Friday, February 23, 2018

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पंजाबन लड़की की गांड चोदन कहानी

पंजाबन लड़की की गांड चोदन कहानी

(Punjaban Ladki Ki Gand Chodan Kahani)

हैलो साथियो, मेरा नाम गगनदीप कौर है। मेरा कद 5’10” है.. मेरा शरीर भरा हुआ है.. एकदम गोरा-चिट्टा। मैं पंजाब की रहने वाली हूँ.. कमीज़-सलवार ही पहनती आई हूँ.. जीन्स का मुझे कोई शौक नहीं है।

यह कहानी उस वक्त से शुरू होती है जब मैं अपनी पढ़ाई कर रही थी। मेरी गाण्ड पीछे को निकलने लगी थी और मम्मे एकदम फूल गए थे.. टाइट भी हो गए थे। मेरी गोरी टांगों पर छोटे-छोटे बाल आने शुरू ही हुए थे.. और बगलों पर भी सुनहरे रेशमी बाल आने लगे थे। मैंने वैक्सिंग नहीं करवाई थी।

हमारे घर एक में नौकरानी रहती थी जिसका एक बेटा था.. उसका नाम श्याम था। उसकी हाइट 5’1″ थी.. वो भी अपनी माँ के साथ आ जाता था। उसकी माँ काम करने लगती और वो मेरे साथ कैरम खेलने लग जाता।

एक दिन मैं कॉलेज से वापिस आई.. मैं अपने कमरे में कपड़े चेंज करने चली गई। मैंने पहले अपनी कमीज़ उतारी.. फिर वाइट ब्रा का हुक खोला.. मैं अभी सलवार का नाड़ा खोल ही रही थी कि मेरी नज़र दरवाजे पर पड़ी, मैं देख कर शॉक हो गई कि श्याम वहाँ पर खड़ा मुझे देख रहा है.. उसने अपना एक हाथ पैन्ट पर रखा था।
मैंने झट से अपने ऊपर तौलिया ले लिया.. वो भी मुझे देखता पा कर वहाँ से चला गया।

फिर रात को मैंने उसे अपने कमरे में बुलाया.. वो बहुत डरा हुआ था।
मैं- आज तुम क्या देख रहे थे.. बताओ तुम्हें शर्म नहीं आती?
वो- सॉरी दीदी.. आगे से नहीं देखूँगा..
मैं- यह सब अच्छा नहीं है.. तुमने यह सब क्यों किया?
वो- दीदी.. वो.. मुझ.. मुझे आप बहुत सुंदर लगती हो।


मैं तो शॉक सी हो गई.. मैंने सोचा शायद यह अभी नई जवानी का असर है।
मैं- अच्छा.. तो मैं क्या करूँ?
वो- दीदी मुझे आपको नंगी देखना है प्लीज़ एक बार।

मैंने सोचा शायद इस लौंडे को मुझ पर प्यार आ गया है। मेरी भी जवानी मुझे कुछ हरामीपन करने को खींचने लगी।
मैं- ओके, ठीक है।
मैंने झट से अपने कपड़े उतार दिए.. मैं एकदम नंगी हो गई।

वो मुझसे हाइट में काफ़ी छोटा था इसलिए मैं नीचे बैठ गई। उसने मुझे जफ्फी डाल ली.. उसका लण्ड भी एकदम कड़क हो गया। फिर उसने भी अपने कपड़े उतार दिए और नंगा हो गया।
मुझे मजा आ रहा था तो हम दोनों बिस्तर पर आ गए.. मैं बिस्तर पर लेट गई।

वो मेरे जिस्म को चूमने लगा, उसने कहा- मुझे आपसे ‘करना’ है।
मैं- लेकिन नहीं.. मैं अभी कुंवारी हूँ.. मैं नहीं कर सकती।
वो ज़िद करने लगा.. मैंने उसे बहुत समझाया.. लेकिन वो अपनी ज़िद पर अड़ा रहा।

वो- तो दीदी, अपनी गाण्ड मरवा लो प्लीज़।
मैं- नहीं.. उसमें बहुत दर्द होगा.. वो भी कुंवारी है।
वो रोने लगा.. मैंने डिसाइड किया कि गाण्ड ही मरवा लेती हूँ। मुझे पता था कि गाण्ड की गली चूत से भी टाइट होती है.. दर्द होगा.. लेकिन मैं अपनी जवानी की आग से मजबूर हो गई थी।
फिर मैं राजी हो गई।

उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा.. मैं घोड़ी बन गई। वो मेरी बैक पर आ गया। उसने अपने लण्ड को मेरी गाण्ड पर एड्जस्ट किया.. और धकेलने लगा.. लेकिन उसका लौड़ा अन्दर नहीं गया।
मुझे दर्द होने लगा.. मैंने उसे टेबल से तेल लाकर दिया।

मैंने अपनी गाण्ड को हाथों से खोला उसने काफी सारा तेल अन्दर तक डाल दिया, फिर लण्ड को छेद पर रखा.. मेरी गाण्ड एकदम टाइट थी। मेरी गाण्ड में बाल भी आए हुए थे.. मुझे पता था कि इनकी वजह से काफ़ी दर्द होगा। फिर उसने लण्ड को अन्दर किया.. मुझे उसका लण्ड अन्दर जाता फील हुआ।

