Thursday, February 22, 2018

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गुजरात में पंजाबन भाभी की चुत गांड को चोदा

गुजरात में पंजाबन भाभी की चुत गांड को चोदा

(Gujrat Me Punjaban Bhabhi Ki Chut Gand Ko Choda)

मेरी पिछली कहानी से आपको पता है कि मैं अब इंडिया में नहीं रहता. मगर यह मेरी इंडियन सेक्स स्टोरी है. मैं जब अमदाबाद में जॉब करता था, तब मैंने एक प्रोफ़ेशनल कोर्स में पार्ट टाइम एडमिशन लिया था, जिसकी क्लास शाम को होती थीं. मैंने एक हफ़्ते देर से दाख़िला लिया था. यह बात 2011 की है.

मैंने क्लास में जाकर देखा कि उधर 20-22 लड़के और 5-6 लड़कियाँ थीं. ज़्यादातर लोग पढ़ाई या जॉब करते थे. पहले थोड़े दिन तो अविवाहित लड़कियाँ ही आई थीं. बाद में एक दिन मैं गया तो देखा कि एक औरत भी आई हुई थी.
सर ने उसका परिचय पूछा तो उसने बताया कि उसका नाम जसप्रीत है. लेकिन वो खुद को प्रीति कहती थी और यही नाम कहलवाना पसंद करती थी.
वो क़रीबन 40 साल के आस पास की होगी और बैंक में जॉब करती थी.

मुझे उसके नाम से ही पता चल गया था कि वो पंजाबी है. क्योंकि न केवल उसके नाम से, बल्कि उसकी बड़ी सी गांड और बड़े बड़े मम्मे भी उसके पंजाबन होने की गवाही दे रहे थे और बाक़ी उसकी बोलने के टोन से भी पता चल रहा था.


मेरा व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली है तो 1-2 लड़कियाँ मेरे पर 2 हफ़्ते में ही लाइन मारने लगी थीं. परन्तु एक दिन मेरी बीवी मेरी कार ले गई थी, तो जब वो मुझे लेने के लिए क्लास में आई तो सब को पता चल गया कि मैं शादीशुदा हूँ. उन तीन लड़कियों ने तो मेरी बीवी से बातें भी चालू कर दी थीं.. जो मुझे पटाने में लगी थीं. इसके बाद तो वे सब कोरी चुत देने में रूचि रखने वाली मुझसे किनारा करने लगीं और सब भोसड़ी वालियां मेरी जगह कुँवारा लंड ढूँढने लगीं.

एक दिन हमारा ग्रुप डिस्कशन था. सबमें 5-5 के ग्रुप बनाए थे.. जिसमें मैं और प्रीति एक ही ग्रुप में थे. बाद में जब हमारे ग्रुप का टर्न आया तो मैंने बोला कि हमारे ग्रुप को प्रीति रिप्रजेन्ट करेगी. यह सुन कर वो थोड़ी चौंक गई और मुझे घूरने लगी, क्योंकि क्लास में उसको सब मैडम ही बुलाते थे. कारण ये था कि सब लड़कियों में वो एक ही औरत थी. हालाँकि मैंने स्वाभाविक ही बोला था, क्योंकि मैं एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में काम करता हूँ और वहां सब एक दूसरे को नाम से ही बुलाते हैं.

मैं उसको टॉपिक ध्यान से समझा रहा था. हालाँकि हमारे ग्रुप में और भी एक लड़की थी, मगर इतनी मस्त आंटी को देख के उसको मैं इग्नोर कर रहा था. मैं जब भी प्रीति के सामने देखता, वो नीचे अपनी कॉपी में देखने लगती.

बातचीत के दौरान मैं उसकी आँखों में आँखें डाल के बात करता था. वैसे लड़कियों को पटाने का मुझे बहुत अनुभव है मगर किसी आंटी के साथ मेरा पहला प्रयत्न था. मेरी पहली गर्लफ़्रेंड भी कहती थी कि तुम्हारी आँखों में आँखें डाल के बात करने की अदा से सामने वाला तुरंत इम्प्रेस हो जाता है.

जब क्लास ख़त्म हुई, उसने मुझसे बोला कि तुमको तो हर विषय का अच्छा ज्ञान है.

