Tuesday, March 13, 2018

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किरायेदार आंटी की मस्त चुदाई

किरायेदार आंटी की मस्त चुदाई

(Kirayedar Aunty Ki Mast Chudai)

हैलो फ्रेंड्स, मैं दिल्ली में रहता हूँ.. मुझे देसी सेक्स स्टोरीज पर चुदाई की स्टोरी पढ़ना बहुत अच्छा लगता है। आज मैं भी अपनी स्टोरी आप लोगों से शेयर कर रहा हूँ।

मैं बीस साल का हूँ, दिखने में सामान्य हूँ, मेरा रंग भी ना ज्यादा गोरा, ना ज्यादा काला है. मेरा कद पांच फीट सात इंच, वजन 58 किलो है.
ये बात आज से दो साल पहले की है। हमारे घर पर नए किरायेदार आए थे। हमारा घर काफी बड़ा है तो हमारे घर में एक या दो परिवार किराये पर रहते ही हैं.
हमारे घर में मेरी मम्मी और मैं हम दो ही हैं, मेरे पापा ज़्यादातर बाहर ही रहते हैं।
तो जो परिवार अभी रहने आया था, उसमें अंकल का नाम हरी प्रसाद था, आंटी का नाम रूप रानी और उनके एक बच्चे का नाम विकी था.. जो कि छटी क्लास में पढ़ता था।
रूप रानी आंटी बहुत ही सेक्सी थीं, उनका रंग सामान्य गोरा, कद पांच फीट तीन इंच, बदन गदराया हुआ करीब 34-32-36 का होगा.

शुरू शुरू में तो मैंने रूप आंटी की तरफ कुछ ख़ास ध्यान नहीं दिया। लेकिन दो ही महीने के बाद एक दिन ऐसा आया.. जब मेरी मम्मी घर पर नहीं थीं, मम्मी दरवाजे पर ताला लगा कर गई थी. उस दिन बहुत गर्मी थी.. मैं कॉलेज से आया और आंटी के पास घर की चाभी लेने चला गया।
आंटी उस टाइम अपने कमरे की सफाई कर रही थीं, उन्होंने सिर्फ़ ब्लाउज और पेटीकोट पहना हुआ था.. मैंने गौर से देखा कि उन्होंने ब्रा नहीं पहनी हुई थी और पसीना आने के कारण उनके ब्लाउज गीला हो गया था और उनके मम्मे साफ़ दिखाई दे रहे थे।

जब मैं उनके कमरे में गया.. तो यह सब देख कर दंग रह गया, मेरी नज़र उनके मम्मों पर टिक गई।
उन्होंने शायद मेरी नज़र को पकड़ लिया.. इसलिए जल्दी से मुझे घर की चाभी दे दी।

उस दिन से मैं सोचने लगा कि ये रूप आंटी तो बहुत मस्त माल हैं, आंटी को चोदने का मौका मिल सकता है क्या? इसी मौके की तलाश में मैंने रूप आंटी से मेल जोल बढ़ाना शुरू कर दिया, ज़्यादा घुलमिल कर रहने लगा।

कुछ दिनों के बाद मेरी मम्मी को किसी काम से बुआ जी के पास दूसरे शहर में जाना पड़ा। मैं उस दिन कॉलेज नहीं गया… अंकल काम पर चले गए और उनका बेटा स्कूल चला गया।

मैं चुपके से छत पर गया और उनके बाथरूम का पानी बंद कर आया। जब आंटी नहाने गईं.. तो पानी ना होने के कारण वो नीचे हमारे बाथरूम में नहाने आ गईं। उनके हाथ में सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज था।
हमारे बाथरूम के दरवाजे में एक छेद था। कुछ देर बाद मैंने उस छेद से देखा.. तो आंटी बिल्कुल नंगी थीं.. और अपनी चूत की शेविंग कर रही थीं। शेव करने के बाद उन्होंने सारे बदन पर साबुन लगाया और फिर बिना ब्रा और बिना पैन्टी के पेटीकोट पहन लिया।

फिर मैं छेद से हट गया.. मेरे छेद से हटते ही बाथरूम में उस छेद से रोशनी गई.. तो शायद उन्हें शक़ हो गया था इसलिए जब वो बाहर आईं तो उन्होंने दरवाजा ध्यान से देखा और फिर मेरी तरफ देख कर हल्का सा मुस्करा कर चली गईं।