उसने और एक धक्का दिया.. मुझे दर्द होने लगा. मेरी गाण्ड को चीरता हुआ उसका लण्ड आधा अन्दर चला गया. मेरे रोंगटे खड़े हो गए। मैंने अपना मुँह तकिया में दबा लिया और चादर को कस कर पकड़ लिया।

उसने और ज़ोर लगाया.. लण्ड पूरा अन्दर तक ठेल दिया। मेरी आँखों में पानी आ गया। मैं रोने लगी.. लेकिन मैंने अपनी आवाज़ बंद रखी। उसने अपना लौड़ा धीरे से बाहर किया और फिर अन्दर पुश किया।

अब वो मस्ती में अन्दर बाहर करने लगा, उसकी साँसें तेज हो गई थीं.. उसके मुँह से मज़े की सिसकारियाँ निकल रही थीं। मेरी गाण्ड के बालों ने मेरी आँखों से आंसुओं की नदी बहा दी। उसके मोटे लवड़े की वजह से फँस-फँस कर अन्दर बाहर हो रहा था।

तभी उसके मुँह ‘अहह.. दीदी… ईईईई..’ निकला, उसने अपना पूरा लण्ड अन्दर कर दिया और एक पिचकारी मेरी गाण्ड के अन्दर निकाल दी। उसने फिर पीछे करके लण्ड अन्दर पेला और सारा पानी अन्दर ही निकाल दिया। मुझे उसका पानी अपनी गाण्ड में गहराई तक जाता महसूस हुआ। मेरी गाण्ड एकदम गरम सी हो गई थी।
फिर वो ऊपर से नीचे उतरा और चला गया।

इस घटना के बाद मुझे काफी ग्लानि हुई और मैंने उस नौकरानी के विषय में उल्टा-सीधा कहना शुरू कर दिया और उसको अपने घर से दूर कर दिया ताकि श्याम से मेरा अब किसी भी तरह से मिलना संभव नहीं हो सके।
इसके कुछ समय बाद मुझे अपने शहर से बाहर पढ़ने जाना पड़ा और अपनी जवानी की इस भूल को मैं भूल गई।

दोस्तों मेरे जीवन की इस घटना ने मुझे भविष्य में क्या हासिल होने वाला था.. इसको मैं पूरी सच्चाई से आप सबके सामने लिखने का प्रयास कर रही हूँ.

यह अगली घटना तब की है जब मैं 27 की थी और मेरी शादी जम्मू में कर दी गई थी। शादी के अगले दिन ही मेरे पति को ज़रूरी काम आ गया.. वो अगले दिन ही यूपी चले गए। मैं परेशान सी हो गई। मैं सेक्स के बारे में नहीं सोचती थी.. मुझे इतना पता था कि मेरे पति मेरे बिना कितने बैचन हो रहे होंगे।

फिर अगले दिन मैंने सोचा कि पति को फोन करती हूँ.. क्योंकि मैंने लाल रंग का चूड़ा.. हाथों-पैरों पर मेहंदी और झांजरें डाली हुई थीं, मैं नई दुल्हन बन कर आई थी।
तभी मेरे पति का फोन ही आ गया, उन्होंने कहा- तुम भी यहाँ ही आ जाओ.. मुझे काफी दिन लग जाएँगे।
मैंने अपनी सास को बताया.. उन्होंने कहा- चली जाओ.. कोई बात नहीं।

मेरा एक भतीजा भी था.. जो अभी 18 साल का था.. वो 12वीं में पढ़ता, वो मुझसे उम्र में काफी छोटा था.. उसकी हाइट 5’2″ थी.. वो मुझे चाची जी कह कर बुलाता था। वो भी मेरे साथ जाने की ज़िद करने लगा।
सकी माँ ने समझाया.
फिर मैंने कहा- दीदी कोई बात नहीं.. जाने दो।

वो बहुत खुश हुआ.. और मेरे साथ चल पड़ा। मैंने सोचा चलो अपने भतीजे का तो साथ बना। उसका नाम रविंदर था.. मैं उसे रवि कह कर बुलाती थी।

फिर हम लोग रात तक अम्बाला पहुँच गए। यहाँ से हमारी ट्रेन अगली सुबह की थी.
रवि- चाची जी.. क्यों ना हम आराम कर लें.. बहुत रात हो गई है।

मैंने भी उसकी बात पर खुद के बारे में सोचा कि एक तो मैंने ग्रीन कलर का कमीज़-सलवार पहना हुआ था और मैं एकदम दुल्हन की तरह सजी हुई थी। जब मैं चलती.. तो पैरों से झांजरों की आवाज़ आती..
मैं- हाँ रवि.. हम लोग एक रूम किसी होटल में ले लेते हैं।

स्टेशन के पास एक होटल में जाकर हमने कमरा ले लिया।

रूम बहुत अच्छा था डबलबेड था.. रजाईयाँ भी थीं.. क्योंकि जनवरी का महीना था।
हमने होटल के रेस्टोरेंट में खाना खाया।

