएम तो मेरी चड्डी में ही है. मेरी चड्डी में जो जादुई परी थी, वह जब भी बाहर आती अलादीन के चिराग की तरह मेरी ख्वाहिश पूरी कर सकती थी.

मुझे आई फोन लेना था लेकिन उसके पचास हज़ार दाम सुनकर मेरी चड्डी से धुँआ निकलने लगा. मेरी झाटें जल गईं. वैसे तो मैं रिच फैमिली से थी लेकिन मेरी मम्मी मुझे कभी आई फोन नहीं दिलाने वाली थीं.


कुछ दिन बाद मैंने बेहद डरते हुए उस नम्बर पर व्ट्सऐप पर हैलो का मैसेज किया.
उधर से जवाब आया- कब मिल सकती है मासूम परी?
मैंने कहा- अंकल, मुझे पैसों की जरूरत है.
तो उसने कहा- मेघा, इस बार मैं तुझे बीस हजार दूंगा लेकिन पूरी रात रुकना होगा.

घर से पूरी रात निकला आसान नहीं था. लेकिन बीस हज़ार का सुन कर मैं सोचने लगी. मतलब तीन रात में मैं आई फोन ले सकती थीं. मैं शाम आठ बजे घर से निकलने को हुई.
“कहाँ चली बन-ठन कर महारानी?” मम्मी के टोकते ही मेरे पैर ठिठक गए.
“मम्मी मुझे पार्टी में जाना है लेट हो जाऊँगी रात को?”
“किसकी पार्टी? अचानक.. और इतनी सर्दी में स्कर्ट टॉप सर्दी नहीं लगेगी तुझे?”
“एक दोस्त की पार्टी है. आप फिकर मत करो वो कार से लेने आएगा.. लेट हुई तो कॉल करूँगी.”
“ठीक है जाओ.”

“मम्मी, कुछ पैसे दे दो न..”
“पांच सौ रूपए अन्दर कमरे में वार्डरोब से ले लो जाकर.”
“पांच सौ में क्या होता है मम्मी दो हज़ार दे दो न.”
“अन्दर पांच हज़ार गिनकर रखे हैं हज़ार से एक पैसा ज्यादा लिया तो टांगें तोड़ दूंगी.”
“ठीक है ठीक है.. पन्द्रह सौ पर डन.” मैंने तुरंत पैसे पर्स में डाले निकलने को हुई.
“सुन रे, अपना मोबाइल तो लिए जा.” मम्मी के हाथ में मोबाइल देखकर मेरी गांड फट गई. मैंने तुरंत ही मोबाइल लिया और लिफ्ट लेकर निकल गई.

तकरीबन दस मिनट बाद वह अंकल मुझे लेने के लिये बस स्टॉप पर आ गए. ऐसा लगता था कि जैसे आज उनका जिस्म भी बहुत हट्टा-कट्टा और गठीला था. उनकी हाइट 6 फीट होगी.
उस दिन शायद मैंने इन सब बातों पर ध्यान नहीं दिया था.

“आ गई माय बेबी डॉल..” उन्होंने आते ही मुझे ज़ोर से किस किया और मेरे छोटे छोटे मम्मे टॉप के ऊपर से ही दबाने लग पड़े. वहां पर कुछ लोग खड़े थे, वे सब मुझे देखने लगे. मैंने कोई परवाह नहीं की.
उसके बाद उन्होंने मुझे अपने साथ चलने को कहा, मैं उनकी गाड़ी में जा कर बैठ गई. मुझे आई फ़ोन लेने की, या सच बोलूं तो अपनी मासूम सी छोटी सी चूत में लंड लेने की इतनी जल्दी थी कि उनसे पूछा भी नहीं कि कहाँ जा रहे हैं.
हम पहले नॉर्मल बातें करते रहे.