आंटी के ऊपर जाने के बाद मैं घर में अकेला था, रूप आंटी का नंगा बदन देख कर मेरी कामुकता जागी हुई थी, मैंने टीवी ऑन किया.. ब्लू-फिल्म की सीडी निकाली और देखने लगा।

कुछ देर बाद ऊपर पानी ना होने के कारण आंटी नीचे बर्तन धोने आ गईं.. मैं फिल्म देखने में मस्त था और आंटी कमरे में आ गईं और मेरे टीवी पर ब्लू फिल्म चलती देख कर हैरान रह गईं।

आंटी के आने का जब मुझे पता चला तो मैंने जल्दी से टीवी बंद कर दिया.
तो आंटी बोलीं- तुम कितने गंदे हो.. जो ऐसी फ़िल्म देखते हो?
तो मैंने कहा- क्या करूँ आंटी… अब मेरी उम्र ही ऐसी है कि इसके बिना गुजारा ही नहीं होता।
वो कुछ नहीं बोलीं और बर्तन धोकर चली गईं।

उनके जाने के बाद मैं फिर फिल्म देखने लगा.

कुछ देर बाद आंटी चाय लेकर आईं और उन्होंने फिर से फिल्म चलते देखी लेकिन इस बार मैंने टीवी बंद नहीं किया।
उस वक़्त फिल्म में लड़की लड़के का लण्ड चूस रही थी।
आंटी ने यह देखकर कहा- हाय.. कितना गंदा सीन है… तुम्हें शरम नहीं आती?
तो मैंने कहा- इसमें शरम की कौन सी बात है आंटी.. आप भी तो अंकल के साथ ये सब करती ही होंगी।

आंटी ने कहा- नहीं.. तीन साल हो गए.. मैंने और तुम्हारे अंकल ने कुछ नहीं किया।

मुझे लगा कि शायद आंटी चुदना चाहती हैं। मैंने आंटी से इसी टॉपिक पर कुछ बातें की.. तो आंटी ज़्यादा ना बोलती हुईं उठकर चली गईं।

करीब 5 मिनट बाद हिम्मत करके मैं भी ये सोच कर ऊपर गया कि जाकर आंटी को पकड़ लेता हूँ.. जो होगा देखा जाएगा।
मैंने जाकर देखा कि आंटी बिस्तर पर लेटी हैं और उनका हाथ उनके पेटीकोट में था, शायद वे अपनी उंगली चूत में डाल कर हस्त मैथुन यानी फिंगर फकिंग रही थीं।

जब मैं कमरे के अन्दर गया.. तो आंटी ने एकदम से हाथ बाहर निकाल लिया और उठ कर सीधी बैठी हो गईं।

मैं आंटी के पास बैठ गया और एकदम से उनके मम्मों को दबा दिया।
आंटी ने मेरी हरकत का विरोध किया और कहा- यह क्या कर रहे हो?
तो मैंने कहा- रूप आंटी, आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो।
और मैंने उन्हें बिस्तर पर लेटा लिया।

आंटी अब मेरा विरोध भी कर रही थीं.. और साथ भी दे रही थीं। मैं उनके ऊपर लेट गया और उनके होंठों पर किस करने लगा। वो भी हल्के विरोध के साथ मेरा साथ देने लगीं।

दो तीन मिनट बाद ही मैंने उनके ब्लाउज के हुक खोले, ब्रा तो आंटी ने पहनी ही नहीं थी तो उनके मम्मों को आज़ाद कर दिया। मैं एक हाथसे आमटी की चूची मसलने लगा और साथ साथ लैब चुम्बन भी कर रहा था. कुछ देर ऐसे ही लिप किस करने के बाद मैं उनके मम्मों को चूसने लगा।

आंटी गर्म होने लगीं.. उनके मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं। तभी मैंने उनके मम्मों पर काट लिया.. और वो एकदम से तिलमिला उठीं. मुझसे कहने लगीं- ऊई.. काटो मत.. दर्द होता है।
उनके रसीले मम्मों को चूसते हुए मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया और अपना हाथ उनकी चूत पर ले गया और चूत को सहलाने लगा। आंटी की चूत पर बाल नहीं थे, साफ़ चिकनी थी.