मैं- रवि तुम्हें कुछ और तो नहीं चाहिए?
वो- नहीं चाची जी.. अब सोने चलते हैं।
मैं- ओके जी चलो।

हम लोग सोने के लिए अपने कमरे में चले गए.. रज़ाई एक ही थी काफ़ी बड़ी थी। रात को सोने से पहले मैंने सबको फोन करके बता दिया कि हम दोनों होटल में रुके हैं.
फिर मैंने लाइट ऑफ की.. और सो गई। मैंने अपनी पीठ रवि की तरफ की हुई थी।

थोड़ी ही देर बाद रवि ने मुझे पीछे से कस कर चिपका लिया। मैं एकदम शॉक सी हो गई.. मैंने सोचा बच्चा है.. कोई बात नहीं।
पर फिर उसने अपने हाथ मेरे मम्मों पर रख दिए और नीचे से मेरी गाण्ड पर रगड़ने लगा।

मैं पीछे मुड़ी.. तो देखा उसने अपनी पैन्ट उतारी हुई थी और अपने लण्ड को मुठिया रहा था। मुझे देख कर उसने झट से पैन्ट पहन ली।
मैं- यह क्या कर रहे हो?
वो चुप रहा.. उसने अपना मुँह नीचे कर लिया।

मैंने थोड़ा गुस्से में कहा- अभी तुम्हारी मम्मी को बताती हूँ।
वो- नहीं चाची जी, प्लीज़ मत बताओ।
वो रोने लगा।
मैं- तो फिर बताओ.. तुमने ये सब इतना गंदा कहाँ से सीखा?
वो- मैंने एक गंदी फिल्म देखी थी.. इसलिए मैं गलत सोचने लगा था।

मैंने सोचा.. और अनुभवी होने के नाते मुझे पता था कि इस नई उम्र के लड़कों में काम-शक्ति बढ़ने लग जाती है।
मैंने कहा- आगे से नहीं करना.. ओके।
उसने मुँह लटका लिया और चुप सा हो गया।

मैं- क्या हुआ.. मैंने कुछ ग़लत कह दिया?
मैं उसे नाराज़ नहीं करना चाहती थी तो मैं उसे मनाने लगी।

वो- चाची प्लीज़ मुझे आपके साथ करना है.. आप बहुत हॉट हो।
मैं यह सब सुनकर फिर से शॉक रह गई।
मैं- नहीं.. मैं तुमसे बड़ी हूँ.. मेरी तो अभी शादी ही हुई है.. जब तुम्हारी होगी.. तुम अपनी वाइफ से कर लेना.. ओके।
मैंने देखा उसका लण्ड पैन्ट में खड़ा हुआ था।

उसने बड़ी मासूमियत से कहा- चाची शादी तो बाद में होगी.. आज तो आप मेरे साथ आज की रात में हो ही.. प्लीज़ चाची एक बार।

मैंने उसे बहुत समझाया पर.. शायद जवान होने के कारण उसमें मुझे देख कर कामवासना ज़्यादा चढ़ गई थी। मुझे आज फिर से अपनी नौकरानी के बेटे श्याम की याद हो आई थी। मेरी चूत भी फड़क उठी तो मैंने कहा- ठीक है लेकिन किसी को बताना नहीं ओके।
वो- ओके चाची जी।

वो बहुत खुश हुआ.. उसने अपने सारे कपड़े उतार दिए.. वो एकदम नंगा हो गया। मैंने सोचा इसे तो शर्म भी नहीं.. कैसा मस्त लड़का है यह… मैंने मुस्कराते हुए कहा- अरे यह क्या रवि.. तुमने सारे कपड़े उतार दिए.. तुम बहुत गंदे हो।

उसने सिर्फ़ नीचे निक्कर ही पहनी थी। उसमें उसका लंड खड़ा हुआ था।

वो- अरे चाची जी शर्म की क्या बात.. आप और हम ही तो हैं।
मैं- अच्छा.. भतीजे जी.. अपने यह सब कहाँ से सीखा.. बताओ।
वो- वो.. चाची.. मैंने एक गंदी फिल्म देखी.. तभी से मेरा मन करने लगा।
मैं- रवि यह सब नहीं देखते.. अभी इन सब चीज़ों में बहुत टाइम पड़ा है।
मैंने उसे समझाते हुए कहा।

वो- लेकिन चाची जी आज मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है।
फिर उसने अपनी पैन्ट भी उतार दी..

मैं मुँह पर हाथ रख कर हँसने लगी। उसका लण्ड एकदम खड़ा हुआ था.. उम्र के हिसाब से काफ़ी बड़ा और लंबा था, उसके लण्ड पर अभी तक एक भी बाल नहीं था.. ना ही शरीर पर.. उसका रंग मुझसे काला था।

मैंने अभी तक कपड़े नहीं उतारे थे।
वो बोला- अरे.. चाची जी यह क्या.. आप भी कपड़े उतारो ना।
मैं- नहीं.. पर..
वो- नहीं चाची उतारो प्लीज़।