“बियर पिओगी?” अंकल ने कैन देते हुए पूछा.
“नहीं, मैं नहीं पीती हूँ.” मैंने ड्रामा किया.
“बियर में कुछ नहीं होता, तुम्हारे लिए फ्रूट बियर लेकर रखी है मैंने.” कहते हुए उन्होंने मुझे एक कैन खोल कर दे दी.

हम दोनों कार की पिछली सीट पर थे. मुझ पर नशा सवार होने लगा था और मेरा मूड बहुत ज्यादा सेक्सी हो गया था. मैंने बिल्कुल बेशरम होकर अंकल की जाँघ पर हाथ रख दिया और उनकी जीन्स के ऊपर से ही मैं उनके लंड को सहलाने लगी.
“ओह्ह असर हो रहा है तुम पर बेबी.” अंकल ने मेरे गुलाबी सफ़ेद स्कर्ट में हाथ डालकर मेरी गोरी गोरी टांगें सहलाते हुए कहा.

मैं अभी शराब कम पीती थी, इसलिए मुझ पर नशा छाने लगा था. ये सब देख कर अंकल का लंड भी खड़ा हो गया.
“गंगाराम, कार हाईवे पर जंगल के पास रोक लो.” उन्होंने ड्राईवर को बोल कर अपनी कार सड़क के एक किनारे पर रोक ली.
“क्या साब यह तो बहुत छोटी सी है अभी आपकी बिटिया की जितनी!”

“बिटिया जैसी है, बिटिया नहीं है. ज्यादा बकचोदी नहीं गंगा राम. छोटी दिखती है लेकिन एक नंबर की चुदक्कड़ माल है. अभी देखो कैसे पूरा सटक लेती है मेरा.”
“हाँ अंकल, मेरा जिस्म गर्म हो रहा है, जल्दी चोदिये न… अपनी प्यारी बेबी को. आपकी बेटी हूँ न मैं. मुझे अपनी गोद में बिठा लो.” मैंने खुद को उनकी बांहों में समर्पित करते हुए उसकी जीन्स की ज़िप खोल दी, अपना हाथ अन्दर डालकर उनका लंड टटोलने लगीं.

उन्होंने बेल्ट खोल कर जीन्स को ढीला कर दिया.

तभी हम दोनों एक दूसरे को किस करने लग पड़े. हमारी दोनों की जीभें एक दूसरे के मुँह में थी और मुझे वो बहुत उत्तेजित लग रहा था.
“मेघा बेबी रात भर ले लेगी… थकेगी तो नहीं?”
“नहीं थकूंगी अंकल, आप अभी मुझे यहीं हाईवे पर कार में चोदिये न!”

“जानती है बेबी मैंने तुझे बीस हज़ार रूपए क्यों दिए हैं. फ़िलहाल हम दोनों यहाँ से एक होटल में जायेंगे.. मैं वहां तुमको रखूँगा.”
“ठीक है आज रात भर यह मासूम लड़की आपकी है. मम्मी से झूठ बोल कर आई हूँ.”
“ह हा हा… बहुत शैतान है तू अब फटाफट चड्डी निकाल कर मेरी गोद में बैठ जा.”

अंकल ने मुझे अपनी चड्डी उतारने को कहा. मैंने उनसे कहा कि यहाँ सड़क पर कोई देख लेगा तो उन्होंने कहा कि ये सड़क एक सुनसान सड़क है. जंगल है तो ट्रैफिक कम ही होता था और शाम के वक्त यहाँ कोई नहीं आता जाता है. मैंने दोनों तरफ़ देखा तो दूर दूर तक कोई भी नहीं था.

वैसे भी नशे की खुमारी और उत्तेजना में मुझे चुदाई करने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा था. मैंने फौरन अपनी चड्डी सरकाते हुए निकाल दी. अंकल ने मेरी छोटी सी चिकनी सी चूत को सहलाया और सामने से गोद में बैठा लिया. उनका लंड मेरी चूत को चूम रहा था. मैं थोड़ा सा सहम गई.