मैंने बातों बातों में उससे पूछा तो उसने बताया कि वो वलसाड से अहमदाबाद अभी आई थी. उसके पति वापी में जॉब करते हैं और दस बारह दिन में एक बार आते हैं. फिर 3-4 महीने में उसकी भी ट्रांसफ़र अहमदाबाद हो जाएगी. उसकी एक बेटी काफ़ी सालों से हॉस्टल में माउंट आबू में थी, क्योंकि जॉब की वजह से वो ध्यान नहीं दे पाती.

पन्द्रह दिन ऐसे ही निकल गए. इसके बीच हम बहुत खुल चुके थे. एक दिन रविवार को एक्स्ट्रा क्लास थी क्योंकि कभी बाहर से लेक्चरर आते थे. आज क्लास दस से चार बजे तक की थी. बीच में एक घंटा लंच ब्रेक होता था.

मैंने बाजू के रेस्टोरेंट में लंच लेने का सोचा, तो मैंने उससे पूछा- तुम मेरे साथ लंच को चलोगी?
वो बोली- मैं सुबह पराँठे सब्ज़ी बना के ही आई हूँ. अगर तुम चाहो तो मेरे घर पर लंच पर मुझे ज्वाइन कर सकते हो.
मैंने सोचा चलो आज पंजाबी ज़ायक़ा ले लेते हैं.

वो एक फ़्लैट में किराए पे रहती थी. उसके पास अपनी एक्टिवा थी, मैं अपनी बाइक लेके उसको फ़ोलो करने लगा. उसने बोला कि जब मैं कॉल करूँ तब ऊपर आ जाना. मैं सोच में पड़ गया कि खाना खाने बुलाने में पड़ोसियों को क्या प्रॉब्लम हो सकती है. मेरे दिमाग़ में बत्ती जली कि इसका कोई और प्लान तो नहीं है?

थोड़ी देर में उसने कॉल किया- कोई देख नहीं रहा, आ जाओ.. घर का दरवाज़ा खुला है.
मैं तुरंत ऊपर चला गया. घर काफ़ी अच्छा था.
उसने बोला- तुम फ़्रेश हो लो, मैं खाना लगा देती हूँ.

मैंने टॉयलेट में जाकर अपने लंड को हिला कर बोला- बेटे, आज तुमको पंजाबी चूत दिलाता हूँ.
बाहर आते वक्त मैंने अपना निक्कर थोड़ा नीचे कर दिया. ताकि वो मेरे लंड की भाषा आसानी से पढ़ सके.

खाना काफ़ी ज़ायक़ेदार था. खाना खाने के बाद मैंने बोला- यार आज बहुत धूप है और लेक्चर भी बोरिंग है. मैं तो घर जाकर आराम करता हूँ.
वो बोली- मेरा भी मन नहीं कर रहा, अगर तुम चाहो तो यहीं 1-2 घंटे रुक जाओ.. क्योंकि धूप बहुत है और तुम बाइक लेके आए हो.. टीवी देख लो.
तो मैंने टीवी चालू कर दिया.

वो थोड़ी देर में कपड़े चेंज करके आई. उसने पंजाबी सूट पहना हुआ था और दुपट्टा नहीं होने की वजह से मम्मे उसकी ब्रा को फाड़ने को बेताब थे. उसको देखके मेरा लंड खड़ा हो गया. मैंने तकिया मेरे लंड पे लगा दिया.

अब हम दोनों चाय पीने लगे. मैंने जानबूझ कर अपने पैर को चौड़े कर दिए तो गोल पिलो नीचे गिर गया. अब मेरा टेंट उसके सामने था. हम दोनों के हाथ में चाय थी तो कोई पिलो उठा भी नहीं सकता था.

उसकी नज़र मेरे लंड पे पड़ी और वापस टीवी देखते मुस्कुराने लगी. वो कनाख़ियों से मेरे लंड को बीच बीच में देख रही थी और मैं भी, जैसे कुछ हुआ ही नहीं, ऐसे टीवी देख रहा था.
ये बहुत अच्छा तरीक़ा है, अगर वो चुदवाना नहीं चाहती तो भी आपके पास बहाना होगा ही कि जानबूझ कर नहीं किया.. बस सामने वाली का रिस्पोंस देखो.

मैंने उसको देखा और बाद में मेरे लंड को.. और उसको पता चल गया कि उसकी चोरी पकड़ी गई है. अब लोहा गरम था. मैंने उसके पैरों को अपने पैरों से सहलाया. वो टीवी देखती रही. थोड़ी देर में रिस्पोंस देने लगी. मैंने उसकी गद्देदार जाँघों पर हाथ रख दिया. वो कुछ नहीं बोली, तो मैंने उसके बालों को पीछे कर के उसकी गर्दन पे किस कर दिया.