कह कर वो मेरे पीछे आकर मेरी कमीज़ की जीप खोलने लगा। मैंने उसे हटाया और कहा- रुक.. उतार देती हूँ।
यह कह कर मैंने अपनी कमीज़ उतार दी। नीचे वाइट ब्रा थी। फिर उसने मेरी ब्रा खोलने की कोशिश की.. पर वो बहुत टाइट थी.. सो उससे नहीं खुली। फिर मैंने अपने हाथों से वो भी खोल दी।

मेरी ब्रा के खुलते ही.. वो मेरे गोरे बदन पर टूट सा पड़ा। मुझे पता था कि इस उम्र के लौंडे के अन्दर एकदम ताजगी भरा जोश होता है और इस उम्र में उनकी उत्तेजना बहुत अधिक होती है।

फिर उसने मुझे सलवार उतारने को कहा। मैं पहले तो ना करती रही.. पर मेरा भतीजा ही इतना ज़िद्दी था.. कि मुझे उतानी ही पड़ी।

अब मैं 27 साल की पकी हुई जवान माल.. एक 18 साल के गर्म लौंडे के सामने पूरी नंगी हो चुकी थी।

वो- चाची जी आपने हाथों.. बांहों और पैरों पर मेहंदी और चूड़ियाँ क्यों पहनी हैं?
मैं- अरे शादी के बाद दुल्हन यह सब पहनती है।

मेरे हाथों से लेकर पूरी बांहों पर लाल गहरी मेहंदी लगी हुई थी। नीचे पैरों से लेकर.. घुटनों तक मेहंदी लगी थी। हर एक पल मेरी पायल और चूड़ियाँ छन-छन कर रही थीं।

मेरे गोरी टांगों पर कुछ बाल भी थे और बगलों पर भी.. क्योंकि वैक्सिंग को कुछ दिन हो गए थे.. तब भी मैं काफ़ी सेक्सी लग रही थी।

फिर उसने मेरे सिर के बाल भी खोल दिए।
वो- चलो चाची जी.. बहुत मन कर रहा है।
यह कहते ही उसने मेरी टांगों को ऊपर तक उठा दिया।

फिर मैंने उससे कहा- रूको यार.. मैं यह सब नहीं कर सकती।
वो- क्यों चाची?
मैं- क्योंकि अभी तक मैं कुंवारी हूँ और अभी तो तुम्हारे चाचा ने भी मेरे साथ कुछ नहीं किया.. वो नाराज़ हो जाएँगे..

वो फिर मुँह लटका कर चुप सा हो गया। फिर कुछ सोचने के बाद उसने पूछा- चाची, एक बात बताओगी?
मैं- हाँ जी बोलो?
वो- चाचा आपके कौन से छेद में डालेंगे?

मैं बेसमझ सी जरूर हो गई.. पर मेरी गाण्ड में कुलबुली मचने लगी थी।
मैं- मतलब.. मुझे समझ नहीं आया रवि?
वो- चाची जी मैंने फिल्म में देखा था कि लड़की के दो छेद होते हैं।
मैंने उससे कहा- चाचा मेरे आगे वाले में डालेंगे.. पर क्यों पूछा?
वो- तो चाची मैं पीछे से कर लेता हूँ।

मैं फिर मजे में गनगना उठी, एक बार फिर मेरी गाण्ड बजने की स्थिति बन रही थी।

मैं- अरे बुद्धू.. कोई पीछे भी डालता है.. यहाँ नहीं डालते.. तुम अभी नासमझ हो.. तुम्हें शायद पूरी जानकारी नहीं है।
वो- नहीं चाची.. डालते हैं.. मैंने फिल्म में देखा था.. प्लीज़ चाची।

मैं मचलने लगी कि यह तो सैट ही हो गया। हालांकि मुझे पता था कि गाण्ड की कसावट चूत से भी ज्यादा टाइट होती है। अब उसे खुश करने के लिए.. और खुद की पिपासा के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा।
मैं- नहीं.. मैं नहीं करूँगी.. बहुत दर्द होता है.. तुम रहने दो।
वो नाराज़ हो कर लेट गया।

फिर थोड़ी देर मैंने उसे मनाया- देखो रवि.. वैसे तो यह सब अपनी चाची के साथ नहीं करते.. पर मैं तुम्हें मौका दे रही हूँ.. ओके नाराज़ मत हो मुझसे।
वो खुश हो गया और मेरे होंठों पर किस कर दी, मेरी थोड़ी सी लिपस्टिक उसके होंठों पर लग गई।
वो- चाची, आपको बहुत दर्द होगा क्या?
मैं- कोई बात नहीं तुम कर लो.. ओके.. लेकिन ध्यान से.. ये मेरा पहली बार है।

जबकि आपको मैंने बताया था कि मेरी बजी हुई थी। इतने दिनों के बाद मेरी गाण्ड एकदम अन्दर से फिर से जुड़ गई थी.. कुँवारी और टाइट जैसी हो गई थी.. शायद शादी के बाद सबसे पहले मेरी गाण्ड मारी जाएगी.. यही मेरी किस्मत में लिखा था।