“डर मत बेटी, आज तेरी गांड नहीं मारूंगा. मैं तुझे थकाना नहीं चाहता हूँ.” ये कहते हुए उन्होंने मेरी चूत को दो मिनट तक उंगली से सहलाया. मेरी चूत गीली हो चुकी थी. फिर अपना मोटा लौड़ा मेरी नन्हीं सी गुलाबी चूत पर रखा. मैंने दिल कड़ा करते हुए दांत भींच लिए. उनका लंड मेरी बच्ची सी चूत में समाने लगा. मैं दर्द से एक बार फिर बिलबिला उठी.

“कुछ नहीं होगा… कुछ नहीं होगा.. टांगें ढीली छोड़ दे.. बस बस..”
“आएईई… मम्मी.. दर्द हो रहा है.. बहुत मोटा ही आपका सर..”
उनका लंड मेरी नन्हीं सी चूत में बिल्कुल टाइट अन्दर तक जा चुका था.

“बस बस बेबी.. तू इस कच्ची उम्र में किसी जन्नत से कम नहीं है. धीरे धीरे ऊपर नीचे होकर मज़े ले चुदाई के.. आहह्ह…यार तू सच में कच्ची कली है. तेरी चिकनी छोटी सी मासूम चूत में जो सुख है, ऐसा मज़ा किसी ने नहीं दिया मुझको.”
“हाँ सर बेबी हूँ न.. इसलिए अभी मेरी छोटी सी है.” मैंने ऊपर नीचे होते हुए कहा.

मुझे दर्द हो रहा था लेकिन अब वह दर्द मीठा मीठा लग रहा था. सर का लंड मेरी छोटी सी चूत की दीवारों से रगड़ खा रहा था. मुझे स्वर्ग का एहसास हो रहा था. ड्राईवर गंगा राम बाहर खड़ा रखवाली करते हुए हम दोनों की फ्री में ब्लू फिल्म देख रहा था.
“हाय मेघा मेरी जान क्या चीज़ है तू.. क्या मस्त माल है.. हहमम्म ससस्स हहा..”

अंकल ने टॉप ऊपर करके अन्दर तक मुँह डाल कर मेरी छोटी छोटी गुलाबी चूचियां बड़े प्यार से चूमी और सहलाते हुए उनको मसलने लगे. अब वो मेरी चूत को बुरी तरह से चोदने लगे, मुझे बहुत मज़ा आने लगा.. मैं सिसकारी भरने लगी.
“आहह्ह्ह.. सर.. आईईए.. मासूम को चोद दिया आपने.. आम्म्म…” मैं कार की पिछली सीट पर उन अंकल की गोद में बैठी उनका मोटा लम्बा लंड खा रही थी.

कुछ ही देर में मैं झड़ गई. सारा पानी निकल कर मेरी छोटी सी चूत से बाहर बह रहा था, मैं उनकी गोद में ही निढाल हो रही थी. वह भी मुझे चिपटाए वैसे ही सीट पर पसर गए. हम कुछ देर तक ऐसे ही रहे. मेरी चूत से मेरा पानी अंकल के वीर्य के साथ मिलकर बह रहा था. जाँघों पर उस रस का अहसास मुझे गुदगुदी कर रहा था.

“आह्ह्ह.. सो गई क्या मेरी प्यारी गुड़िया.. उठ उठ..”
“नहीं अंकल सोई नहीं हूँ.” उन्होंने मुझे खुद से अलग करके सीट पर लिटा दिया. जैसे ही टप्प की आवाज़ के साथ उनका लंड बाहर आया, मेरी चूत से बचा हुआ उनका वीर्य बह कर नीचे तक आ रहा था.
“यह ले थोड़ी और बियर पी.” कहते हुए अंकल ने हनीकैन की एक कैन मेरे मुँह को लगा दी. मैं गट गट करके बियर पीने लगी.
“पैर खोलकर लेट जा बेबी सीट पर. इसको चाट कर साफ़ करता हूँ.”