वो मेरे सामने देख के मुस्कुराने लगी. मेरे लंड से प्रीकम निकल रहा था, जो मेरा पेंट पे निशान बना चुका था. मैंने उसका हाथ लेके मेरे लंड पे रख दिया. वो मेरे खड़े लंड को सहलाने लगी. अब मैं उसके बिल्कुल नज़दीक सट गया और गर्दन के ऊपर से हाथ रख के उसके मम्मों को दबाने लगा. वो दस सेकंड तक कुछ नहीं बोली, सिर्फ आँखें बंद करके बैठी रही और मजा लेती रही.

अचानक झटके से वो मेरी और पलटी और मेरे होंठों को चूसने लगी. उसके होंठ बिल्कुल सुर्ख़ हो चुके थे. दस मिनट तक हम दोनों ऐसे ही चुसाई करते रहे. मैं उसके मम्मों को अपने दोनों हाथों से सहला रहा था और ऊपर से ही उसके निप्पल को मसल रहा था. उसके ग़ुब्बारे जैसे चूचे मेरे दोनों हाथों में भी नहीं आ रहे थे.

अब वो पूरी तरह अपने होश खो बैठी थी और अपनी आँखें मूँदे मजा ले रही थी. एक हाथ से मेरे लंड को ऊपर से ही सहला रही थी और दूसरे हाथ मेरी पीठ पर घूम रहे थे.
मैंने उसके कानों में बोला- सब कुछ सोफ़े पे ही करने का इरादा है क्या?
वो बोली- चलो अन्दर.

अगर कोई लड़की होती तो मैं अपनी गोद में उठाके बेड में ले जाता. मगर ये तो कम से कम अस्सी किलो की थी और मुझे अपनी कमर तुड़वाने का कोई शौक़ नहीं था.

बेड पे जाते समय रास्ते में ही उसने अपना पंजाबी सूट निकाल दिया. वो सिर्फ़, ब्रा और पेंटी में थी. ब्रा उसके जंबो साइज़ के मम्मों को सम्भालने की बेकार कोशिश कर रहा था और पट्टीनुमा पेंटी तो जैसे उसकी चूत और गांड की दरारों में खो ही चुकी थी. मैंने भी अपना शर्ट निकाल दिया.

बिस्तर पे जाते ही ही उसने मुझे धक्का दे दिया और मुझे बिस्तर पे गिरा कर मुझ पे चढ़ गई. मुझे लगा कि मेरी सास बंद हो जाएगी. वो लम्बाई में भी मुझसे दो इंच ज़्यादा ही थी. उसने मेरे लंड और आंडों को ऐसे दबाया कि मेरी चीख़ निकल गई. मगर वो कुछ सुनने के मूड में नहीं थी.

वो अभी जंगली बिल्ली की तरह बर्ताव कर रही थी. उसने मेरे गालों को काटना शुरू कर दिया. मुझे टेंशन हो गया कि अगर गालों पे निशान हो गए तो मैं अपनी बीवी को क्या जवाब दूँगा.
मुझे लगा कि यदि मैंने कुछ नहीं किया तो ये मेरे कंट्रोल में नहीं रहेगी. मैंने पूरी ताक़त से उसको पलट दिया. और उसके ऊपर आ गया.

वो अब शांत हो गई. मैंने उसकी ब्रा को निकाल कर उसके दोनों मम्मों को बारी बारी दबाना और चूसना चालू किया. उसके निप्पल भूरे कलर के और क़रीबन आधे इंच के होंगे और बिल्कुल छोटे बच्चे की नूनी की तरह थे. बीच में उसकी चुत को भी रब कर रहा था.. और उसका लसलसा पानी मेरे हाथों में लग रहा था. पतली सी स्ट्रिप उसकी चुत के पानी को कैसे संभाल पाती. चुत का जूस बाहर बह रहा था.

मैंने अपनी उंगली उसकी पेंटी की स्ट्रिप की साइड से चुत में डाली. चूत गीली होने की वजह से आसानी अन्दर से चली गई. मैंने अपनी उंगलियो का कमाल दिखाना चालू किया और उसका जी-स्पॉट ढूँढ कर मालिश करने लगा.