आंटी अब पूरी गर्म हो रही थीं.. मैंने आंटी के सारे कपड़े उतार दिए.. आंटी बिल्कुल नंगी हो गई थीं। उनकी आँखों में मस्ती छाई हुई थी। मैंने भी अपने कपड़े उतारे और अपना लण्ड उन्हें चूसने को कहा।
आंटी ने हिचकिचाते हुए कहा- मैंने ऐसा कभी नहीं किया.. मुझे करना नहीं आता।
मैंने कहा- आंटी, आपने ब्लू फिल्म का सीन देखा था ना.. बस वैसे ही करो।

तो आंटी ने मेरा लण्ड पकड़ लिया और उसे मुंह में ले कर धीरे धीरे चूसने लगीं.. जैसे ही उन्हें लौड़ा चूसना अच्छा लगा तो फिर वो एकदम से तेज़ हो गईं.. अब वे मेरा पूरा लण्ड मुँह में लेकर चूसने लगीं।

मैं तो आनन्द से मस्ती में पागल हो रहा था.. बहुत ज्यादा मजा आ रहा था मुझे!

फिर कुछ देर बाद मैंने आंटी को बिस्तर पर लेटाया, उनके चूतड़ों के नीचे एक तकिया रखा और उनकी साफ़ चूत चाटने लगा.. आंटी भी आनन्द से पागल होने लगी।
फिर हम दोनों 69 की अवस्था में हो गए और एक दूसरे के यौन अंगों को चूसने चाटने लगे.

कुछ देर के बाद मैंने सोचा कि बस अब बह्बुत हो गया ये चूसना चाटना… अब असली काम पर आते हैं… मैंने आंटी को बिस्तर पर चित लिटाया और लण्ड उनकी चूत पर रगड़ने लगा. तो आंटी बोलीं- अब बर्दाशत नहीं होता.. जल्दी से डाल दो।
मैंने अपना लण्ड आंटी की चूत के मुँह पर रखा और धक्का लगाया.. तो लण्ड थोड़ा सा अन्दर गया और आंटी के मुँह से हल्की सी चीख निकली- उह… हाह…

मैंने दूसरा धक्का लगाया और पूरा लण्ड अन्दर डाल दिया तो आंटी ज़ोर से चीख उठीं और कहने लगीं- ओह.. बाहर निकालो.. दर्द हो रहा है.. तुम्हारा तो बहुत मोटा और लंबा है।
पर मैंने आंटी की एक ना सुनी और उनके होंठों पर क़ब्ज़ा कर लिया। दो तीन मिनट के बाद मैं धीरेधीरे लण्ड को आंटी की चूत के अन्दर बाहर करने लगा।

अब तो आंटी को भी मजा आने लगा, उनके मुख से सीत्कारें निकाल रही थी- उम्म्ह… अहह… हय… याह…
फिर मैं धीरे धीरे तेज़ हो गया, आंटी को तेज तेज चोदने लगा, आंटी भी नीचे से अपने चूतड़ उछाल उछाल कर मेरा साथ दे रही थीं।

कुछ देर के बाद आंटी झड़ गईं लेकिन मैं अपने काम पर लगा रहा। तक़रीबन 15 मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था.. तो मैंने आंटी से पूछा- आंटी, मैं आने वाला हूँ, क्या करूँ..?
वो बोलीं- अन्दर ही जाने दो।

मैंने पांच सात झटके मारे और अपना पानी आंटी की चूत के अन्दर ही छोड़ दिया।
इन 15-20 मिनट की चुत चुदाई में हमने कई आसन बदले।

झड़ने के बाद कुछ देर हम एक-दूसरे के साथ लेटे रहे।

दस मिनट के बाद मैं फिर से आंटी को किस करने लगा और वो फिर से गर्म होने लगीं।
इस बार उन्होंने खूब जमकर लण्ड चूसा और मैंने उनकी चूत भी चचोरी। हमने फिर से सेक्स किया। उस दिन मैंने आंटी के साथ 4 बार चोदा.. अब आंटी संतुष्ट थीं।

उन्होंने कहा- तुम्हारा लण्ड बहुत ज़बरदस्त है। बहुत मजा आता है चुद कर!

उस दिन के बाद आज तक मैं आंटी को नियमित रूप से चोद रहा हूँ और वो मेरे से पूर्णतया संतुष्ट हैं।
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