फिर अंकल ने मेरी चूत की दोनों फांकों पर होंठ रख दिए और मेरी कसी हुई चूत के होंठों को अपने होंठों से दबा कर बुरी तरह चूसने लगे. मैं तो बस कसमसाती रह गई.. मैं तड़पती मचलती हुई “आआहह.. आअहह.. अंकल.. अंकल.. हाय.. उईईइ.. आहह..” कहती रही और अंकल चूस-चूस कर मेरी अधपकी जवानी का रस पीते गए.

अंकल ने बड़ी देर तक मेरी चूत की चुसाई की, मैं पागल हो गई थी. फिर उन्होंने मेरे कमर के नीचे तकिया लगाया और मेरी गांड के छेद को उंगली से फैलाते हुए चाटने लगे.
“उफ्फ्फ यह क्या कर रहे हो? आपने कहा था कि गांड नहीं मारोगे?”
“चुप कर मासूम रंडी.. पूरे बीस हज़ार दिए है मैंने तुझे. तेरी गांड नहीं लूँगा तो क्या तेरी माँ की गांड मारूंगा.” उन्होंने मेरी गांड चाटते हुए कहा. मैं उनकी डांट से थोड़ा सहम गई. मैंने टांगें खोल दीं और दर्द सहने के लिए खुद को तैयार करने लगी.

तभी अंकल ने अपने पूरे कपड़े उतारे और खुद नंगे हो गए. उनका लंड फड़फड़ा उठा.. करीब 7 इंच का लोहे जैसा सरिया था.
मैंने कहा- अंकल.. यह तो बहुत बड़ा और मोटा है.. ये मेरी गांड में नहीं जा पाएगा.
तो अंकल ने कहा- मेघा तू फिकर मत कर.. फिर मैं तेरे से प्यार करता हूँ.. तुझे कुछ नहीं होने दूँगा.

उसने अपना लंड मेरी छोटी सी गांड की तरफ बढ़ाया, लेकिन पहली बार में नहीं गया.
तभी अंकल बोला- मेघा.. थोड़ा चूसकर और स्ट्रोंग कर न.
उन्होंने मुझे सीट से उठाते हुए कहा.

मैंने अपने हाथों से अंकल के लंड को मुँह में लिया और उनके आंड सहलाने लगी.
“आह्ह्ह.. मासूम कली मेघा दिल कर रहा तुझे पट्टा डालकर अपने पास ही पालतू कुतिया बनाकर रखूँ.. आह्ह्ह.. सेक्स की गुड़िया है रे तू..”

उसके बाद अंकल ने मुझको सीट पर आराम से लिटा दिया. मैं सोच रही थी जो हालत पिछली बार मेरी गांड की हुई थी. अब मेरी फिर से वही होने वाली है. मैं मासूम सी कली अपनी बाप की उम्र के अंकल से गांड मरवाने जा रही थी.

अंकल के लंड के टच करते ही मेरी गांड में सिरहन होने लगी. मैं बुरी तरह तड़प रही थी. अंकल दो मिनट तक मेरी गांड को अपने लंड से सहलाते रहे.. फिर उन्होंने मेरी गांड पर थूक लगा कर हल्का सा ज़ोर लगाया..
“आहह्ह्ह.. मम्मी… उफ्फ्फ.. अंकल.. प्लीज़.. धीरे धीरे..” मेरी चीख निकल गई. अंकल का लंड अन्दर नहीं जा रहा था.
अंकल ने कहा- थोड़ा दर्द होगा.. लेकिन फिर ठीक हो जाएगा.
मैंने मंत्रमुग्ध कहा- ओके.. लेकिन अंकल प्लीज़ आराम से करना.