मेरा एक हाथ उसके निप्पल पे और दूसरा उसकी चूत पे था. इस वक्त वो मेरे पूरे कंट्रोल में थी. मैंने उसके पूरे बदन को निहारा. पंजाबी होने की वजह से पूरा भरा बदन, दूध सा साफ़ रंग, भारी भारी चूचे और उससे भी भारी कूल्हे, गद्देदार दिखने वाली चुत, थोड़ा भारी पेट और उसमें भी गहरी नाभि, जिसमें समझो मैं पूरा खो ही गया था.

मैं उसके पूरे बदन को बेतहाशा चूम रहा था और मेरे पैर भी उसके पैरों की घिसाई कर रहे थे. कुल मिलाकर मेरे पूरे शरीर का हर अंग उसकी सेवा में लगा हुआ था. उसने मेरे निक्कर को पकड़ा और निकाल के मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया. मेरा लंड तो पहले से ही तना हुआ था और प्री कम की बूँदें उसके गुलाबी टोपे पर मोतियों जैसे चमक रही थीं.

उसने मुझे नीचे लेटने को कहा. मेरे लंड को ऊपर नीचे करके अचानक ही अपने मुँह में पूरा उतार लिया और चूसने लगी. मेरा प्री कम निकलते ही अपनी जीभ सुपाड़े के ऊपर घुमाके चाट लेती. वो चूस भी रही थी और मेरी मुठ भी मार रही थी.

मैंने उसको उलटा होने को कहा और वो घूम गई. अब उसके विशाल चूतड़ मेरे मुँह के पास थे और चुत बिल्कुल मेरे मुँह में सामने. चुत पे छोटे छोटे बाल थे शायद कुछ दिन पहले ही उसने अपनी झांटें बनाई होंगी. मैं भला ऐसी रसदार चुत को क्यूँ छोड़ता, उसकी चुत को फैला के अपनी जीभ के करतब दिखने लगा. उसका पानी कुछ खट्टा और खारा, मगर मज़ेदार था.

थोड़ी ही देर में उसने अपने पैर भींचे और मेरे लंड को वैक्यूम क्लीनर के जैसे चूसने लगी और साइड में गिर गई.
वो अब भी मुँह से आ आह आवाज़ निकाल रही थी. पता नहीं जब तक मुठ ना मारूं या चुदाई ना करूँ, मैं कभी चुसाई में झड़ता नहीं हूँ.

अब मैं उसके बाजू में आ गया और वापस उसको गर्म करने की कोशिश करता रहा. मगर वो ऐसे ही बेसुध सी पड़ी रही. मैं भी दस मिनट उसके बदन से खेलता रहा.
थोड़ी देर में वो फिर तैयार हो गई और मुझे अपने ऊपर खींचने लगी.

साली क्या ज़ोरदार आइटम थी. पता नहीं उसका पति उससे कैसे निपटता होगा. मैंने फिर उसकी चुसाई चालू कर दी. साथ में अपनी उंगली भी उसकी चुत में गीली करके उसकी गांड में घुसाता रहा.
अब तो वो बिल्कुल तड़प रही थी और अपने हाथों से मेरे लंड को टटोल रही थी. वो अपने पैर चौड़े करके लेटी हुई थी और मैं उसके पैरों के बीच में था. मैंने अपना लंड उसके हाथों में दे दिया उसने मेरे लंड से अपनी गीली चुत पर मालिश करना चालू कर दिया.
इसके दो फ़ायदे थे, औरत और मर्द के दो सबसे संवेदनशील अंग उसका दाना और मेरा सुपारा आपस में चुम्मा चाटी कर रहे थे.

थोड़ी देर के बाद मेरा लंड पकड़ कर धीरे धीरे अपनी चुत के अन्दर घुसाने लगी. मैंने भी उसका साथ देते हुए हर धक्के पर लंड से चुत पर दबाव बनना चालू कर दिया. उसकी चुत इतनी गीली हो चुकी थी कि बिना मेहनत के लंड सीधा उसकी बच्चेदानी से जा टकराया और उसके मुँह से आह निकल गई ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’

मैंने अब अपने लंड की पूरे छह इंच लम्बाई का और उसकी चुत की पूरी गहराई का इस्तमाल करना चालू कर दिया.

दोस्तो, लंड की पूरी लम्बाई से चुदाई करने का अलग ही मजा है. सुपाड़ा की नोक तक लंड बाहर निकालो और फिर पूरा लंड चुत में पेल दो. फिर देखो लड़की कैसे आहें भरती है.

