Friday, February 23, 2018

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ट्रेन में दोस्ती से लेकर चुदाई का सफर

ट्रेन में दोस्ती से लेकर चुदाई का सफर

(Train Me Dosti Se Lekar Chudai Ka Safar)

तो बहुत आपको पका दिया मैंने, वैसे मेरा नाम शुभम है और मेरी उम्र 21 साल है. मैं अभी पुणे में जॉब कर रहा हूँ. मेरे लंड का साइज 6 इंच है, छोटा है पर मैं किसी को भी संतुष्ट कर सकता हूँ.
तो बहुत हो गयी मेरी बातें, कहानी पर आता हूँ.

तो बात करीब दो साल पहले की है, तब मेरी उम्र 19 साल थी और मई का महीना था, मेरे पेपर को टाइम था तो मैंने सोचा घर जाना चाहिये तो कपड़े पैक किये चल पड़ा रेलवे स्टेशन और वहां बैठा ट्रेन की राह देख रहा था. उतने में एक लड़की वहां आई. मैंने उसे देखा तो देखता ही रह गया, क्या फिगर था उसका!

और फिर ट्रेन आ गई, उसे भी मेरे वाली ट्रेन की प्रतीक्षा थी.

मैं ट्रेन में ऊपर वाले बर्थ पे चढ़ गया और मेरा नसीब भी इतना अच्छा कि वह ठीक मेरे सामने वाले बर्थ पे बैठ गयी और मैंने उसे घूरा और उसने मुझे देखा और स्माइल दे दी.
मैंने नज़र इधर कर दी.
फिर उसने कुछ कहा तो मुझे कुछ समझ नहीं आया, मैंने उसे कहा- क्या?
और उसने कहा- आपको नहीं!


अरे माफ़ करना दोस्तो, मैंने उसका तो नाम ही नहीं बताया, उसका नाम उसने पूनम बताया था मुझे बाद में!
उसकी उम्र भी मेरे जितनी ही थी, 19 साल और वो पुणे अपने भाई से मिलने जा रही थी.
हां तो मैंने बात आगे बढ़ाने की सोची और मैंने उससे पूछा- कहां जा रही हो?
पूनम (उसका नाम) ने कहा- क्यों?
मैं- मैं तो ऐसे ही पूछ रहा था. नहीं बताना तो मत बता, मेरे घर का क्या जा रहा है.
उसने कहा- पुणे जा रही हूँ।
मेरा मुंह उतर गया था, मैंने उसे कहा- ठीक है, जाओ.
उसने पूछा- आप कहां जा रहे हो?
मैं अपने घर अपने गांव जा रहा हूँ.

मैंने उससे पूछा- इधर कहां रहती हो?
उसने कहा- भार्गव नगर में!
उसने मुझे पूछा- आप कहां रहते हो?
मैंने उसे अपना ठिकाना बताया.

मैं- आप क्या करती हो?
वो- पढ़ती हूँ! और आप?
“मैं भी पढ़ता हूँ. और आप कौन से कॉलेज में पढ़ती हो?”
वो कहने लगी- आपको इतना क्यों जानना है?
“ठीक है, मत बताओ!”

फिर थोड़ी देर तक हमारी बात नहीं हुई और मैंने अपने हैडफ़ोन निकाले और गाने सुनने लग गया और वो कभी मुझे देखती तो उसे मैं भी कभी कभी देखता.
तो उसने मुझे इशारा किया कि मुझे भी सुनने हैं गाने!
मैंने कहा- कैसे?
तो उसने कहा- आप भी इधर आ जाओ!
और मैं उसके बर्थ पर चला गया और हम दोनों एक एक इयर फोन से गाने सुनने लग गए. थोड़ी देर में मुझे नींद आ गयी.

और काफी देर बाद जब मैं जागा तो क्या देखता कि उसकी छाती पर से चुन्नी हटी हुई है और उसमें उसके बड़े स्तन एकदम रसीले दिख रहे थे. मेरा मन वहीं हुआ कि अभी इसे चाट लूं और मेरा लंड कड़क हो गया, मैंने अपने आप पर कंट्रोल रखा और फिर से सो गया और मेरा मोबाइल मैंने उसके हाथ में दिया.
तो उसने अपना खुद का नंबर टाइप किया और अपने खुद के मोबाइल मिस कॉल कर दिया. मैंने उसे वह करते हुए चोर आँखों से देख लिया.

और जब मेरा गांव आया तो मैंने उसे बाई कहा और उसे नाम पूछा तो उसने नाम बताया ‘पूनम’
यह नाम झूठा था यह मुझको बाद में पता चला था.
उसने मेरा नाम पूछा, मैंने शुभम बताया और उसे कहा- अगर हम दोबारा कभी मिले तो मेरा नसीब अच्छा होगा.