अंकल ने ज़ोर से अन्दर डाला.. तो उनका आधा लंड मेरे अन्दर कोई चीज़ तोड़ते हुए अन्दर घुसता चला गया.
मेरी आँखों में आँसू आ गए- आह.. मैं मर जाऊँगी अंकल.. प्लीज़ निकालो.. बहुत दर्द हो रहा है.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओफ.. ममाआ.. आहह्ह्ह.. मम्मी.. आईई.. सीई…”
यह कहते हुए मैं उनसे गिड़गिड़ाने लगी पर वो नहीं माने और उन्होंने मेरे मम्मों पर अपने होंठों लगा दिए.

वो मेरे बूब्स को चूसने लगे और अपने लौड़े को मेरी गांड में ऐसे ही डाले रखा. मेरी गांड में दर्द हो रहा था और मैं बुरी तरह से तड़प रही थी.
वो कहने लगे- तू मेरे लिए थोड़ा सहन कर ले प्लीज़.. मेरी मासूम बेब, तुझे बहुत प्यार करता हूँ मैं..”
मैंने हल्के स्वर में कहा- आहह्ह.. अंकल आपके लिए तो मैं कुछ भी कर सकती हूँ.

तभी अंकल ने एक जोरदार झटका मारा और उनका पूरा लंड मेरी गांड में जड़ तक घुस गया.
मैं सिहर उठी और “आह.. ओह्ह.. अंकल मैं मर गई..” कहने लगी.
अंकल मुझे तसल्ली देते रहे और 5 मिनट तक मेरे ऊपर ऐसे ही पड़े रहे. वो मेरे दूध चूसते रहे.

लगभग 5 मिनट बाद अंकल ने धीरे-धीरे झटके मारना शुरू किए.
मैं- आह्ह.. अंकल.. मजा आ रहा है.. मेरी गांड फट रही है. बेबी की गांड मार ली आपने. अब मुझे अच्छा लग रहा है.”
“डर मत मेघा मैं तुझे दुनिया भर की सैर कराते हुए हर सुख दूंगा. बस तू ऐसे ही अंकल की पालतू कुतिया बनकर रहे.. आह्ह.. आह्ह…”
वो यूँ ही मेरे होंठों को चूसता हुए मुझे मेरी गांड चोदते रहे.

लगभग 10 मिनट बाद अंकल ने अपना सारा माल मेरी गांड में ही छोड़ दिया.
“आजा मेरी मासूम गुड़िया मेरी गोद में ही सो जा.” कार आगे बढ़ने लगी. मासूम सी लड़की अंकल की गोद में सामने से चिपटी हुई सो गई. अभी मुझे नींद आई ही थी कि मेरा सेल बज उठा. यह मम्मी का कॉल था.
“हैलो मेघा कहाँ है बेबी, इतनी रात हो गई पार्टी खत्म नहीं हुई?”
“बस मम्मी मैं पहुँचने वाली हूँ.”
“साथ में कौन है.” मैं वैसे ही उनको चिपट कर बात कर रही थीं. अंकल भी उठ गए थे और मुस्कुरा रहे थे.
“एक दोस्त है.”
“ठीक है, जल्दी आओ ज़माना बहुत ख़राब है.”
मैंने जी बोल कर फ़ोन कट कर दिया.

अंकल ने मेरे हाथ से मेरा सेल लिया और मम्मी का फोटो देखने लगे- मेघा, तेरी मम्मी तो अभी भी बिल्कुल माल हैं!
“धत्त…”
“सच्ची यार मेरा तो दिल कर रहा है कि तेरी मम्मी को भी एक दिन चोदूं.”
मैं हंसने लगी. अंकल भी हंसने लगे.

“साहब, आगे पुलिस चेक पोस्ट है.” गंगा राम ने कार धीमी करते हुए कहा.
“मेघा जल्दी गोद से उतर कपड़े पहन.. जल्दी कर.”
“मेरे कपड़े कहाँ है?”
“होंगे यही सीट पर, चड्डी पहन स्कर्ट डाल.” अंकल के साथ साथ मैं भी अपने कपड़े पहनने लगी.
“चड्डी नहीं मिल रही.” मैं बुरी तरह से घबरा गई थी. मेरा दिल जोर जोर से धड़कने लगा था.
“कोई नहीं स्कर्ट और टॉप पहन ले.” मैंने तुरंत स्कर्ट और टॉप पहन लिया. नीचे से नंगी ही थी. तब तक पुलिस वाले दो ठुल्ले पास आ चुके थे.