दोस्तो, मेरे जीवन की इस होने वाली घटना से मुझे भविष्य में क्या हासिल होने वाला था.. इसको मैं पूरी सच्चाई से आप सबके सामने लिखने का प्रयास कर रही हूँ तथा अगली कड़ी में आपसे पुनः मिलती हूँ.. तब तक के आपसे विदा चाहती हूँ। मुझसे अपने विचारों को साझा करने के लिए ईमेल कीजिएगा.. मुझे इन्तजार रहेगा.. बस अपनी भाषा को सभ्य रखिएगा।

मैं- पहले दरवाजे को डबल लॉक करके आओ।
वो गया.. फिर उसने कमरे की डिम लाइट जला दी।
मैं- अब क्या करना है बताओ?
वो- चाची आप घोड़ी की तरह हो जाओ।

मैं वैसे ही हो गई.. वो मेरे पीछे आकर खड़ा हो गया।

वो- चाची कोई क्रीम है क्या आपके पास?
मैं- नहीं.. लेकिन आयल है।

वो खुश हुआ.. और बोला- लाओ चाची मुझे दो।

मैंने अपने सामान से हेयर आयल की छोटी बोतल निकाल कर उसे दे दी।

फिर उसने आयल को मेरी गांड के अन्दर तक लगा दिया और फिर गांड को दोनों हाथों से खोला।

वो- चाची जी.. आप अपने हाथों से गांड को खोल कर रखो.. मैं अन्दर तेल डालता हूँ।
मैंने वैसे ही किया। तेल मेरी गांड के अन्दर तक जाता हुआ मुझे फील हुआ।

उसने बोतल साइड पर रख दी। फिर वो अपने लंड को मेरी गांड पर घिसने लगा.. मुझे उसका लंड काफ़ी सॉफ्ट सा लग रहा था। लौड़ा रगड़ते हुए उसने लंड को एक जगह पर रोक दिया.. और थोड़ा सा आगे को पुश किया।

मुझे उसका लंड अन्दर जाता फील हुआ.. कमरे में पूरा सन्नाटा छाया हुआ था। मैंने एक लंबी साँस ली और एकदम सावधान सी हो गई।
उसने थोड़ा सा और धक्का लगाया.. लंड और अन्दर चला गया।
मुझे थोड़ा सा दर्द हुआ.. मेरे मुँह से ‘आह…ह..’ निकल गई।

कमरे में सिर्फ़ उसकी तेज साँसें और मेरी साँसें चल रही थीं। वो कभी-कभी सिसकारियाँ भी ले लेता।
उसने अपने लंड को बाहर निकाला और उसने फिर से ट्राइ किया.. इस बार लंड आधा अन्दर चला गया था। मेरी जान निकल रही थी.. मेरी टांगें हिलने से पायल की आवाज़ भी आ जाती.. जिससे वो थोड़ा जोश में आ जाता, उसने लंड को अन्दर करने के लिए और ज़ोर लगाया। लंड मेरी टाइट गांड को चीरता हुआ अन्दर जा रहा था।

मैंने तकिया पकड़ लिया और उस पर अपना मुँह दबा लिया.. ताकि मेरी आवाज़ बाहर ना चली जाए।
उसने लंड को आधे से ज़्यादा अन्दर कर दिया.. मेरी आँखों में पानी आने लगा, मेरी गांड में बहुत दर्द हो रहा था, मैंने बेडशीट कस कर पकड़ ली और दाँतों से तकिया दबा लिया।

फिर मैंने अपने दोनों हाथ पीछे ले ज़ाकर गांड को खोला, उसने अपने दोनों पैरों को मेरी टाँगों पर रख दिया, वो पूरा ज़ोर लगा कर लंड को अन्दर करने लगा, उसके पैर मेरे टांगों से एकदम चिपके होने के कारण स्लिप नहीं हो पा रहे थे।

तभी मुझे उसके आंड अपनी गांड पर बजते हुए महसूस हुए.. जिससे मुझे यकीन हो गया कि उसका लंड पूरा अन्दर चला गया है।
दो मिनट रुकने के बाद.. उसने मेरी पीठ पर किस किया और लंड को बाहर निकालने लगा, मुझे हद से ज़्यादा दर्द होने लगा.. मेरी गांड की चिपकन फिर से खुल चुकी थी.. गांड थोड़ी खुल गई थी।

उसने धीरे से अपना लौड़ा अन्दर बाहर करना शुरू किया। मेरी गांड अन्दर से गर्म हो चुकी थी, मैंने रोते हुए कहा- ओह.. आउच.. उम्म्ह… अहह… हय… याह… प्लीज़ रवि.. रुक जाओ।
लेकिन वो तो मज़े से मेरी सवारी कर रहा था, उसने अपनी थोड़ी स्पीड बढ़ा दी, मैंने बेडशीट कस कर पकड़ ली.. और अपने मुँह को पूरा दबा लिया, कमरे में मेरी चूड़ियाँ और झांजरों की छन-छन सी होने लगी।

वो मेरे ऊपर पूरी तरह सवार हो गया और अपने खड़े लंड को धक्के मार कर मेरी गांड में ‘इन-आउट’ कर रहा था। मेरी गांड की टाइट ‘रेक्टम’ और ‘मसल्स’ उसके लंड को मज़ा दे रही थीं।
मैंने सोचा कि अब यह नहीं हटेगा… उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं.. उसे बहुत मज़ा आ रहा था और नीचे मेरा बुरा हाल हो रहा था, उसका लंड फँस फँस कर अन्दर बाहर हो रहा था।