और जैसे ही मैं ट्रेन से उतरा तो मेरे मोबाइल पे कॉल आया, उठाया तो मस्त लड़की की आवाज़ थी.
मैंने उसे पूछा- कौन?
तो वह बोली- पूनम!
अब मैं नाटक करने लग गया- कौन पूनम?
उसने कहा- अभी आप के साथ ट्रेन में जो थी!
मैंने उसे कहा- मेरा नंबर कहां से मिला?
तो कहने लगी- आप सो रहे थे तो मैंने चुपके से ले लिया था.
मैंने उसे ऐसे ही मजाक में डांटा.

फिर वो ट्रेन से पुणे चली गयी.

तब से हम दोनों फोन पर रोज बात करने लग गए. वही मुझे कॉल करती, घंटों तक बात होती.
फिर वह पुणे से नागपुर वापिस चली गई.

जब मेरी भी छुट्टियाँ खत्म हुई तो मैं भी पेपर नागपुर चला आया और अपने पेपरों की टेंशन में रहता तो हमारी कई कई दिन बात नहीं होती.
तो जैसे ही मेरे पेपर खत्म हुए, हम दोस्त लोगों ने पार्टी की और मैंने उसे कॉल किया- मैं घर जा रहा हूँ, तेरे को मिलना है तो बता?
वह बोली- हां मिलना है.
उसने एक जगह का नाम बताया और मैं वहां पे पहुंच गया पर अभी तक वह आई नहीं, मैं राह देखते देखते थक गया और मैंने उसे कॉल किया कि मैं जा रहा हूँ, मुझे बहुत लेट हो रहा है.

उसने बोला- पांच मिनट रुको बस, आ गई!
और मैं उसकी तलाश में जैसे इधर उधर देखने लग गया. उतने में वह आ गई.

मैंने जैसे ही उसे देखा, देखता ही रह गया.
वह बोली- क्या देख रहे हो?
मेरे मुंह से निकल पड़ा- एकदम पटाखा माल देख रहा हूँ!
वह बोली- अच्छा!
मैं- हां जी, क्या माल लग रही हो! क्या किया इतने दिन में!
वह- कुछ खास नहीं!

फिर मैंने उसे डांटना शुरू कर दिया- कितने टाइम से रुक कर इन्तजार कर रहा हूँ. अगर अभी पांच मिनट में अगर तू न आती तो मैं निकल जाता घर!
वह बोली- ओ के सॉरी बाबा, आगे से ऐसे नहीं करुँगी.
मैं- ठीक है. और माल लग रही है, मेरा मन कर रहा है कुछ करने का तेरे साथ!
वह पूछने लगी- क्या करने का मन कर रहा है!
मैं बोला- वही… होंठों से लेके नीचे तक का सफर!
वह बोली- पागल हो गए हो तुम शायद?
मैं- फ़्लर्ट करने लग गया हूँ तेरे प्यार में!
वह- अच्छा तो चलो कहीं लेकर!

फिर मैंने जल्दी से अपने दोस्त को कॉल किया, बोला- भाई रूम का जुगाड़ जमा!
उसने दस मिनट में रूम दिलवा दिया.
फिर मैंने उसे कहा- चलें मूवी या रूम में?
वह- मूवी में मजा नहीं आएगा, रूम में ही चलते हैं.

फिर हम बस में बैठ गए और मैं उसे रूम में ले गया.
मैं- तो करें शुरू?
वह नाटक करते हुए- क्या शुरू करना है?
मैं- कुछ नहीं… लेट जा इधर ही!
वह- सोने के लिए लाए हो या कुछ करने के लिए?

तभी मैंने उसके कंधों पर हाथ रखा और उसने अपनी आँखें बंद कर ली और तभी मैंने उसके होंठों पर होंठ रख दिए.
क्या अहसास था वह… जैसे कि मैं जन्नत में हूँ.
और वह भी मेरा साथ दे रही थी… मैं उसके होंठों को चूसता और वो मेरे होंठों को चूसती.

फिर मुझे पता ही नहीं चला और वह सिसकारियाँ लेने लग गयी, मैंने उसके बदन को गर्दन से लेकर नाभि तक चूस चूस के उसे मदहोश कर दिया और वह मेरा पूरा साथ दे रही थी. अब हम एक दूसरे की जुबान से जुबान तक चाटने लग गए.
तभी वो पीछे होते होते दीवार से लग गई, वह संभल गयी और बोली- तुमने यह क्या कर दिया?
मैं बोला- वही किया जो तुम चाहती थी!
वो बोलने लगी- यह गलत है, अभी मैं कुछ नहीं करने दूंगी.