“क्या कर रहे हो इतनी रात को हाईवे पर? यह लड़की कौन है?”
“मेरी बेटी है.”
“यह तो नशे में लग रही है. सच बताओ बेटी है या जुगाड़ है?”
“तमीज से बात करो.. बोला न मेरी बेटी है. तबियत खराब है इसलिए..”
“सर जाने दीजिये न, पापा हैं मेरे.. फीवर है मुझको.”

“ओये.. सतपाल..”
“जी साब.”
“देख यह गुलाबी रूमाल किसका सीट के नीचे गिरा पड़ा है.” इतना सुनते ही मेरी गांड फट गई.
“अंकल इनसे मुझे बचाओ इन दो जाटों को मैं नहीं झेल पाउंगी.” मैं धीरे से फुसफुसाई. अंकल ने चुप रहने का इशारा किया.
“साब यह तो चड्डी है पोल्का डॉट वाली. इस लड़की की ही होगी.” उस पुलिस वाले सतपाल ने मेरी चड्डी सूंघते हुए कहा.
“हाँ लड़की सच बता कौन है तू? इत्ती बित्ता भर की होकर अभी यह यह सब..! कहाँ पढ़ती है तू? तेरी चड्डी से तेरी कच्ची जवानी की खुशबू आ रही है.”

उस पुलिस वाल ने मेरी चड्डी सूंघते हुए अपने डंडे से मेरा स्कर्ट उठाया और दोनों पैर खोलने का इशारा किया. मेरी नन्हीं सी उजड़ी हुई चुत उसके सामने थी. मेरी चूत जांघें दोनों लाल थीं. उस पर अंकल की बाईट के निशान थे. मैंने शर्म से टांगें वापस समेट लीं.

“सर मेरी है चड्डी… जाने दीजिये.. अअब नहीं करूँगी.” मैं घबरा कर सुबक सुबक कर रोने लगी. तब तक अंकल बाहर आ चुके थे.
“विधायक जी को जानते हो? साले हैं मेरे.. कहो तो बात करवाऊं?” अंकल ने उस सतपाल नाम के पुलिस वाले के हाथ में कुछ पैसे रखते हुए कान में कहा. फिर कार में आ गए.

“साब ये तो शरीफ लोग हैं. तबियत खराब है इनकी छोरी की. बुखार में तप रही यह तो.. जाओ भाई जाओ उतारो इसका बुखार.. अपना काम हो गया.”
“ठीक है जाओ.. लेकिन ऐसे खुलेआम जंगल में मंगल मत करो भाईसाब.. हमारी भी ड्यूटी है. हाईवे पर चोदन कर रहे हो. जो करना है घर में करो..”
“और यह ले पहन और निकल यहां से!” कहते हुए उस पुलिस वाले ने मेरी चड्डी एक बार फिर सूंघते हुए मेरे मुँह पर मार दी.

हम लोग वहां से निकल गए. मैं सहमती सी हुई अंकल से चिपट गई.

“डर मत बेबी. इन हरामजादों से मेरा रोज़ पाला पड़ता है. चल तुझे तेरे घर तक छोड़ दूं.”

रात के दो बज रहे थे.. मैं घर आ गई थी. मम्मी मेरा इंतज़ार करते हुए सो गई थीं. मैंने दबे पाँव कमरे में बैग रखा. उसमें से पैसे निकाले. उसको मैंने चूमकर अपनी किताबों के बीच छुपा दिया. यह मेरी चुदाई की दूसरी कमाई थी.
मैं इस बात से अनजान थी कि मैं एक मासूम रंडी बन चुकी हूँ. फिर मैं कपड़े बदल कर सो गई.
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