अब तो हर झटके के साथ उसकी चुत से सफ़ेद पानी मेरे लंड से होते हुए चादर पे फैल रहा था.

मेरे दोनों हाथ उसके बारी बारी एक एक चूचे को मसल रहे थे और मेरे होंठ उसके निप्पल को चूस रहे थे. वो भी मेरे चूतड़ों को पकड़ कर अन्दर की ओर धक्का लगा रही थी और हर धक्के के साथ उसकी आहें निकल रही थीं.
मैंने अब झटकों की स्पीड बढ़ा दी. मैंने उसको पूछा- कहा निकालूँ?
वो बोली- एक मिनट रुको.

वो मेरे ऊपर आ गई और मेरे लंड के ऊपर बैठ कर चूतड़ों को ऊपर नीचे करने लगी. वो मोटी होने की वजह से ज़्यादा स्पीड से नहीं कर पा रही थी, तो मैंने उसको घोड़ी बनाया और चुत में पेलने लगा.
मैंने बोला- कहां निकालूँ?
वो बोली- अन्दर ही निकाल दो.. बड़ा मजा आ रहा है.

उसने कॉपर-टी लगा रखी थी जो उसने मुझे बाद में बताया. मैंने 10-15 धक्का लगाने के बाद उसकी चुत में पिचकारियां छोड़ दीं. उसने मेरी पीठ पे नाख़ून के निशान कर दिए थे.

मगर वैसे मेरी पीठ के नाखूनों के काफ़ी निशान थे तो उसकी मुझे परवाह नहीं थी, क्योंकि मेरी बीवी जब झड़ती है तब नाख़ून गड़ा देती है. कई बार मेरी बीवी मेरी गर्दन पे भी लव बाइट कर देती थी, जिसके कारण मेरे दोस्त काफ़ी मजाक़ उड़ाते थे.

हम दोनों की साँसें और धड़कनें तेज़ चल रही थीं और अभी भी एक दूसरे से चिपके हुए थे. चूँकि हम डॉगी स्टाइल में कर रहे थे, तो वो उलटी लेटी रही और मैं उसके ऊपर उलटा पड़ा रहा. मेरा लंड अभी भी उसकी चुत में था और झड़ने के वजह से धीरे धीरे ढीला होने लगा. मेरा वीर्य बह कर चुत के अन्दर से बाहर निकल रहा था.

वाह क्या नज़ारा था.. आज एक 40 साल की औरत तो संतुष्ट किया था.

मैं उसकी बहती हुई चुत से मेरे वीर्य को लेके उसकी चुत पर मालिश करने लगा. पाठिकाएं अपनी चुत पे वीर्य से मालिश करवाएं. देखिए, ये कोई भी लुब्रिकेंट से ज़्यादा चिकना होता है और भरपूर मजा देता है.

अब मैंने आफ़्टर प्ले करना चालू कर दिया. मैं उसके मम्मों को चूस रहा था और वो मुझे एक बच्चे की तरह अपना दूध पिला रही थी. थोड़ी देर में हम एक दूसरे से अलग हुए. मैंने उसकी चुत पे मालिश करना चालू रखा.

वो मेरे छाती के बालों से खेलती रही और बोली- आज तुमने मुझे बहुत मजा दिया है. किसी ग़ैर मर्द के साथ ये मेरा पहला सेक्स है.

थोड़ी देर में वो वापस मस्ती में आ गई. मेरे लंड को सहलाकर मुठ मारने लगी. मेरी चमड़ी नीचे करके टोपे पे जीभ फिराने लगी. मेरा लंड अपने उफान पे वापस आ गया था. लंड की नीली नसें उभर के साफ़ दिखने लगी थीं.

मुझे लग रहा था कि दूसरी बार की चुदाई में उसकी चुत का भोसड़ा बनेगा या उसकी गांड की माँ चुदेगी.

मैंने उससे बोला कि मेरे लंड का स्वाद चखने से तुम्हारा एक होल बाक़ी रह गया है.
वो पहले मना करने लगी, फिर बोली कि तुमको गांड में डालना पसंद है तो तुम्हारा साथ दूँगी. मेरा भी बहुत मन था. मेरे पति ने एक बार ट्राई किया था मगर अन्दर जा नहीं सका था.

उसके पति का लंड मोटा मगर ज़्यादा सख़्त ना होने की वजह से अन्दर डाल नहीं सका था.