मैं- ओह माय गॉड.. प्लीज़ रवि.. सहन नहीं हो रहा.. प्लीज़ बस करो।
पर उसने मेरी एक ना सुनी बल्कि उस साले ने अपनी स्पीड और तेज कर दी। उसके आंड मेरी गांड से खूब जोर से टच हो रहे थे। उसने अपने हाथ आगे लाकर मेरे मम्मों को पकड़ लिया और अपनी स्पीड बढ़ा दी।

फिर थोड़ी देर बाद उसके मुँह से ‘अहह.. चाची.. ओहह..’ निकला… उसने अपना गरम पानी मेरी गांड के अन्दर निकालना शुरू कर दिया।
मुझे तो एकदम बहुत दर्द हुआ.. लेकिन मैं बर्दाश्त कर गई।
उसका पानी काफ़ी गरम और गाढ़ा था.. ऐसा लग रहा था.. जैसे कोई खाली बॉक्स को क्रीम से भर रहा हो।

करीब 15 सेकंड तक उसने मेरी गांड अन्दर तक भर दी थी। फिर वो मेरे ऊपर ही लेट गया। थोड़ी देर में उसके उतरने के बाद मैंने अपनी गांड अन्दर से कस ली.. ताकि उसका पानी बाहर ना निकल जाए।

फिर उसने मेरी तरफ देखा तो.. मेरे गीले हुए चेहरे को देख कर कहने लगा- चाची आप रो रही हो?
मैं- नहीं.. बस वैसे ही..
वो- सॉरी चाची।
मैं- इट्स ओके.. मज़ा आया क्या?
वो- बहुत मज़ा आया चाची।

रवि का देसी लंड श्याम के लंड से बहुत मोटा था इसलिए मुझे दर्द भी ज्यादा हुआ।
मेरे आंसुओं से तकिया भी गीला हो गया था, उस पर मेरी लिपस्टिक भी लगी थी।

मैंने देखा उसके लंड पर बालों के छोटे-छोटे टुकड़े लगे हुए थे, मैंने सोचा यह मेरी गांड के बाल होंगे।

फिर हम लोग सो गए और अगली सुबह उसने एक बार फिर मेरी गांड मारी।
उसके बाद हम चले गए।

यह मेरी सच्ची घटना है इस पर आप जो कहना चाहें.. स्वागत है.. पर प्लीज़ मुझसे ये न कहें कि मेरे साथ चुदा लो।

इस घटना के बाद मेरा भतीजा अपने गाँव वापिस चला गया था और मैं अपने पति के साथ अपनी जिन्दगी गुजारने लगी थी।

आज मेरी उम्र 30 साल हो गई है.. मेरे दो जुड़वां बच्चे हैं.. एक लड़का और लड़की। मैं कद में काफ़ी लंबी हूँ.. मेरी हाइट 5’10” है। मेरे मम्मे भी काफी बड़े हो गए हैं और एकदम गोरे-चिट्टे हैं। मेरे मम्मे ढीले नहीं हैं बल्कि ठोस और बहुत कसे हुए हैं।

मैं हमेशा कमीज़-सलवार ही पहनती हूँ और नीचे वाइट ब्रा पहनना मुझे पसंद है।

मेरे पति का कारोबार कमजोर हो गया और वे एक छोटी सी कम्पनी में मैनजर हो गए हैं। हमारे ऊपर 15 लाख का क़र्ज़ पड़ा हुआ था। वो क़र्ज़ देने वाला आदमी हमें इस कर्जा को चुकाने के लिए दो साल का समय दे चुका था.. लेकिन हम उसका क़र्ज़ लौटा नहीं पाए थे।

रवि, मेरा भतीजा.. वो पट्टी गाँव में रहता है जो कि मेरे शहर से करीब 38 किलोमीटर दूर है। उसके माँ-बाप ने उसे आगे पढ़ने के लिए मेरे पास आज ही भेजा हुआ था।
जब मेरा भतीजा कहीं गया हुआ था तो तब वो आदमी हमारे घर आ गया.. मैं अकेली ही थी।
उस आदमी के आते ही मैंने सिर पर चुन्नी ले ली।

उसने पैसों के बारे में पूछा.. मैंने कहा- अभी तो नहीं हैं।
उसने कहा- अगर नहीं है.. तो ये घर आज शाम तक खाली कर देना।
मैं तो डर सी गई, मैंने हाथ जोड़े और कहा- प्लीज़ कोई और सेवा बता दीजिए.. घर खाली नहीं कर सकते।

कुछ देर सोचने के बाद वो बोला- तो ठीक है.. अगर अप एक रात मेरे साथ बिताएँगी.. तो मैं पांच लाख तक माफ़ कर दूँगा।
मैं पहले तो गुस्से में आ गई.. लेकिन फिर मैंने सोचा मेरी तो शादी भी हो चुकी है.. फिर एक रात से अगर पांच लाख माफ़ हो जाएँगे.. तो इसमें क्या बुराई है।
मैंने उनसे कहा- ठीक है.. मैं सोच कर बताती हूँ।