मैंने सोचा कि अभी नहीं तो कभी नहीं… और मैंने जोर से घुमाया और उसके होंठों को चूसने लग गया पूरा इमरान हाश्मी की तरह!
तभी मैंने किस करते करते उसकी टीशर्ट निकाल दी. देखा तो क्या… उसके बूब्स क्या मस्त लग रहे थे, जैसे कह रहे हों ‘हमें इस ब्रा से मुक्त करो. हमें चूसो, खा जाओ!
मैं उसकी ब्रा के ऊपर से उसके बूब्स चाटने लग गया और उसने मेरी शर्ट निकाली और मेरे नंगे बदन को चाटने लग गई.
वह बोली- क्या मस्त बदन है तुम्हारा! काश मेरे बायफ्रेंड का भी ऐसा होता!

मैं थोड़ा चौंक गया और उसे घुड़कते हुए कहा- तुम्हारा बॉयफ्रेंड भी है?
वह बोली- मुझे माफ़ कर दो, मैं बताने वाली ही थी कि तुम स्टार्ट हो गए.
मैंने सोचा कि छोड़ो… चूत तो मिल रही है! मैंने उसे कहा- ठीक है, कोई बात नहीं!

फिर मैंने उसकी ब्रा हटा दी और उसके आम चूसने, काटने लग गया.
तभी उसने कहा- मुझे तुम्हारा लंड चाहिये.
मैंने कहा- तुम्हारा ही तो है, ले लो अपने आप!

उसने जल्दी से मेरी पैंट खोली और अंडरवियर भी और मेरा लंड देख कर बोली- इतना बड़ा? आज तो मजा आ जायेगा!
और वह मेरा लंड लॉलीपॉप की तरह चूसने लग गई.

करीब दस मिनट तक चूसने के बाद मैं उसके मुंह में ही झड़ गया और उसने मेरा पूरा वीर्य पी लिया.
वह- अब चोद भी दे मादरचोद… कितने दिन से चुदी नहीं हूँ!
मैं- कितनी बार और कितने लड़कों से चुदी हो तुम?
वह- कभी गिना नहीं… पर मेरा बॉयफ्रेंड मुझे हर हफ्ते में दो बार तो चोदता ही चोदता है. पर उसका लंड तुम्हारे लंड से छोटा है. और तुमने कितनी लड़कियों की चूत मारी है?
मैं उसकी भाषा सुन कर हैरान था, फिर बोला- तुम दूसरी हो और एकदम मजेदार भी!
वह बोली- तुम मुझे चोद सको तो चोद लो!

मैं बोला- तुम्झे नहीं तो क्या तेरी मां चड़ने तुझे यहाँ लाया हूँ!

वह कहने लगी- ले अब डाल मेरे चूत में अपना लंड!
मैंने जैसे ही उसके चूत पर अपना लंड रखा और थोड़ा सा सुपारा डाला, वह चिल्लाने लग गई- निकाल मादरचोद… तेरा यह लंड है या बेलन?
मैं थोड़ा रुका और फिर से थोड़ा धक्का दिया तो वो और चिल्लाने लग गई- ऊई माँआह… मर गई मैं मार डाला इस भोसड़ी वाले ने! माँ चोद दी मेरी! मर गई रे… उम्म्ह… अहह… हय… याह…

मैं कहां सुनने वाला था, जोर जोर से धक्के मारने लग गया, पूरे कमरे में गप्प घप्प और सिसकारियों की आवाज़ आ रही थी.
तभी वह चिल्लाई- मैं झड़ने वाली हूँ!
मैं बोला- हां झड़ जा… पर मेरा बाकी है.

कुछ मिनट के बाद मेरा भी होने वाला था, मैंने उसे कहा- मेरा निकलने वाला है, बोल कहां निकालूं?
वह- रुको, मेरे मुंह में झड़ो!
और उसने मेरा पूरा कामरस चाट लिया और पलंग पर लेट गई.

कुछ देर बाद मेरा फिर से खड़ा हुआ तो मैंने कहा- हो जाये एक और राउंड?
उसने साफ मना किया और कहा- अगली बार करेंगे! मुझे लेट हो रहा है.
मैंने भी यही ठीक समझा और हम दोनों ने मुंह हाथ धोए और कपड़े पहने और फिर से मिलने वादा करके वह निकल गई.
फिर उसके बाद वह कभी नहीं मिली और उसने अपना नंबर भी बदल दिया.

पर आज जब वह ख्याल आता है मैं उसकी चूत को याद करके मुठ जरूर मारता हूँ.
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