मैं बिस्तर के नीचे खड़ा रह गया. प्रीति को को बेड के कोने पे पीठ के बल लिटाया, पैर को चौड़ा किया और उसके पैरों को चौड़ा करके मेरे कंधों पर डाल लिया. उसकी गांड बिल्कुल मेरे लंड के सामने थी. उसकी गांड को देखा. छेद की सिलवटें साफ़ दिख रही थीं तो मुझे लगा कि ज़्यादा मुश्किल नहीं आएगी. उसकी गांड के छेद पे उंगली फिराई. उसकी गांड का छेद एकदम कड़क और किरकिरा सा था. उसकी चुत के पानी से उंगली गीली करके उसकी गांड में धीरे धीरे डालने लगा और दूसरी उंगली से उसकी चुत के दाने को सहलाने लगा.

मुझे पता था कि कुँवारी गांड फाड़ना कुँवारी चुत फाड़ने से ज़्यादा मुश्किल है. थोड़ी देर में उंगली उसकी गांड में आसानी से अन्दर बाहर होने लगी. मैंने लंड उसकी चुत में डालकर गीला किया. उसकी गांड पे थोड़ा थूक लगाया और धीरे धीरे उसकी गांड में घुसेड़ने लगा.

वो दर्द से कराहने लगी. मगर गांड के दूसरे छल्ले ने जैसे ही मेरा सुपारा निगला, उसने आराम की साँस ली. थोड़ी देर में मैंने अपना पूरा लंड अन्दर घुसा दिया और ऐसे ही खड़ा रहा.

एक हाथ उसकी चुत को और एक हाथ उसके चूचे को मसल रहा था.

दोस्तों ये एक भ्रामक ख़याल है कि गांड मारने के सबसे आसान तरीक़ा डॉगी स्टाइल है. मैंने बताया तरीक़ा सबसे आसान है. गांड के दो छल्ले होते हैं, एक जो बाहर हमको दिखता है और दूसरा उससे क़रीबन आधे इंच अन्दर होता है, जिसको आपका सुपाड़ा पार कर जाए, बस आपका काम हो गया.

थोड़ी देर में वो अपनी गांड हिलाने लगी तो मैंने भी धक्के मारना चालू किए. थोड़ी देर में गांड मेरे लंड को आसानी से निगलने लगी. बाद में मैंने उसको कुतिया बनाया और मैं बेड पर घुटनों के बल आ गया. अब लंड एक ही झटके में अन्दर चला गया.

बीच बीच में उसके सफ़ेद गद्देदार कूल्हों को अपने हाथ से मसलता, कभी कभी एक चपत के लगा देता.

चूंकि ये दूसरी बार की चुदाई थी, सो 15 मिनट तक चुदाई करने के बाद वो गिड़गिड़ाने लगी- अब तो झड़ जाओ.. गांड में जलन हो रही है.

कुछ और झटके के बाद में गांड में ही झड़ गया. थोड़ी देर में लंड ढीला हो गया और पट्ट आवाज़ के साथ बाहर निकला, लंड निकलते ही उसकी पाद निकल गई. मेरी हँसी छूट गई और वो शर्मा गई.

हम ऐसे ही लेटे रहे. मुझे थकान की वजह से झपकी लग गई थी. जब मैं सो रहा था तो उसने तब तक नहा के फ़्रेश होके शरबत भी बना लिया था.

थोड़ी देर बाद वो उठी और मुझे उठाया. मैं फ़्रेश हुआ वो बेड पे ही शरबत लेके आई. फिर एक घंटे कुछ पर्सनल बातें भी शेयर की. थोड़ी देर एक दूसरे के बदन से खेलते रहे. मगर अब मेरी बिल्कुल ताक़त नहीं थी. मेरा क्लास ख़त्म होने का समय हो गया था. मैंने कपड़े पहने, उसको लिप किस की और उसने बाहर देखा कि कोई पड़ोसी देख तो नहीं रहा. उसने मुझे इशारा किया और मैं फटाफट लिफ़्ट में चला गया.

उसके बाद हमने कई बार मज़े किए. यूँ बोलो कि हर संडे को चुदाई होती थी. जब तक प्रीति के पति का ट्रांसफ़र अहमदाबाद नहीं हो गया.. तब तक ये सिलसिला चलता रहा. वो मेरी बीवी की तरह बन के रही.

हालाँकि अब हमारा कोई सम्पर्क नहीं है. लेकिन वो पंजाबी चुत आज भी याद है.
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