जब उन्होंने मेरी रजामंदी सी देखी तो खुल कर कहा- मैं तुम्हारी गांड मारूँगा.. मुझे सिर्फ़ तेरी गांड ही चाहिए और कुछ नहीं।

सिर्फ गांड मारने की बात सुन कर मुझे लगा कि विधि का विधान भी किस तरह का होता है.. जिस पिछवाड़े को ठोकने की बात ये आदमी कह रहा है उसे मैं अभी तक फिजूल की बात समझ कर नजरअंदाज करती रही और आज यही फिजूल की बात मुझे कर्ज से मुक्ति दिलाने में सहायक हो रही है। मैं मन ही मन राजी होने लगी और खुश भी हो रही थी।

दिखावे के लिए पहले तो मैं एकदम से डर गई, मैंने ऐसे मुँह बनाया कि मुझे कुछ भी समझ में ही नहीं आ रहा हो.. मैं किस तरह से इस बात का सामना करूँ।
तभी उन्होंने आँख मारते हुए कहा- कब मरवाओगी बताओ?

उनके द्वारा मुझे मुस्कुरा कर आँख मारने की बात से मुझमें भी थोड़ी हिम्मत आई और मैंने अपने मन में सोचा कि चलो जीवन के अनुभव का मजा भी ले ही लिया जाए।
मेरे पति भी चार दिन के लिए कहीं गए हुए थे.. इसलिए मैंने कहा- कल रात को।

तभी उन्होंने अपनी पैन्ट उतार कर मुझे अपना लंड दिखा दिया, वो बहुत ही बड़ा था और लंबा भी था।

वो मुझे अपना लौड़ा दिखा कर चले गए, मैं सोचने लगी कि इतना बड़ा कैसे ले पाऊँगी।
मैंने एक कमरे में जाकर अपनी सलवार नीचे की.. मैंने देखी कि मेरी गांड बहुत टाइट थी क्योंकि आज तक मैंने कभी अपने पति को गांड मारने नहीं दी थी.. वो बहुत ज़िद किया करते थे.. लेकिन मैंने उनको कभी मौका नहीं दिया था।

अब मैं थोड़ा पछता रही थी। मुझे पता था कि गांड चूत से कई गुना टाइट होती है।

फिर उसी शाम को मेरा भतीजा आ गया, मैंने उसे खाना खिलाया और वो टीवी पर वीडियो गेम खेलने लगा।

मैंने सोचा कि वो आदमी तो 35 साल का होगा.. जिसका इतना बड़ा लंड है.. मेरी गांड उसका लंड नहीं ले पाएगी.. क्यों ना अपने भतीजे का लंड एक बार फिर ट्राइ करके देखूँ.. क्योंकि मेरे भतीजे का लंड एक बार मेरी गांड में जा ही चुका है.. और फिर से उससे एक बार गांड मरा लेने से मेरी गांड भी थोड़ी ढीली भी हो जाएगी।
मैंने उससे एक बार फिर से गांड मराने की सोची.. क्योंकि वो तो खुद ही गांड मारने के चक्कर में था।

रात हो गई थी.. मेरे बच्चा सो चुका था। मेरा भतीजा अभी अपने कमरे में सोने ही जा रहा था.. कि मैंने उससे कहा- रूको रवि।
उसकी आँखें चमकी- जी चाची जी बताओ?
मैं- आज मैं तुम्हारे साथ सोऊँगी।
वो- हाँ चाची.. क्यों नहीं.. आ जाओ।

मैं उसके कमरे में डाबर हेयर आयल की बोतल लेकर चली गई।
मैंने दरवाजा लॉक कर दिया.. साथ ही कमरे की डिम लाइट जला दी।
मैं- रवि.. मेरी पीठ दर्द कर रही है.. मालिश कर दोगे?
वो- हाँ चाची जी.. कर देता हूँ।

मैंने सोचा इससे तो एक बार गांड मरा ही चुकी हूँ.. इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा, मैंने अपनी कमीज़ ही उतार दी.. नीचे मेरी पसंदीदा वाइट ब्रा थी।
मैं उल्टी लेट गई.. वो तेल से मेरी गोरी पीठ पर हाथ से मालिश करने लगा।

मैं- बेटा.. एक काम करोगे?
वो- बताओ चाची जी?
मैं- बेटा मेरी गांड में बहुत खुज़ली हो रही है.. इसे मिटा दोगे?
वो- हाँ चाची उसी के फेर में मैं इतनी देर से हूँ।
मैं- तो ठीक है.. तुम जल्दी से अपने कपड़े उतारो।

वो खुश हो गया और जल्दी से अपने कपड़े उतारने लगा। फिर मैंने भी अपनी ब्रा उतार दी और सलवार भी उतार दी।
वो- चाची जी.. वाह्ह.. आज तो आप बड़ी गर्म हो रही हो।

मैं- हाँ यार, आज मुझे जरा खुजली हो रही है.. लेकिन तुम किसी को बताना नहीं.. कि मैं तुम्हें अपनी गांड का मज़ा देती हूँ।
वो- नहीं बताऊँगा।
मैंने उसका लंड अपने हाथ में पकड़ लिया.. वो एकदम कड़क हो गया। मैंने उसके लौड़े को सहलाना शुरू किया तो उसके मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।

मेरी टांगों पर रोम भी उगे हुए थे। जिससे मुझे लगा कि ये बाल देख कर वो आदमी मुझे नापसंद न कर दे और हमारे ऊपर चढ़ा हुआ कर्ज उतरने में कोई दिक्कत न आ जाए।
मैंने सोचा कि कल वैक्सिंग करवा ही लूँगी।

मैं घोड़ी बन गई और उससे कहा- चलो अब रेडी हो जाओ।
वो- अब क्या पूरा बताओगी, मुझे सब मालूम है चाची?
मैं- तो ठीक है जल्दी से मेरे पीछे चढ़ जाओ और उस तेल की बोतल को पकड़ो।

उसने वो आयल की बोतल को पकड़ा।

मैं- अब जल्दी से मेरी गांड में धार बनाते हुए तेल डाल दो।
मैंने अपनी गांड को हाथों से चौड़ा कर दिया.. और उसने काफ़ी सारा आयल मेरी गांड में डाल दिया।
वो- चाची जी.. तेल डाल दिया है।
मैं- ओके.. अब जल्दी से अपने लंड को मेरी गांड में डालो।

उसने अपने लंड को गांड पर रखा.. थोड़ा सा अन्दर किया.. मुझे दर्द महसूस हुआ.. तभी मैंने बेडशीट कस कर पकड़ ली। उसने थोड़ा और अन्दर किया.. मेरे मुँह से “अहह..” निकल गई।
मैंने सोचा मेरी तेज आवाज से कहीं बच्चा ना उठ जाए। मुझे दर्द बहुत हो रहा था.. क्योंकि मेरी गांड लगभग पैक जैसी थी.. जो आज मेरा भतीजा उसे फिर से खोलने जा रहा था।

उसके मुँह से भी ‘आ.. आह.. अहह.. चाच्ची..’ निकला। मैंने सोचा इसे भी मज़ा आने लगा है। उसकी हाइट कम होने के कारण उसने अपने पैर मेरी टांगों पर रख लिए। वो मेरे ऊपर ही चढ़ गया। फिर उसने और ज़ोर लगाया और उसका आधा लंड गांड को चीरता हुआ अन्दर चला गया।

मेरी आँखों में आंसू आ गए, मैंने अपना मुँह तकिए से दबा लिया। मुझे यह सब एक मजबूरी के लिए करना पड़ रहा था। उसने एक और धक्का लगाया और पूरा लंड मेरी गांड में गाड़ दिया।
मेरी टांगें एकदम कांप गईं.. और मुँह से ‘अहह…’ निकल गई।

मुझे उसके आंड अपने चूतड़ों पर टच होते फील हो रहे थे। उसका पूरा लंड मेरी गांड में समा गया था। मुझे उसका लंड उसके शुक्राणु से भरा हुआ फील हो रहा था।

उसने दो मिनट के बाद लंड बाहर निकालना शुरू कर दिया। मेरी आँखें पानी से भर गईं। मैंने अपना मुँह पूरा तकिए पर दबा दिया। उसने धीरे से अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया।
मैंने रोते हुए कहा- रुक जाओ रवि.. बहुत दर्द हो रहा है.. प्लीज़.. मुझे सहन नहीं हो रहा है।
लेकिन उसने एक ना सुनी- चाची जी बहुत मज़ा आ रहा है।
यह कह कर उसने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी।

कमरे मैं सिर्फ़ उसकी सिसकारियाँ और मेरी दर्द की “आहें..” निकल रही थीं। मेरी चूड़ियाँ और झांजरों की छन-छन हो रही थी।
मुझे पता था कि गाँव के माहौल में पले-बढे रवि में सेक्स की पावर बहुत अधिक है।

मैं नीचे लेट गई.. लेकिन वो मेरे साथ ही चिपका रहा। मैं बेसुध होकर दर्द सहने लगी, उसने अपना सारा माल मेरी गांड में निकाल दिया।
उसकी पिचकारी ने मेरी गांड में आग सी लगा दी। मुझे उसका गाढ़ा पानी अपनी गांड में निकलता हुआ फील हुआ.. वो अभी भी धीरे धक्कों के साथ पानी निकाल रहा था।

फिर मैंने उसे अपने मम्मों का सारा दूध पिला दिया.. ताकि वो कमजोर ना हो जाए क्योंकि उसका काफ़ी पानी निकला था।

अगली सुबह भी मैंने एक बार गांड उससे मरवा ली। फिर बाथरूम में जाकर मैंने उसका जमा हुआ पानी अपनी गांड से निकाल दिया।

उसी रात उस आदमी से भी अपनी गांड मरवा कर कर्ज माफ़ करवा लिया।

मुझे इतना दर्द उस आदमी से नहीं हुआ जितना भतीजे के लंड ने दिया था।

फिर तो मेरे भतीजे को मेरी गांड मारने की आदत ही पड़ गई। वो एक साल तक मेरे पास रहा.. उसने मेरी गांड को एक सिक्का ढालने जैसा कर दिया है।
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